
पाकिस्तान-चीन के आतंकवादियों को ढकेलने को भारत ने कहा “नहीं”
26 जून: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक नाटकीय और सशक्त कूटनीतिक कदम उठाया। भारत ने बैठक के संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि इसमें आतंकवाद पर स्पष्ट और दृढ़ रुख नहीं था और पाकिस्तान को दोहरे मानदंडों के आधार पर संबोधित नहीं किया गया। यह न केवल भारत की सुरक्षा चिंताओं का संकेत है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी संप्रभुता का प्रदर्शन भी है।
क्यों ठुकराया बयान – आतंकवाद पर अस्पष्टता सहन नहीं
भारतीय राजदूतों और रक्षा अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तुत मसौदा आतंकवाद की तीव्र निंदा और पाकिस्तान की भूमिका पर चुप्पी रखने का प्रयास कर रहा था। इस पर भारत ने कहा कि आतंकवाद दोहरे मानदंडों से सफलता नहीं पाएगा—विशेष रूप से पाकिस्तान जैसे देश जहां से चरमपंथ और हमला सुपोर्ट का संदेह है। भारत इस नीति को किसी भी दशा में स्वीकार नहीं करेगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत क़दम मजबूत
बैठक में राम-राजनीतिक मोर्चे के अलावा शत्रुओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की रणनीति अपनाई। बैठक में शामिल होने से पहले रक्षा मंत्री को विस्तारपूर्वक इसकी जानकारी दी गई थी ताकी भारत अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रख सके। यह पहल बैठक तय करने में भारत की तैयारी और संकल्प का संकेत है।
पहली द्विपक्षीय बैठक – भारत-चीन सैन्य वार्ता में नया अध्याय
चिंगदाओ बैठक के दौरान यह ऐतिहासिक भी था कि भारत और चीन के रक्षा मंत्री पहली बार गलवान झड़प के बाद आमने-सामने मिले। हालांकि आतंकवाद, सीमाओं और व्यापक सुरक्षा पर सहमति नहीं बन सकी, बावजूद इसके यह वार्ता भारत–चीन में संवाद के नए दौर का संकेत है।
राजनाथ सिंह का निर्णायक रुख – आतंकवाद का कोई धर्म नहीं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक में कहा कि आतंकवाद शांति के दुश्मन है और इसके लिए देश या धर्म के आधार पर कोई छुट नहीं दी जा सकती। उन्होंने पाकिस्तान को न केवल कटघरे में खड़ा किया, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सख्ती फिर से स्पष्ट की।
NSA अजित डोवाल का आह्वान – दोहरे मानदंडों को त्यागें
SCO समिट में NSA अजित डोवाल ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड नहीं चलेगा। उन्होंने संयुक्त सूचना अभियान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि Lashkar-e-Taiba और JeM जैसे संगठन UN की काली सूची में शामिल किए जाएँ और आतंकवाद के प्रत्याश्य तंत्र को बेनकाब किया जाए।
पाकिस्तान–भारत की राजनीतिक टकराहट का SCO पर असर
बैठक से पहले SCO के अन्य दस्तावज़ों में भी हालिया आतंकी घटनाओं जैसे पहलगाम हमले का विरोध शामिल था, लेकिन पाकिस्तान ने जवाबी दस्तावेज में अलग घटनाओं का उल्लेख करने की जिद की। इस तरह भारत के आतंकवाद विरोधी प्रस्ताव और पाकिस्तान के संरक्षणवादी रुख के बीच अंतर साफ उभरता है—और यह SCO के साझे बयान पर असर डाल रहा है।
अंतराष्ट्रीय दृष्टिकोण: भारत की रणनीतिक सजगता
विश्लेषकों के अनुसार, भारत ने न केवल आतंकवाद पर स्पष्ट रुख दिखाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी धारणा की संप्रभुता भी कायम रखी—चाहे वह BRI के विरोध हो या संयुक्त बयान पर सहमति न देना। यह संकेत है कि अब भारत सुरक्षा मामलों में अपने हितों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने को प्राथमिकता दे रहा है।
निष्कर्ष
SCO रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत द्वारा बयान से इनकार का मतलब केवल कूटनीतिक असहमति नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत अब आतंकवाद जैसे मुद्दों पर करो या मरो की सोच नहीं बल्कि स्पष्ट नीति और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रहा है। ग्लोबल मंच पर अपनी रणनीतिक रुख की यह अभिव्यक्ति आने वाले समय में भारत की सुरक्षा ढाँचे और संवाद प्रक्रिया में गहरी प्रभाव डालेगी।
Author: THE CG NEWS
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