
वैश्विक आतंकी वित्तपोषण निगरानी संस्था FATF ने अपनी ताजा रिपोर्ट “Comprehensive Update on Terrorist Financing Risks” में भारत स्थित दो प्रमुख आतंकी घटनाओं—पुलवामा और गोरखनाथ—को उदाहरण के तौर पर उद्धृत करते हुए रैखिक वित्तीय विधियों के बजाय आधुनिक डिजिटल साधनों के आतंकवादी प्रयोग पर कड़ी चेतावनी जारी की है ।
पुलवामा हमला: “अल्यूमिनियम पाउडर अमेज़ॉन से खरीदा गया”
2019 में 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले को एक आत्मघाती हमले में निशाना बनाया गया था, जिसमें 40 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। FATF की नवीनतम रिपोर्ट में उल्लेख है कि IED (Improvised Explosive Device) के निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाला अल्यूमिनियम पाउडर—जो विस्फोटक शक्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण था—को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म EPOM Amazon से ऑनलाइन खरीदा गया था ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी अल्प मूल्य की रसायन सामग्री खरीदकर उसे IED में परिवर्तित कर सकते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके इन सामग्रियों की आपूर्ति और वित्तीय गति के साधनों का उपयोग कर पता नहीं चलता। यह बताता है कि सरल दिखने वाले डिजिटल लेन‑देन और पारदर्शी इंटरफ़ेस भी आतंकवाद के लिए अशुभ माध्यम बन सकते हैं।
गोरखनाथ मंदिर हमला: PayPal के माध्यम से $7,700 भेजे गए
दूसरी घटना अप्रैल 2022 की है, जब उत्तर प्रदेश के गोरखनाथ मंदिर परिसर में एक आतंकवादी ने सिक्के से सुरक्षा कर्मियों पर हमला करने का प्रयास किया। FATF रिपोर्ट अनुसार, आरोपी की PayPal खाते के माध्यम से विदेशी खातों को ₹6.69 लाख (≈ $7,685) का भुगतान किया गया था । आरोपी ने अपनी बैंक खाते से VPN सेवा प्रदाता को भुगतान भी किया—जिससे पता नहीं चलता था कि यह लेन-देन कहाँ से हो रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 44 ट्रांज़ैक्शन, जिनकी रकम ₹6.69 लाख तक पहुंच गई, PayPal से अंतरराष्ट्रीय भेजे गए। इसे “terror financing” के रूप में चिन्हित किया गया और PayPal द्वारा खाता निलंबित किया गया । रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आरोपी ने ₹10,323 (≈ $188) की राशि किसी विदेशी स्रोत से प्राप्त की थी ।
डिजिटल माध्यम आतंकवाद के लिए खतरा – FATF की चेतावनी
FATF ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि तकनीकी रूप से आधुनिक आतंकवादी अब ई-कॉमर्स, ऑनलाइन भुगतान और VPN जैसी डिजिटल दोहराहट को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं । इन साधनों से न केवल वित्तीय लेन-देन छिपे रहते हैं, बल्कि सामग्री की खरीद और लेन-देन की श्रृंखला बीच में छुपी रहती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 69% देशों में आतंकी वित्तपोषण की जाँच और उस पर कानूनी कार्रवाई में “महत्वपूर्ण या संरचनात्मक कमियाँ” पाई गई हैं। इससे पता चलता है आज के समय में आतंकवाद एक ‘डिजिटल रूप’ ले रहा है, जहां तकनीक की मदद से व्यवस्था को चकमा दिया जा रहा है।
जरूरत: मजबूत निगरानी, नियमन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग
FATF ने इस रिपोर्ट में सभी देशों से आग्रह किया है कि वे:
तकनीकी अनुपालन को सुदृढ़ करें,
क्रॉस‑बॉर्डर इंटेलिजेंस साझेदारी बढ़ाएं,
जोखिम‑आधारित नियामक फ्रेमवर्क अपनाएँ,
और हिट टिकटिंग संकेत (red flags) जैसे असामान्य भुगतान, यात्रा या संदेहशील डिजिटल व्यवहार पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट ने चेताया है कि मानवतावादी सहायता पर भी खतरा है, क्योंकि कई बार इन माध्यमों से जमा की गई राशि संघर्षविराम में फंसे लोगों तक पहुँचित की जाती है, जो गलत हाथों में जा सकती है।
Author: THE CG NEWS
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