
रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने एक अहम फैसला लेते हुए अब परीक्षार्थियों को पगड़ी, बिंदी, कलावा, हिजाब, क्रॉस लॉकेट, जनेऊ और मंगलसूत्र जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को पहनकर परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है। यह बदलाव हाल ही में सामने आए विवादों के बाद लिया गया है, जिसमें रेलवे की परीक्षा गाइडलाइन में इन प्रतीकों को हटाने की शर्त ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था। अब रेलवे ने उम्मीदवारों की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी धार्मिक चिह्न को हटाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
✦ विवाद की शुरुआत
इस पूरे मुद्दे की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई थी, जब नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट की भर्ती परीक्षा के लिए जारी एक एडमिट कार्ड में परीक्षार्थियों को बिंदी, मंगलसूत्र, चूड़ियां, जनेऊ, कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक न पहनने की हिदायत दी गई थी। यह निर्देश परीक्षा में पारदर्शिता और अनुचित साधनों की रोकथाम के उद्देश्य से दिया गया था, लेकिन इसका स्वरूप धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला माना गया।
देश के विभिन्न हिस्सों से आई प्रतिक्रिया में कहा गया कि धार्मिक प्रतीकों को पहनना आस्था का विषय है और इसे जबरन हटवाना संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। यह मुद्दा कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक पहुंच गया।
✦ राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
रेलवे बोर्ड के इस निर्णय की तीव्र आलोचना हुई। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी. के. शिवकुमार और भाजपा सांसद ब्रिजेश चौटा ने रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनके अलावा कई संगठनों और धार्मिक नेताओं ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया। सोशल मीडिया पर #MyFaithMyRight ट्रेंड करने लगा और सरकार पर दबाव बढ़ा।
विवाद के बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे ने बयान जारी कर कहा कि उसका मकसद किसी की धार्मिक भावना को आहत करना नहीं है और वह परीक्षा की निष्पक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता, दोनों का संतुलन बनाए रखना चाहता है।
✦ नया फैसला: धार्मिक प्रतीकों की अनुमति
14 जुलाई 2025 को रेलवे भर्ती बोर्ड ने नया सर्कुलर जारी किया, जिसमें साफ-साफ कहा गया कि अब उम्मीदवार पगड़ी, बिंदी, हिजाब, क्रॉस लॉकेट, मंगलसूत्र, कलावा, जनेऊ आदि धार्मिक प्रतीकों के साथ परीक्षा दे सकते हैं।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर:
•100% CCTV निगरानी
•बॉयोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन
•मेटल डिटेक्टर
•फ्रिस्किंग (शारीरिक जांच) जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं अनिवार्य रहेंगी।
इन उपायों से परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, जबकि उम्मीदवारों की धार्मिक आस्था का सम्मान भी बरकरार रहेगा।
✦ स्वागत और असर
इस फैसले का व्यापक स्तर पर स्वागत हुआ है। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक नेताओं ने इसे भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप बताया है। परीक्षा में भाग लेने जा रहे अभ्यर्थियों ने भी राहत की सांस ली है। खासकर वे अभ्यर्थी जिनके लिए पगड़ी, जनेऊ या हिजाब पहनना धार्मिक अनिवार्यता है, अब उन्हें असमंजस में नहीं रहना पड़ेगा।
✦ निष्कर्ष
रेलवे बोर्ड का यह निर्णय न केवल एक प्रशासनिक सुधार है, बल्कि यह भारत के विविधता में एकता और धार्मिक स्वतंत्रता की भावना को सशक्त करता है। सरकार और प्रशासन का यह कदम दिखाता है कि विकास और सुरक्षा के साथ-साथ नागरिकों की आस्था और परंपरा को भी समान महत्व देना ज़रूरी है।
अब रेलवे परीक्षा देने वाले लाखों उम्मीदवार निश्चिंत होकर अपनी आस्था के अनुरूप प्रतीकों को धारण करते हुए परीक्षा में भाग ले सकेंगे। यह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है।
Author: THE CG NEWS
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