IND vs ENG चौथा टेस्ट आज से: ओल्ड ट्रैफर्ड की मनहूस पिच और बारिश की चुनौती, क्या टूटेगा भारत का 89 साल पुराना सूखा

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मैनचेस्टर। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का चौथा मुकाबला आज से ओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर में शुरू हो रहा है। यह मैच भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि ओल्ड ट्रैफर्ड पर भारत आज तक एक भी टेस्ट मैच नहीं जीत पाया है। इंग्लैंड के खिलाफ इस ऐतिहासिक मैदान पर भारत ने पिछले 89 वर्षों में नौ टेस्ट खेले हैं—जिनमें चार में हार मिली और पांच ड्रॉ रहे हैं। अब टीम इंडिया के पास इतिहास बदलने का मौका है, लेकिन मौसम और पिच की स्थितियां इस राह को और कठिन बना सकती हैं।

ओल्ड ट्रैफर्ड का इतिहास और भारत की असफलता

ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच भारत के लिए कभी भी शुभ नहीं रही। 1936 में पहली बार भारत ने यहां मैच खेला और तब से लेकर आज तक कोई जीत नहीं मिली। 1952 में टीम इंडिया 58 और 82 रन पर ढेर हो गई थी, वहीं 2014 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत को एक पारी और 54 रनों से करारी हार झेलनी पड़ी थी। हालांकि, 1990 में सचिन तेंदुलकर ने इसी मैदान पर अपना पहला टेस्ट शतक लगाया था और मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने 179 रनों की पारी खेली थी। लेकिन ये व्यक्तिगत चमक भी टीम की हार की कहानी को नहीं बदल सकी।

मौसम का खेल बिगाड़ने का डर

मैनचेस्टर में बारिश का खतरा लगातार बना हुआ है। पहले दिन दोपहर बाद बारिश की 65% से अधिक संभावना जताई गई है, वहीं दूसरे दिन भी बादलों और रुक-रुक कर बारिश की भविष्यवाणी की गई है। ऐसे में मैच का पूरा परिणाम बारिश पर भी निर्भर करता है। यदि बारिश लगातार खेल में खलल डालती रही, तो मुकाबला ड्रॉ की ओर भी जा सकता है, जिससे इंग्लैंड को सीरीज में बढ़त बनाए रखने का फायदा मिलेगा।

गेंदबाजों की परीक्षा और टीम संयोजन

ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच पर पारंपरिक रूप से तेज गेंदबाजों को मदद मिलती है, खासकर जब मौसम नम और बादल भरे हों। भारत की ओर से जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज पर जिम्मेदारी रहेगी कि वे शुरुआती विकेट लेकर इंग्लैंड पर दबाव बनाएं। वहीं इंग्लैंड की टीम भी लियम डॉसन जैसे अनुभवी स्पिनर के साथ उतर सकती है, जो इस पिच पर लंबी गेंदबाज़ी करके रन गति को रोकने की रणनीति पर काम करेंगे।

भारतीय टीम में चोटों ने परेशानी बढ़ाई है। नितीश कुमार रेड्डी और आकाश दीप चोटिल होकर बाहर हो चुके हैं। उनकी जगह अंशुल कम्बोज को डेब्यू का मौका मिल सकता है। कप्तान शुबमन गिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे सही संयोजन और मानसिकता के साथ टीम को मैदान में उतारें।

टॉस और रणनीति की अहम भूमिका

ओल्ड ट्रैफर्ड पर जो टीम पहले गेंदबाजी करती है, उसे अब तक जीत नहीं मिली है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम के लिए बल्लेबाजी पहले चुनना फायदेमंद हो सकता है। इंग्लैंड की कप्तानी कर रहे बेन स्टोक्स और कोच ब्रेंडन मैकुलम की बाजबॉल रणनीति ने अब तक टीम को आक्रामक और तेज क्रिकेट खेलने में मदद की है। दूसरी ओर, भारत इस आक्रामकता के जवाब में अनुशासित गेंदबाजी और सतर्क बल्लेबाजी से मुकाबला करना चाहेगा।

भारत के लिए जीत का एकमात्र मौका

भारत यदि इस मैच में हारता है, तो इंग्लैंड सीरीज 3-1 से जीत जाएगा और भारत की टेस्ट रैंकिंग पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ सीरीज बराबरी का नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और मानसिक बढ़त के लिए भी निर्णायक होगा। बल्लेबाजी में गिल, रहाणे और जाधव जैसे खिलाड़ियों पर बड़ा दारोमदार होगा, वहीं गेंदबाजी में बुमराह और सिराज की धार सबसे महत्वपूर्ण होगी।

निष्कर्ष

चौथा टेस्ट सिर्फ एक और मुकाबला नहीं है—यह भारत के लिए इतिहास को बदलने का सबसे बड़ा मौका है। ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच, मौसम की अनिश्चितता, इंग्लैंड की आक्रामक रणनीति और भारत की युवा नेतृत्व वाली टीम, इन सबकी टक्कर से यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। अब देखना यह है कि क्या भारत इस बार 89 साल की हार के सिलसिले को तोड़ पाएगा या फिर मैनचेस्टर का मैदान एक बार फिर निराशा का गवाह बनेगा।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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