
खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मेकअप प्रोडक्ट्स अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। विश्व स्तर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पर्यावरण संगठनों की चेतावनियों को देखते हुए, कई देशों की सरकारें अब ब्यूटी और स्किन केयर उत्पादों में पारे (Mercury) के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाने की तैयारी में हैं।
भारत समेत दुनिया के कई देशों में ऐसे प्रोडक्ट्स की बिक्री पर बैन लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिनमें पारे की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई है। यह कदम न सिर्फ उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि पर्यावरण को भी इससे भारी नुकसान हो रहा है।
पारा क्यों खतरनाक है?
पारा एक भारी धातु (heavy metal) है, जो प्राकृतिक रूप से ज़मीन और पानी में पाया जाता है। हालांकि इसका सीमित मात्रा में प्रयोग कुछ विशेष उद्योगों में होता है, लेकिन जब इसे कॉस्मेटिक उत्पादों, खासकर फेस क्रीम, फाउंडेशन, स्किन व्हाइटनिंग क्रीम और आईलाइनर में मिलाया जाता है, तो यह त्वचा और शरीर दोनों के लिए बेहद खतरनाक बन जाता है।
पारा त्वचा की परतों को कमजोर करता है और धीरे-धीरे शरीर में प्रवेश करके किडनी, तंत्रिका तंत्र और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, पारा युक्त स्किन प्रोडक्ट्स के लगातार इस्तेमाल से कैंसर, त्वचा रोग, मानसिक विकार और जन्मजात दोष तक हो सकते हैं।
किन उत्पादों में पाया गया पारा?
हाल ही में अमेरिका की FDA (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और यूरोपियन यूनियन की परीक्षण एजेंसियों ने पाया कि बाजार में बिक रहे कई लोकप्रिय ब्रांड्स की स्किन क्रीम और आई मेकअप प्रोडक्ट्स में पारे की मात्रा मानक से कहीं अधिक थी।
भारत में भी आयातित उत्पादों और लोकल ब्रांड्स की जांच के बाद यह सामने आया कि कई फेयरनेस क्रीम, एंटी-एजिंग लोशन, बीबी क्रीम और लिक्विड फाउंडेशन में पारा मिला हुआ है, जिसे पैकेजिंग पर नहीं दर्शाया गया था।
सरकारें जागरूक, लेकिन कदम धीमे
भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने कॉस्मेटिक उत्पादों में पारे की मात्रा 1 ppm (parts per million) से अधिक नहीं रखने का निर्देश दिया है। परंतु बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे ऐसे प्रोडक्ट्स में यह सीमा पार हो रही है। सरकार अब मिनामाटा कन्वेंशन के तहत कॉस्मेटिक उत्पादों में पारे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।
इस संदर्भ में उपभोक्ता मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय मिलकर एक रूपरेखा बना रहे हैं, जिसमें पारे युक्त मेकअप प्रोडक्ट्स के उत्पादन, बिक्री और विज्ञापन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़
लाइफस्टाइल एक्सपर्ट और स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. नेहा वर्मा बताती हैं, “अक्सर लोग बाजार में ब्रांड के नाम या त्वचा को गोरा करने के दावों पर भरोसा करके कोई भी क्रीम खरीद लेते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि इसके पीछे कौन-से रसायन छिपे हैं। पारा धीरे-धीरे शरीर को बीमार बना देता है और इसका प्रभाव वर्षों बाद सामने आता है।”
एक शोध के अनुसार, शहरी महिलाओं में स्किन एलर्जी और हार्मोनल असंतुलन के मामलों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण लंबे समय तक इन प्रोडक्ट्स का उपयोग है।
उपभोक्ता क्या करें?
उपभोक्ताओं को सजग रहना होगा। कोई भी स्किन केयर या मेकअप उत्पाद खरीदने से पहले उसकी सामग्री (ingredients) को ध्यान से पढ़ें। Hydrargyrum, Mercurous chloride, Calomel या Mercuric iodide जैसे शब्दों से संकेत मिलता है कि उत्पाद में पारा हो सकता है।
इसके अलावा प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उत्पादों का प्रयोग करना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन फिर भी हर ब्रांड को आंख मूंदकर भरोसा न करें।
निष्कर्ष: सुंदरता की कीमत सेहत नहीं होनी चाहिए
मेकअप और सुंदरता की चाह हर किसी को होती है, लेकिन यह चाह तब खतरनाक बन जाती है जब हम अनजाने में ज़हर को अपनी त्वचा पर लगाते हैं।
सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है कि वह पारे जैसे खतरनाक रसायनों पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में बढ़ रही है। साथ ही उपभोक्ताओं को भी जागरूक होना पड़ेगा, क्योंकि सिर्फ सरकारी नियम नहीं, समझदारी भरा चुनाव ही हमें और हमारी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रख सकता है।
Author: THE CG NEWS
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