
नया अध्ययन: अमेरिकी व्यापार सलाहकार Arihant Capital की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका संभवतः अन्य एशिया–प्रशांत देशों की तुलना में भारत पर कम टैरिफ लगाएगा, जिससे भारत को वैश्विक निवेश आकर्षित करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने का अद्वितीय अवसर मिलेगा ()।
टैरिफ रणनीति में अंतर
ट्रम्प प्रशासन ने हाल ही में अन्य एशिया–प्रशांत देशों जैसे कंबोडिया, वियतनाम, बांग्लादेश आदि पर उच्च टैरिफ लगाए हैं—कभी 35-50% तक ()। वहीं, भारत, जो अभी तक इस लिस्ट से बाहर रखा गया है और जिस पर औपचारिक टैरिफ नोटिस भी भेजा गया नहीं है, तुलनात्मक रूप से कम टैरिफ जोखिम में है।
निवेश हब बनने का सपना
रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह स्थिति वैश्विक पूंजी को भारत की ओर आकर्षित कर सकती है। आगामी मुक्त व्यापार समझौते — जैसे UK–India FTA और EU–India समझौता — और भारत की घरेलू PLI (Production Linked Incentives) योजनाएँ, इसे और मजबूत कर रही हैं ।
Moody’s Ratings ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए बताया कि भारत, अधिक विविधित निर्यात आधार और बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था की वजह से तनावपूर्ण वैश्विक व्यापार माहौल में भी टिके रहने का सामर्थ्य रखता है ।
अमेरिका वापस ला रहा मैन्युफैक्चरिंग?
प्रभुत्व बनाए रखने हेतु अमेरिका ‘reshoring’ यानी घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। इस रणनीति से भारत को फायदा तो होगा, लेकिन लाभ उन उद्योगों तक सीमित रह जाएगा जिन्हें अमेरिका देशभ्यंतरी आपूर्ति शृंखला के हिस्से के रूप में मान्यता देगा ()।
टेक्सटाइल्स और विनिर्माण को प्रोत्साहन
डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बांग्लादेश पर 35% टैरिफ की घोषणा ने भारतीय टैक्सटाइल कंपनियों जैसे Gokaldas Exports और Vardhman के शेयरों को 8% तक की छलांग दिलाई ।
मु Moody’s और अन्य संस्थानों का मानना है कि भारत Vietnaam व Cambodia जैसे देश की जगह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थान बना सकता है—खासतौर पर टेक्सटाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ऑटो कम्पोनेंट्स में ।
दवा और फार्मा क्षेत्र
Reuters की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने भारत पर 26% टैरिफ लगाया, जो कि चीन (54%) व वियतनाम (46%) की तुलना में बहुत अधिक नहीं है। साथ ही, फार्मा क्षेत्र को इस नीति से थोड़ी राहत मिल सकती है क्योंकि भारतीय औषधियों पर यह प्रतिबंध थोड़ी देर से लागू हुआ।
दोतरफा व्यापार बातचीत में गति
भारत–अमेरिका दोनों के बीच व्यापार समझौतों की चर्चा तेज हो गई है।
•USD Vance (US उपराष्ट्रपति) हाल ही में भारत दौरे पर रहे और उन्होंने व्यापार और निवेश संबंधों को सुदृढ़ करने पर बल दिया ।
•व्यापार लक्ष्य: 2030 तक $500 बिलियन द्विपक्षीय व्यापार
•अमेरिका ने बड़े तकनीकी क्षेत्र जैसे डिफेंस, ऊर्जा, स्वास्थ्य में भी सौदे करने का संकेत दिया है ।
FT की रिपोर्ट ने कहा है कि ट्रम्प की नीति ने भारत में 1991 जैसे आर्थिक सुधारों का मनोबल जगा दिया है। लेकिन साथ ही आगाह किया है कि भारत की सुरक्षात्मक व्यापार नीति, घरेलू बाधाएँ और राजनीतिक संवेदनशीलता लागत और गति तय करेंगी।
जोखिम और सीमाएँ
•reshoring स्ट्रेटेजी की सीमा: अमेरिका सिर्फ कुछ विशिष्ट क्षेत्रों का उत्पादन ही वापस लाना चाहेगा, जो भारत के लिए व्यापक अवसर नहीं बना सकता ।
•भारतीय नीतिगत चुनौतियाँ: उच्च टैरिफ, श्रम व भूमि सुधार तथा लॉजिस्टिक बाधाएँ आगे निवेश को प्रभावित कर सकती हैं।
निष्कर्ष
अमेरिका की नए टैरिफ नीति ने भारत को दुनियाभर में निवेश केंद्र बनने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है। हालांकि वास्तविक लाभ पकड़ने के लिए नीतिगत सुधार, गुणवत्ता नियंत्रण, वैश्विक व्यापार समझौतों और स्थिर राजनीतिक माहौल की आवश्यकता होगी। 2030 तक के $500 बिलियन व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में यह समय भारत के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।