विदेश नीति में नया मोड़: भारत संसद में बनाएगा ‘अंतरराष्ट्रीय दोस्ती समूह’, वैश्विक मंच पर बढ़ेगी प्रभावशीलता

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भारत ने अपनी विदेश नीति को और मजबूती देने के लिए एक नई कूटनीतिक पहल की शुरुआत की है। भारत सरकार ने संसद में ‘पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स’ (अंतरराष्ट्रीय दोस्ती समूह) बनाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य विश्व के विभिन्न देशों की संसदों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना, सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना और भारत की वैश्विक स्थिति को और सशक्त करना है। इस ऐलान को भारत के हालिया विदेश नीति बदलावों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

भारत का वैश्विक मंच पर सक्रिय होना जरूरी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने इस नई पहल की जानकारी देते हुए कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति में बहुपक्षीय संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स’ के माध्यम से भारत की संसद सीधे विश्व की अन्य संसदों से संवाद कर सकेगी और इस तरह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

भारत पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयासों में जुटा है। हाल ही में “ऑपरेशन सिंदूर” के माध्यम से भारत ने अपनी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में मजबूती दिखाई थी। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने विभिन्न देशों के सांसदों का समर्थन हासिल कर पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ मजबूत वैश्विक संदेश दिया था।

संसद स्तर पर बढ़ेगा कूटनीतिक संवाद

ओम बिड़ला ने बताया कि अब भारत केवल विदेश मंत्रालय या राजदूतों के स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद स्तर पर भी सीधा संवाद स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि यह दोस्ती समूह न केवल सांसदों के व्यक्तिगत स्तर पर संबंध बनाएंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और तकनीक के क्षेत्रों में भी सकारात्मक विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

लोकसभा अध्यक्ष के अनुसार, इन समूहों के गठन से भारत उन देशों के साथ अपनी राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी को और व्यापक कर सकेगा, जो भविष्य में भारत के रणनीतिक साझेदार बन सकते हैं।

हालिया वैश्विक घटनाओं से मिली प्रेरणा

भारत सरकार की यह पहल “ऑपरेशन सिंदूर” से सीधे तौर पर जुड़ी मानी जा रही है। इस ऑपरेशन में भारत ने एक बहु-पक्षीय सांसद प्रतिनिधिमंडल को वैश्विक स्तर पर भेजा था, जिसमें भारत के रुख का समर्थन करने के लिए कई देशों के सांसदों को जोड़ा गया था। इस कूटनीतिक सफलता के बाद भारत ने महसूस किया कि यदि संसद स्तर पर नियमित संवाद और सहयोग स्थापित किए जाएं तो भारत की आवाज़ वैश्विक स्तर पर और प्रभावी तरीके से पहुंच सकती है।

भारत सरकार इस नीति के तहत जापान, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, यूएई जैसे देशों के साथ विशेष दोस्ती समूह बनाने की योजना पर काम कर रही है।

संसद के आगामी मानसून सत्र में होगी शुरुआत

इस योजना को संसद के आगामी मानसून सत्र में आधिकारिक रूप से शुरू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से भारत को न केवल राजनीतिक स्तर पर, बल्कि वैश्विक आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, व्यापार समझौतों और सुरक्षा मामलों में भी रणनीतिक लाभ मिलेंगे।

संसद के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह दोस्ती समूह न केवल राजनीतिक लाभ के लिए होगा, बल्कि सांसदों के व्यक्तिगत और सांस्कृतिक अनुभव साझा करने का भी मंच बनेगा। इससे भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को और बल मिलेगा।

भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव

इस योजना से यह साफ हो जाता है कि भारत अब विदेश नीति को केवल मंत्रियों तक सीमित नहीं रखना चाहता। भारत दुनिया भर में अपने कूटनीतिक नेटवर्क को मजबूत कर एक ऐसा माहौल बनाना चाहता है, जहां वैश्विक मंच पर भारत की आवाज़ नज़रअंदाज न हो।

इस नई पहल के माध्यम से भारत आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मामलों में पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहा है। यह योजना भारत के विदेशी संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

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Author: THE CG NEWS

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