
भारत का केबल टीवी उद्योग तेजी से सिकुड़ता जा रहा है। हाल ही में आई ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और Ernst & Young (EY) इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में 2018 से 2025 के बीच लगभग 5.77 लाख नौकरियां केबल टीवी सेक्टर से समाप्त हो चुकी हैं। यह आंकड़ा सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक गहरी मीडिया क्रांति की ओर इशारा करता है, जहां पारंपरिक टीवी सेवाएं धीरे-धीरे पिछड़ती जा रही हैं और डिजिटल ओटीटी प्लेटफॉर्म तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
ओटीटी का बढ़ता दबदबा: केबल टीवी की गिरावट का बड़ा कारण
रिपोर्ट में यह स्पष्ट बताया गया है कि भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे Netflix, Amazon Prime Video, Disney+ Hotstar और JioCinema ने लोगों की टीवी देखने की आदतों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। जहां पहले लोग केबल टीवी से जुड़े रहते थे, अब वे कम पैसों में, बिना विज्ञापन, जब चाहें तब कंटेंट देखना पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि 2018 में 151 मिलियन पे-टीवी सब्सक्राइबर की संख्या 2024 में घटकर 111 मिलियन रह गई है। यह गिरावट यहीं रुकने वाली नहीं है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या और गिरकर 71 से 81 मिलियन के बीच पहुंच सकती है।
केबल टीवी इंडस्ट्री की गिरावट का सबसे बड़ा कारण यही ओटीटी क्रांति है। दर्शकों को अब स्पोर्ट्स, फिल्में, वेब सीरीज, न्यूज और इंटरनेशनल कंटेंट तुरंत मोबाइल या स्मार्ट टीवी पर उपलब्ध हो रहा है। साथ ही ओटीटी कंपनियां भारी निवेश करके लोकल भाषाओं में कंटेंट बना रही हैं, जिससे गांव और छोटे शहरों के लोग भी तेजी से ओटीटी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
लागत बढ़ी, लेकिन ग्राहक घटे: कंपनियां कर रहीं नुकसान झेलने की मजबूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, केबल कंपनियों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन ग्राहक तेजी से कम हो रहे हैं। खासकर चैनलों की कीमतें बढ़ने के बावजूद, स्थानीय केबल ऑपरेटर ग्राहकों से टैरिफ बढ़ाकर पैसा नहीं वसूल पा रहे हैं। इससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ा है। पिछले पांच वर्षों में केबल टीवी सेक्टर का कुल राजस्व ₹25,700 करोड़ से घटकर ₹21,500 करोड़ रह गया है, और कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी ₹4,400 करोड़ से गिरकर ₹3,100 करोड़ तक सिमट गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देशभर में करीब 900 मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (MSO) और 72,000 लोकल केबल ऑपरेटर (LCO) इस गिरते कारोबार के चलते बंद हो चुके हैं। इससे करीब 5.77 लाख नौकरियां सीधी या अप्रत्यक्ष रूप से खत्म हो चुकी हैं। इस संकट ने छोटे स्तर पर काम करने वाले हजारों परिवारों को भी प्रभावित किया है।
वैश्विक स्तर पर भी केबल टीवी का गिरता ग्राफ
यह संकट केवल भारत में नहीं है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के विकसित देशों में भी केबल टीवी का भविष्य कमजोर हो चुका है। अमेरिका में 2015 के बाद से हर साल लाखों सब्सक्राइबर केबल छोड़ रहे हैं और ओटीटी की तरफ जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में 2024 में केवल 40% घरों में पारंपरिक केबल कनेक्शन बचे हैं, जो 2010 में 85% हुआ करते थे। यूरोप और जापान में भी ओटीटी प्लेटफॉर्म की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता ने पारंपरिक ब्रॉडकास्ट सिस्टम को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में भी यही ट्रेंड अब और तेज होने वाला है। सस्ते मोबाइल डेटा, 5G की स्पीड और ओटीटी पर लगातार आते नए-नए शो ग्राहकों को और तेजी से खींच रहे हैं। भारत में JioCinema जैसे मुफ्त या बेहद सस्ते ओटीटी विकल्प ने केबल टीवी के लिए बाजार को और कठिन बना दिया है।
केबल टीवी के लिए बची सीमित उम्मीद
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केबल टीवी कंपनियों के पास वापसी का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। भारत में अब भी करीब 85 से 90 मिलियन परिवारों में पे-टीवी सक्रिय है। अगर ये कंपनियां सस्ती, क्षेत्रीय और आकर्षक पैकेज लाएं, लोकल कंटेंट को बढ़ावा दें और तकनीकी रूप से खुद को ओटीटी जैसी सुविधाएं देने में सक्षम करें, तो वे कुछ हद तक अपनी बाजार हिस्सेदारी बचा सकती हैं।
उद्योग के जानकारों का कहना है कि अगर सरकार केबल, डीटीएच और ओटीटी सभी के लिए समान नियम लागू करे, टैरिफ को क्षेत्रीय स्तर पर तय करने की अनुमति दे और पाइरेसी रोकने के लिए सख्त कानून लाए, तो इस सेक्टर को कुछ राहत मिल सकती है।
निष्कर्ष: क्या केबल टीवी इतिहास बन जाएगा?
सवाल अब यही है कि क्या केबल टीवी भारत में अगले दशक में इतिहास बन जाएगा? रिपोर्ट की गहराई और बाजार की मौजूदा चाल देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर केबल कंपनियों ने समय रहते रणनीति नहीं बदली, तो ओटीटी प्लेटफॉर्म उन्हें पूरी तरह हाशिए पर धकेल देंगे। मोबाइल और स्मार्ट टीवी पर कंटेंट की बढ़ती पहुंच के बीच, पारंपरिक केबल मॉडल में दम तोड़ने की आशंका अब और मजबूत होती जा रही है।
यह एक ऐसा बदलाव है, जो न केवल भारत के मीडिया उद्योग को बदल देगा, बल्कि लाखों छोटे ऑपरेटरों, तकनीशियनों और ग्राउंड लेवल कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी गहरा असर डालेगा।
Author: THE CG NEWS
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