कैमरे पर ‘फुलेरा’ की चमक, ज़मीन पर महोड़िया की बदहाली: पंचायत की शूटिंग लोकेशन से हकीकत की रिपोर्ट

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अमेजन प्राइम की मशहूर वेब सीरीज ‘पंचायत’ ने देशभर के दर्शकों का दिल जीता है। गाँव की राजनीति, मासूमियत और सादगी को दिखाने वाली इस सीरीज की शूटिंग उत्तर प्रदेश के किसी गांव में नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के एक छोटे से गाँव महोड़िया (Mahodiya) में हुई है।

इस गांव को ‘फुलेरा’ के नाम से पहचान तो मिली, लेकिन आज जब कैमरे की रोशनी बंद हो चुकी है, तो महोड़िया की जमीनी सच्चाई बिल्कुल अलग है — कीचड़, टूटी सड़कें, गंदगी और उपेक्षा।

रील की फुलेरा और रियल की महोड़िया

‘पंचायत’ वेब सीरीज में दिखाया गया “फुलेरा” गांव पूरी तरह काल्पनिक है, लेकिन इसकी शूटिंग असल में महोड़िया गांव में हुई है। पंचायत भवन, सच‍िव जी का कमरा, प्रधानी का घर, चाय की दुकान, मंदिर — सब असली लोकेशन्स पर शूट हुए हैं।

इस सीरीज की सफलता के बाद महोड़िया देशभर में प्रसिद्ध हो गया। यूट्यूब व्लॉगर्स, पत्रकार और फोटोग्राफर्स यहाँ पहुंचने लगे, लेकिन इस प्रसिद्धि के बावजूद गांव की हालत नहीं बदली।

हाल ही में वायरल हुआ कीचड़ से भरा वीडियो

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें पंचायत भवन और उसके चारों ओर का इलाका कीचड़ से भरा हुआ नजर आ रहा है। बारिश के बाद पूरे गांव की सड़कें जलमग्न हो चुकी थीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह हर साल की कहानी है — बारिश आती है और गाँव गंदगी में डूब जाता है।

एक ग्रामीण राजेश पटेल कहते हैं, “जब शूटिंग होती है तब गाँव चमकाया जाता है, लेकिन जैसे ही टीम जाती है, वही कीचड़, वही समस्या।”

कोई विकास नहीं, सिर्फ़ नाम का फुलेरा

वेब सीरीज की सफलता के बाद लोगों को उम्मीद थी कि महोड़िया को एक मॉडल गांव बनाया जाएगा — बेहतर सड़कें, साफ-सफाई, पर्यटन जैसी सुविधाएं। लेकिन आज तक कोई सरकारी योजना या बजट यहां लागू नहीं हुआ। पंचायत भवन वही जर्जर स्थिति में है, और गांव के बच्चे अब भी कीचड़ में चलकर स्कूल जाते हैं।

गांव के बुजुर्ग रामलाल यादव कहते हैं, “हम टीवी पर जब अपना गांव देखते हैं तो गर्व होता है, लेकिन फिर बाहर निकलते ही हालत देखकर शर्म भी आती है।”

पर्यटन बढ़ा, पर गांव को कुछ नहीं मिला

शूटिंग के बाद से यहां आने वालों की संख्या बढ़ी है। कई लोग फोटो लेने आते हैं, वीडियो बनाते हैं, लेकिन इससे गांववालों को कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं हुआ। ना रोज़गार, ना कोई टूरिस्ट गाइड सिस्टम, ना कोई स्थानीय बिज़नेस खड़ा हो पाया।

कब और कैसे हुई थी शूटिंग?

‘पंचायत’ का पहला सीज़न 2019 में महोड़िया में शूट हुआ था। अमेजन प्राइम की टीम ने गांव को किराए पर लेकर पंचायत भवन और आसपास के इलाकों को सजाया। पंचायत भवन को ₹500 प्रतिदिन किराए पर लिया गया।

क्रू में करीब 150 लोग शामिल थे और उन्होंने करीब 3 महीनों तक गांव में रहकर शूटिंग की।

अब सवाल यह है — क्या सिर्फ़ लोकप्रियता काफी है?

‘पंचायत’ ने गांवों की सच्चाई को दिखाने का सफल प्रयास किया, लेकिन यह विडंबना है कि उसी सच्चाई का प्रतीक बना महोड़िया आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।

सरकारें, प्रशासन और पंचायत विभाग इस मौके को एक उदाहरण बना सकते थे — लेकिन फुलेरा नाम से शो चला, और महोड़िया अपने हाल पर छोड़ दिया गया।

निष्कर्ष

महोड़िया गांव, जो आज ‘फुलेरा’ के नाम से पहचाना जाता है, पर्दे पर जितना चमकदार दिखता है, असलियत में उतना ही उपेक्षित है। कीचड़ में डूबे पंचायत भवन और टूटी सड़कों के बीच रहने वाले लोग आज भी उसी विकास की बाट जोह रहे हैं, जिसकी एक झलक उन्होंने शूटिंग के वक्त देखी थी।

अब जरूरत है कि सरकार, पंचायत विभाग और स्थानीय प्रशासन इस प्रसिद्धि को एक विकास के अवसर में बदले — वरना महोड़िया, ‘फुलेरा’ बनकर सिर्फ़ एक रील याद रह जाएगा, हकीकत नहीं।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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