
भोपाल जिला प्रशासन ने सोमवार, 21 जुलाई 2025 से ई‑रिक्शा द्वारा स्कूल जाने वाले बच्चों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इसे भारी सुरक्षा खतरे का कारण बताते हुए सभी सरकारी और निजी स्कूलों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश दिए गए हैं कि इस आदेश का फौरन पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा स्कूलों और चालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी ।
प्रतिबंध की पृष्ठभूमि और प्रशासन की चिंताएँ
18 जुलाई को आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में भोपाल सांसद आलोक शर्मा, नगर निगम, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर ई‑रिक्शा के उपयोग से जुड़े जो प्रमुख रहस्योद्घाटन किए, वे निम्नलिखित हैं:
1.गैत्य विश्लेषण एवं निरीक्षण में सामने आया कि ई‑रिक्शा बेहद हल्के होते हैं और तेज गति पर या गीली सड़कों, गड्ढों में पलटने का जोखिम अधिक होता है  ।
2. बीते वर्षों के हादसों में, स्कूल जाते समय ई‑रिक्शा पलटने की घटनाएँ सामने आई हैं, जिनमें चोटिल विद्यार्थी भी रहे।
3. बारिश के मौसम में जलभराव और कीचड़ की वजह से ई‑रिक्शा का संतुलन बिगड़ना आम हो गया था  ।
4. कई जगह पर अपरिपक्व या किशोर चालक इन्हें चला रहे थे, जो संवेदनशील बच्चों की सड़क सुरक्षा के लिए उपयुक्त नहीं  ।
इन कारणों के चलते प्रशासन ने इसे तत्काल आवश्यक और अपरिहार्य समझते हुए यह निर्णय लिया।
प्रतिबंध का असर और स्कूलों की तैयारी
बड़ी संख्या में निजी और सरकारी विद्यालय जो पहले ई‑रिक्शा पर निर्भर थे, अब कम‑से‑कम अगले कुछ सप्ताह तक वैकल्पिक व्यवस्था जैसे स्कूल बस, वैन या वाहन सेवा पर योजना बना रहे हैं  । कई स्कूलों ने पहले ही अभिभावकों से संपर्क किया और नए परिवहन विकल्पों की व्यवस्था शुरू कर दी।
अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि ई‑रिक्शा चलाने वाले चालकों को भी सावधानीपूर्वक समझाया जाएगा कि बच्चों को ई‑रिक्शा में ले जाना अब उनकी ई‑रिक्शा लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन होगा, अन्यथा उन्हें सजा भी झेलनी पड़ेगी  ।
ई‑रिक्शा से बच्चों के लिए जोखिम
ई‑रिक्शा से स्कूल आने‑जाने में कई गंभीर जोखिम हैं:
•छोटे वाहन होने के कारण बच्चों को पर्याप्त सीट बेल्ट या सुरक्षा उपाय नहीं मिलते।
•बारिश और चिपचिपी सड़कों पर ई‑रिक्शा पलट सकते हैं, और हल्के वाहन होने के कारण उनमें स्थिरता कम होती है  ।
•बिना मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण ड्राइविंग करने वाले युवा चालक इन्हें तेज और जोखिम‑भरा चला रहे थे  ।
•भोपाल में 12,500 से अधिक ई‑रिक्शा पंजीकृत हैं, और इनमें से लगभग आधे स्कूल और घर के बीच ट्रिप्स करते थे – इस संख्या ने जोखिम की गंभीरता को और बढ़ाया  ।
ये सभी बिंदु स्पष्ट संकेत देते हैं कि ई‑रिक्शा पर बच्चों को भेजना अस्पताल और गंभीर चोटों की संभावनाओं को जन्म देता था।
भविष्य की रणनीति और निगरानी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अल्पकालिक निर्णय नहीं, बल्कि तत्काल प्रभाव से शुरू की गई रक्षा रणनीति का हिस्सा है। आने वाले सप्ताहों में:
•स्कूलों, पुलिस और जिला प्रशासन के बीच निगरानी टीम गठित की जाएगी।
•ई‑रिक्शा चालकों और अभिभावकों को सतर्कता शिविरों और काउंसलिंग के माध्यम से जागरूक किया जाएगा  ।
•ट्रैफिक पुलिस सड़कों का राउंड लगाएगी, विशेषकर स्कूलों के आसपास, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करेगी।
समापन
भोपाल प्रशासन द्वारा ई‑रिक्शा परिवहन पर यह प्रतिबंध स्पष्ट रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। हल्के वाहन, अकुशल ड्राइवरों की उपस्थिति, और मानसून आधारित सड़क जोखिमों को देखते हुए, यह कदम उचित और समयोचित प्रतीत होता है। हालांकि इससे पहले e-रिक्शा ऑपरेटरों और अभिभावकों को वैकल्पिक व्यवस्था ढूँढने की सलाह दी गई थी, लेकिन अब सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय अपरिहार्य हो गया है।
Author: THE CG NEWS
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