अंतरराष्ट्रीय खबर: कनाडा ने अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स लगाने का फैसला टाला, ट्रम्प की धमकी के बाद पीएम कार्नी का बयान – “बिजनेस पर फिर करेंगे बात”

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कनाडा सरकार ने फिलहाल अमेरिकी टेक और डिजिटल कंपनियों पर प्रस्तावित डिजिटल सेवा कर (Digital Services Tax – DST) लगाने का फैसला टाल दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने दोबारा टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा व्यापार वार्ता के ज़रिए सुलझाया जाएगा।

क्या था विवाद?

कनाडा सरकार ने 2021 में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें गूगल, अमेज़न, फेसबुक (अब मेटा) और एप्पल जैसी अमेरिकी डिजिटल कंपनियों पर 3% डिजिटल सेवा कर लगाने की योजना बनाई गई थी। इसका मकसद उन कंपनियों से टैक्स वसूलना था जो कनाडा में बड़े पैमाने पर मुनाफा तो कमाती हैं, लेकिन यहां सीमित टैक्स देती हैं।

हालांकि, इस प्रस्ताव को 2024 तक के लिए स्थगित किया गया था, ताकि OECD (ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट) के ग्लोबल टैक्स फ्रेमवर्क का इंतजार किया जा सके। इस साल जब यह समयसीमा खत्म हुई, तब कनाडा ने संकेत दिए कि वह कर लागू कर सकता है।

ट्रम्प की प्रतिक्रिया और चेतावनी

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो 2024 चुनाव हारने के बावजूद अब फिर से चुनावी दौड़ में हैं, उन्होंने कनाडा के इस कदम की आलोचना की थी। ट्रम्प ने कहा था कि यदि कनाडा ने अमेरिकी कंपनियों पर “अनुचित कर” लगाया, तो अमेरिका कनाडाई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाएगा।

उन्होंने एक बयान में कहा,
“हम अपनी कंपनियों को विदेशी टैक्स से बचाएंगे। अगर कोई देश हमारे बिजनेस को टारगेट करेगा, तो उसे उसका आर्थिक जवाब मिलेगा।”

कार्नी का संतुलित रुख

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जो एक अनुभवी अर्थशास्त्री और बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर रह चुके हैं, ने ट्रम्प के बयानों का सीधे जवाब देने से परहेज़ किया। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा किसी टकराव में नहीं जाना चाहता।

PM कार्नी ने कहा,
“हम व्यापारिक स्थिरता में विश्वास रखते हैं। टैक्स नीति कोई राजनीतिक हथियार नहीं होनी चाहिए। हम अमेरिका के साथ अपने व्यापार संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं और इस मुद्दे पर फिर से चर्चा करेंगे।”

उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल टैक्स को लागू करने की कोई तारीख तय नहीं की गई है और यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों और आपसी बातचीत से सुलझाया जाएगा।

अमेरिकी कंपनियों ने ली राहत की सांस

गूगल, मेटा और अमेज़न जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों ने कनाडा के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि डिजिटल टैक्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के साथ लागू किया जाना चाहिए, ताकि दोहरे कराधान से बचा जा सके।

टेक इंडस्ट्री लॉबी “नेटचोइस” ने कहा,
“कनाडा का यह निर्णय सकारात्मक संकेत है। हम चाहते हैं कि टैक्स नीति वैश्विक समझौतों के अनुरूप हो, न कि राजनीतिक दबाव में बनाई जाए।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

OECD ने भी उम्मीद जताई है कि सभी देश वैश्विक डिजिटल टैक्स व्यवस्था की दिशा में मिलकर काम करेंगे। अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और भारत सहित करीब 140 देश इस दिशा में बातचीत कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कनाडा अब डिजिटल टैक्स लागू नहीं करता, तो यह अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंधों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही अनिश्चितता से जूझ रही है।

निष्कर्ष

कनाडा का अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स न लगाने का फैसला फिलहाल व्यापारिक टकराव को टालने वाला कदम माना जा रहा है। लेकिन यह मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश आपसी सहमति से कोई समाधान निकालते हैं, या यह टकराव फिर से सामने आता है। प्रधानमंत्री कार्नी की संतुलित नीति और ट्रम्प के आक्रामक रुख के बीच व्यापार नीति का भविष्य काफी कुछ आने वाले चुनावी परिणामों और वैश्विक समझौतों पर निर्भर करेगा

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Author: THE CG NEWS

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