
आज 2 जुलाई 2025 को हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीने तक यानी देवउठनी एकादशी तक शयन करते हैं। साथ ही आज से सावन माह की आध्यात्मिक शुरुआत भी मानी जाती है।
विशेष बात यह है कि इस बार देवशयनी एकादशी पर 12 वर्षों के बाद गुरु (बृहस्पति) मिथुन राशि में उदित हो रहे हैं, जिससे कुछ राशियों के लिए भाग्य के द्वार खुल सकते हैं। ये संयोग धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
देवशयनी एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यधिक महत्व है, लेकिन देवशयनी एकादशी को विशेष स्थान प्राप्त है। इसे ‘हरिशयनी’ या ‘पद्मा एकादशी’ भी कहा जाता है। इस दिन से चातुर्मास प्रारंभ होता है, यानी चार पवित्र महीनों की शुरुआत – सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक।
मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा में चले जाते हैं, और यह स्थिति चार महीनों तक बनी रहती है। इस काल में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञ आदि मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
आज से सावन का आध्यात्मिक आरंभ
हालांकि सावन माह का चंद्र पंचांग अनुसार आरंभ 22 जुलाई से होगा, लेकिन देवशयनी एकादशी से इसका आध्यात्मिक आरंभ हो जाता है। इस दिन से शिव भक्तों के लिए पूजा‑पाठ, रुद्राभिषेक, जल अर्पण, व्रत और भक्ति का विशेष काल शुरू होता है।
वाराणसी, उज्जैन, प्रयागराज, हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों पर आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में विशेष पूजा, झांकी और रुद्राभिषेक किए जा रहे हैं।
12 साल बाद मिथुन राशि में गुरु का उदय
इस वर्ष की एक अन्य महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है — गुरु (बृहस्पति) ग्रह का मिथुन राशि में उदय, जो 12 वर्षों के अंतराल पर हो रहा है। गुरु को ज्योतिष में धन, ज्ञान, विवाह और धर्म का कारक माना जाता है।
आज से गुरु के उदय होने से कई राशियों के लिए आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है। इसके साथ ही शिक्षा, करियर और संतान से जुड़े मामलों में प्रगति की अपेक्षा की जा रही है।
इन राशियों को मिलेगा लाभ
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मिथुन राशि में गुरु के उदय से 5 राशियों को विशेष लाभ मिलेगा:
1. मिथुन – जीवन में नई दिशा, विदेश यात्रा, करियर ग्रोथ
2. कुंभ – नौकरी और व्यापार में वृद्धि, भाग्य का साथ
3. कर्क – पारिवारिक जीवन में सुख, लंबित कार्य पूरे होंगे
4. धनु – शिक्षा, प्रतियोगिता और उच्च अध्ययन में सफलता
5. मीन – आर्थिक लाभ, रुकी योजनाएं शुरू होंगी
बाकी राशियों के लिए भी यह समय चिंतन, साधना और योजना के लिए अनुकूल रहेगा।
पूजा-पाठ और व्रत की विधि
देवशयनी एकादशी के दिन व्रती सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं। पीले फूल, पीले वस्त्र और तुलसी दल से पूजन कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप किया जाता है। फलाहार और एकादशी व्रत रखकर रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है।
निष्कर्ष: अध्यात्म और ग्रहों के योग का दुर्लभ संगम
2 जुलाई 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायक है। जहां एक ओर देवशयनी एकादशी से चार पवित्र माह का अध्यात्मिक आरंभ होता है, वहीं दूसरी ओर 12 वर्षों में एक बार होने वाला गुरु का मिथुन में उदय विशेष ज्योतिषीय प्रभाव लाने वाला है।
इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को व्रत, पूजा, भक्ति और सेवा के साथ आध्यात्मिक साधना आरंभ करनी चाहिए। यह समय संयम, त्याग और भक्ति से आत्मिक उन्नति का उत्तम काल माना गया है।
Author: THE CG NEWS
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