
अमेरिकी छात्र रैंडी गार्डनर ने विज्ञान मेले में दोस्तों के साथ की गई शर्त पर आश्चर्यजनक रूप से 264 घंटे (लगभग 11 दिन) तक नींद नहीं ली। इस अतिव्यापक अनुभव ने सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि नींद की आवश्यकताओं की मानव सीमा और शरीर पर गहरे प्रभावों की भी पहचान कराई।
11 दिन तक जागरण की शुरुआत
17 वर्ष की आयु में गार्डनर और दो दोस्त—ब्रूस मैकएलिस्टर और जो मार्सियानो—ने एक शर्त लगाई कि वे हानोलुलु के डीजे टाम राउंड्स का 260 घंटे का रिकॉर्ड तोड़ेंगे। इस अनूठी पहल के तहत गार्डनर ने बिना किसी नींद और किसी स्टिमुलेंट्स के यह चुनौती स्वीकार की ।
शुरुआती प्रभाव: पाँच दिन में मानसिक समस्याएँ
तीसरे दिन के बाद ही गार्डनर को ध्यान केंद्रित करने में समस्या और स्मृति संबंधी लोप का सामना करना पड़ा। चौथे-पाँचवे दिन में मतिभ्रम (hallucinations) और भयभीत अनुभव शुरू हो गए। शुले के रिकॉर्ड बताते हैं कि पांचवें दिन तक उनका मानसिक नियंत्रण कमजोर हो गया, पर शारीरिक रूप से वे सामान्य लग रहे थे ।
विशेषज्ञों का हस्तक्षेप और अनोखे रिकॉर्ड
तीसरे दिन के बाद Stanford के प्रसिद्ध निद्रा वैज्ञानिक डॉ. विलियम डिमेंट व नेवी के लेफ्टिनेंट कमांडर जॉन रॉस ने इस अध्ययन में भाग लिया और गार्डनर की दिमागी गतिविधि, रक्तचाप, दौरा और तनाव स्तर को लगातार मॉनिटर किया ।
गजब की बात यह रही कि दसवें दिन भी गार्डनर पिनबॉल मैच जीत गए, जिसने दर्शाया कि ब्रेन की अद्भुत प्रतिबलता होती है ।
अंतिम दिन: अनुभव की शारीरिक-मानसिक पीड़ा
264 घंटे बाद जब गार्डनर रिकॉर्ड बनाकर अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने बताया कि उन्हें चिढ़चिढ़ापन, भयावस्था, स्मृति लोप और मतिभ्रम का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ छोटे कार्य भी वे करना भूलते थे, जैसे गणना करना या साधारण कार्य करना ।
अस्पताल में उन्होंने पहली बार लगभग 14 घंटे 45 मिनट की गहरी नींद ली, जिसके बाद तकरीबन एक रात तक सामान्य नींद का अनुभव हुआ ।
दीर्घकालीन असर और ज्ञानवर्धन
गार्डनर ने बाद में बताया कि इस अनुभव के कारण उन्हें दशकों तक अनिद्रा बनी रही। उनकी नींद संरचना प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई और उन्हें समय-समय पर जमकर नींद न आना पड़ता। इस घटना ने नींद विज्ञान को नए आयाम दिए और “microsleep” नाम की नींद के क्षणिक रूप की खोज को आगे बढ़ाया ।
क्या इंसान मरेगा नींद न लेने से?
वैज्ञानिकों का मानना है कि व्यक्ति लगभग 11 दिनों तक जाग सकता है लेकिन इसके बाद किसी दुर्घटना या बीमारी के जोखिम में बढ़ोतरी हो जाती है। अत्यधिक नींद की कमी से हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, दुर्घटनाएं और मानसिक परेशानी बढ़ सकते हैं। दुर्लभ मामलों में, जैसे कि Fatal Familial Insomnia, व्यक्ति बिना उपचार के कुछ महीनों में मर सकता है ।
निष्कर्ष: सौंदर्य से परे यह चुनौती
रैंडी गार्डनर का 11 दिन तक जागता रहना सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि नींद की अत्यावश्यकता को समझने की चेतावनी है। इसने साबित किया कि बीमारी का बीड़ा उठाते समय इंसान कितना आगे जा सकता है, पर दीर्घावधि में इसके दुष्परिणाम खतरनाक होते हैं। आज भी नींद विशेषज्ञ इसे नींद विज्ञान के इतिहास में एक चिरस्थायी घटना मानते हैं।
हमें यह समझना चाहिए कि नींद “बड़ी त्री”—भोजन, पानी और नींद—में से एक अत्यंत आवश्यक तत्व है, और उसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए ।
Author: THE CG NEWS
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