दीपिंदर गोयल की प्रेरणादायक सोच: अपने दिमाग को भूलना सिखाते रहना भी ज़रूरी है, इससे विचारों में ताजगी बनी रहती है

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भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में आज जिन गिने-चुने नामों को आदर्श के रूप में देखा जाता है, उनमें जोमैटो (Zomato) के फाउंडर दीपिंदर गोयल का नाम सबसे ऊपर आता है। हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने अपने विचार साझा किए और बताया कि सफलता पाने के बाद भी वह क्यों अपने दिमाग को ‘भूलते’ रहना चाहते हैं। उनके अनुसार, यही वह तरीका है जिससे इंसान विचारों में नयापन बनाए रख सकता है और आगे बढ़ सकता है।

मैं सिर्फ सर्वाइव करने की कोशिश करता हूं

दीपिंदर कहते हैं, “मैं केवल सर्वाइव करने की कोशिश करता हूं। यही एक चीज़ है जिसके लिए मैं लड़ता हूं।” वे बताते हैं कि उन्हें अपने काम में मज़ा तब आता है जब वे कुछ ऐसा कर पाएं जो पहले नहीं किया गया हो। उन्होंने जोमैटो के नोटिफिकेशन सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि वे खुद भी इसका उपयोग करते हैं और इसे खुद के लिए चुनौती मानते हैं।

दीपिंदर के मुताबिक, जब लोग उनसे मिलते हैं और पूछते हैं कि वे कैसे नई चीजें सोचते हैं, तो उनका जवाब सीधा होता है — खुद को दोहराना बंद करो और खुद को नए तरीके से देखने की आदत डालो। वे मानते हैं कि काम के दौरान अपने ही पुराने विचारों और काम करने के तरीकों को भूलते रहना जरूरी है ताकि विचारों में ताजगी बनी रहे।

मुझे कभी अपने सफल होने की उम्मीद नहीं थी

दीपिंदर ने कहा कि उन्होंने कभी अपने सफल होने की उम्मीद नहीं की थी। वे सफर को महत्वपूर्ण मानते हैं, न कि मंज़िल को। उनके अनुसार, सफलता सिर्फ एक परिणाम है, लेकिन जो ज़रूरी है वह है सफर का अनुभव और उसमें की गई मेहनत।

उन्होंने बताया कि जोमैटो की शुरुआत एक समस्या के समाधान के रूप में हुई थी, न कि किसी बड़े लक्ष्य को पाने के इरादे से। एक आम उपयोगकर्ता की तरह जब उन्होंने देखा कि उन्हें खुद बाहर खाना ऑर्डर करते समय समस्या हो रही है, तो उन्होंने तय किया कि वो इस दिशा में कुछ करेंगे। उनका मानना है कि किसी भी स्टार्टअप की शुरुआत समस्या को हल करने के इरादे से ही होनी चाहिए।

टीम से सीखने की कला ही है असली नेतृत्व

दीपिंदर बताते हैं कि किसी भी कंपनी को लीड करने वाला व्यक्ति तब तक सही नेता नहीं हो सकता जब तक वह अपनी टीम से सीखने का गुण नहीं रखता। उनके अनुसार, जब टीम के सदस्य मिलकर किसी समस्या का समाधान खोजते हैं, तो वह प्रक्रिया खुद में एक बड़ा सबक होती है।

उनका कहना है कि वे अपनी कंपनी में एक समानान्तर टीम कल्चर बनाना चाहते हैं, जहां सबको बात रखने का मौका मिले। वे मानते हैं कि सही विचार किसी भी पद या अनुभव से नहीं आता, वह किसी के भी दिमाग से निकल सकता है।

विचारों को नया बनाए रखना जरूरी

दीपिंदर ने इस बातचीत में जो सबसे अहम बात कही, वह यह थी कि खुद के दिमाग को भूलते रहना चाहिए। उनके अनुसार, जब इंसान अपने पुराने विचारों और आदतों को भूलता है, तभी वह नई चीज़ों के लिए जगह बना पाता है। यही कारण है कि वे खुद को कभी ‘मास्टर’ या ‘एक्सपर्ट’ नहीं मानते।

वे मानते हैं कि यह प्रक्रिया हर दिन खुद को रीसेट करने जैसी है। जब आप पुराने अनुभवों और सफलता को भूलकर नए सिरे से सोचते हैं, तो वही असली प्रगति होती है।

निष्कर्ष: एक लीडर जो हमेशा सीखता रहता है

दीपिंदर गोयल सिर्फ एक सफल उद्यमी नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसे नेतृत्वकर्ता हैं जो लगातार खुद को चुनौती देते हैं। वे मानते हैं कि सफलता की कोई स्थायी परिभाषा नहीं है। अगर इंसान खुद को दोहराने लगे तो वह रुक जाता है। इसीलिए उनके लिए सबसे ज़रूरी है लगातार प्रयोग करना, टीम से सीखना और अपने दिमाग को भूलते रहना ताकि नए विचार जन्म ले सकें।

उनकी यह सोच न केवल स्टार्टअप फाउंडर्स बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने जीवन में रचनात्मकता, प्रयोग और निरंतर विकास की भावना बनाए रखना चाहता है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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