
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां योग और अध्यात्म की आड़ में एक बाबा लंबे समय से नशे और अय्याशी का अड्डा चला रहा था। पुलिस ने 25 जून 2025 को इस नकली बाबा को उसके आलीशान फार्महाउस से गिरफ्तार किया। आश्रम के नाम पर बनाए गए इस फार्महाउस से भारी मात्रा में गांजा, नशीली दवाएं, सेक्स टॉयज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।
बाबा सोनू उर्फ तरुण अग्रवाल की गिरफ्तारी
पुलिस ने बताया कि आरोपी बाबा का असली नाम तरुण अग्रवाल है, उम्र 45 वर्ष। वह खुद को अंतरराष्ट्रीय योग गुरु बताता था। उसने दावा किया था कि उसने 100 से ज्यादा देशों में योग सिखाया है और हजारों विदेशी अनुयायी उसके संपर्क में हैं। जांच में पता चला है कि बाबा ने डोंगरगढ़ की प्रज्ञागिरी पहाड़ी के पास करीब ₹6 करोड़ की लागत से एक फार्महाउस तैयार किया था, जिसे वह “योग आश्रम” के रूप में प्रचारित करता था।
फार्महाउस की सच्चाई: आध्यात्म नहीं, अय्याशी
जब पुलिस की टीम फार्महाउस पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी चौंक गए। फार्महाउस में महंगे मार्बल, फर्नीचर, विदेशी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, और विशेष मेडिटेशन रूम के नाम पर रंगीन रोशनी वाले कक्ष बने हुए थे। यहां कई विदेशी युवतियों के आने-जाने की जानकारी भी मिली है।
पुलिस ने फार्महाउस से करीब 2 किलो गांजा, नशे के इंजेक्शन और टैबलेट्स, सेक्स टॉयज, और वीआग्रा जैसी दवाएं बरामद की हैं। इसके साथ ही विदेशी मूल की कई वस्तुएं और संदिग्ध बॉक्स भी मिले हैं, जिनकी जांच साइबर सेल कर रही है।
विदेशी फंडिंग और NGO का जाल
बाबा ने अपने फार्महाउस को आश्रम और योग प्रशिक्षण केंद्र का नाम देकर विदेशों से फंडिंग जुटाई। वह खुद को कई एनजीओ से जुड़ा हुआ बताता है और सोशल मीडिया पर उसके लाखों विदेशी फॉलोअर्स हैं। पुलिस को शक है कि इन एनजीओ के जरिए ही नशे का अंतरराष्ट्रीय रैकेट संचालित हो रहा था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब इस मामले की जांच में जुट गया है। बाबा के बैंक खातों, पासपोर्ट, विदेशी यात्राओं और एनजीओ की गतिविधियों की गहन छानबीन की जा रही है। संभावना है कि यह मामला सिर्फ नशे और अय्याशी तक सीमित नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी तक भी जुड़ा हो सकता है।
स्थानीय युवाओं को फंसाने की साजिश
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बाबा स्थानीय युवाओं को “मेडिटेशन”, “पीस कैम्प” और “वेलनेस वर्कशॉप” के नाम पर बुलाता था। लेकिन आश्रम में उनके साथ नशे की आदत डाली जाती और उन्हें इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया जाता।
डोंगरगढ़ जैसे धार्मिक स्थल पर इस तरह का गंदा खेल सामने आना स्थानीय लोगों के लिए बहुत ही शर्मनाक और चौंकाने वाला है। प्रज्ञागिरी पहाड़ी, जहां लोग आध्यात्मिक शांति के लिए जाते हैं, उसी जगह ऐसे कारनामे प्रशासन पर भी सवाल उठाते हैं।
प्रशासन और समाज की ज़िम्मेदारी
अब सवाल यह उठता है कि इतने लंबे समय से यह गतिविधियाँ चल रही थीं और प्रशासन कैसे अनजान रहा? क्या यह लापरवाही थी या किसी स्तर पर मिलीभगत?
फिलहाल बाबा को NDPS एक्ट के तहत जेल भेजा जा चुका है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यदि इस आश्रम से जुड़े और लोग या फंडिंग नेटवर्क सामने आते हैं तो सभी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
यह मामला फिर से यह साबित करता है कि अध्यात्म, योग और धर्म की आड़ में किस तरह से कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ और अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि बाबा सोनू के साथ-साथ उसकी पूरी जालसाजी का नेटवर्क कब तक बेनकाब होता है।
Author: THE CG NEWS
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