
कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत को सराहना मिली
भारत और चीन के बीच रिश्तों में लंबे समय बाद एक सकारात्मक संकेत दिखा है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बीजिंग यात्रा के दौरान रविवार को चीन के उपराष्ट्रपति हन जेंग से मुलाकात की। इस अहम कूटनीतिक बैठक में दोनों नेताओं ने भारत‑चीन संबंधों में हो रहे सुधार, सीमा विवाद पर जारी संवाद, सांस्कृतिक जुड़ाव और द्विपक्षीय सहयोग को लेकर बातचीत की।
इस मुलाकात को गलवान झड़प (2020) के बाद दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क माना जा रहा है।
सीमा पर तनाव कम होने के संकेत
विदेश मंत्री जयशंकर ने चीनी नेतृत्व को बताया कि पिछले नौ महीनों में दोनों देशों के बीच सीमा तनाव में काफी कमी आई है और अब हालात पहले की तुलना में स्थिर हैं। जयशंकर ने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि भारत‑चीन संबंध आपसी सम्मान, पारस्परिक हितों और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित हों।”
चीनी उपराष्ट्रपति हन जेंग ने भी भारत के साथ “व्यावहारिक सहयोग” बढ़ाने की इच्छा जताई और कहा कि दोनों देश एशिया की दो बड़ी शक्तियां हैं, जिन्हें एक-दूसरे के हितों का सम्मान करना चाहिए।
कैलाश मानसरोवर यात्रा की फिर से शुरुआत पर सहमति
इस बैठक में एक और बड़ा सकारात्मक संकेत मिला, जब विदेश मंत्री जयशंकर ने कैलाश मानसरोवर यात्रा की भारत में हो रही सराहना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में तीर्थयात्रियों के लिए इस यात्रा की पुनः शुरुआत सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद अहम है।
चीनी पक्ष ने भी इस यात्रा के शांतिपूर्ण और संगठित संचालन में भारत के सहयोग को सराहा और भविष्य में इससे जुड़ी सुविधाओं को और बेहतर बनाने का भरोसा दिया।
द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम
जयशंकर और हन जेंग के बीच बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि सीमा प्रबंधन से परे दोनों देश अब व्यापार, तकनीक, पर्यटन और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बैठक आने वाली SCO (शंघाई सहयोग संगठन) की उच्चस्तरीय बैठकों के लिए भी रास्ता साफ कर रही है।
जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि भारत की मंशा टकराव नहीं, संवाद और समन्वय की है, और यदि चीन भी इसी दिशा में चलता है, तो एशिया में स्थिरता की नई मिसाल कायम की जा सकती है।
गलवान के बाद पहला बड़ा राजनयिक संदेश
गौरतलब है कि जून 2020 में लद्दाख के गलवान क्षेत्र में हुए हिंसक टकराव के बाद से भारत और चीन के बीच रिश्ते ठंडे पड़े थे। हालांकि पिछले एक साल में सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन जयशंकर की यह यात्रा पहली स्पष्ट राजनीतिक पहल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के लिए ‘रिस्टार्ट बटन’ साबित हो सकती है। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत और चीन अब अपने रिश्तों को संवाद के रास्ते सुधारना चाहते हैं, न कि संघर्ष के।
निष्कर्ष: नई शुरुआत की उम्मीद
भारत‑चीन रिश्तों में लंबे समय बाद एक सकारात्मक हवा चली है। जहां एक ओर सीमा पर तनाव में कमी आ रही है, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव भी पुनः स्थापित हो रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, व्यावसायिक सहयोग और कूटनीतिक संवाद जैसे पहलुओं से लगता है कि दोनों देशों ने एक बार फिर से ‘संबंध सुधारने’ की राह पकड़ ली है।
अब निगाहें SCO बैठक और आगे की द्विपक्षीय वार्ताओं पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि यह नरमी कितनी स्थायी साबित होती है।
Author: THE CG NEWS
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