
संसद का मॉनसून सत्र सोमवार को जैसे ही शुरू हुआ, वैसे ही विपक्ष के तीखे तेवरों और जोरदार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को मणिपुर की स्थिति, महंगाई, बेरोजगारी और पेगासस निगरानी मामले पर घेरने की कोशिश की, जिसके कारण सत्र का पहला दिन ही टकराव की भेंट चढ़ गया।
सत्र की शुरुआत से पहले ही साफ था कि विपक्ष इस बार सरकार को हर मोर्चे पर जवाबदेह बनाने के मूड में है। संसद भवन के भीतर और बाहर दोनों ही जगह विपक्ष की रणनीति स्पष्ट नजर आई।
दोनों सदनों में जमकर नारेबाज़ी
जैसे ही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, विपक्षी सांसद अपने-अपने मुद्दों को लेकर वेल में आ गए। वे लगातार “मणिपुर में शांति बहाल करो”, “जनता जवाब मांग रही है”, और “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारे लगा रहे थे।
लोकसभा में कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और वामदलों के सांसद एकजुट होकर महंगाई और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते रहे। वहीं राज्यसभा में आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए चर्चा की मांग की।
सभापति और स्पीकर ने विपक्ष से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा थमता नहीं देख दोनों सदनों को पहले 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
विपक्षी गठबंधन ‘भारत’ की रणनीति
विपक्षी दलों का गठबंधन “भारत” (Bharat – Bhartiya Rashtriya Adhikaar Taalmel) सत्र की शुरुआत से पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि वह जन सरोकारों के मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाएगा। रविवार को हुई बैठक में विपक्षी नेताओं ने मणिपुर हिंसा, बेरोजगारी, किसानों की स्थिति, UGC नेट परीक्षा रद्द होने और कोविड वैक्सीन घोटाले जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “मणिपुर जल रहा है, महिलाएं पीड़ित हैं, बेरोजगारी चरम पर है, और सरकार महज आंकड़ों की बाज़ीगरी दिखा रही है। संसद में जब तक इन पर चर्चा नहीं होती, हम चुप नहीं बैठेंगे।”
सरकार का जवाब: “विकास में बाधा डालने की कोशिश”
वहीं सत्ता पक्ष यानी एनडीए सरकार ने विपक्ष पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष केवल बाधा उत्पन्न करने और कामकाज रोकने की राजनीति कर रहा है। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “हम हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष संसद को हंगामे का मंच बना रहा है। इससे केवल जनता का नुकसान होता है।”
बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे केवल शोर-शराबा कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं से आग्रह किया कि लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखें और नियमों के तहत बहस में हिस्सा लें।
आगे क्या?
इस सत्र में सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने जा रही है, जिनमें डेटा सुरक्षा विधेयक, जनसंख्या नियंत्रण प्रस्ताव और महिला आरक्षण से जुड़ी चर्चाएं शामिल हैं। लेकिन जिस तरह से पहले दिन ही विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गए हैं, उससे साफ है कि आगे का सत्र भी आसान नहीं होने वाला।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 के आम चुनाव के बाद यह पहला बड़ा सत्र है जिसमें दोनों पक्ष अपनी शक्ति प्रदर्शन और आगामी राज्यों के चुनावों को ध्यान में रखते हुए सदन में आक्रामक भूमिका निभा रहे हैं। राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से यह सत्र बेहद अहम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत जिस तरह से हंगामे के साथ हुई, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी दिनों में संसद का वातावरण गरम रहेगा। जहां विपक्ष सरकार को जनहित के मुद्दों पर जवाबदेह बनाना चाहता है, वहीं सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश में है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आने वाले दिनों में दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं, या फिर यह सत्र भी पिछली बार की तरह हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा। फिलहाल, जनता संसद से जवाब और समाधान की अपेक्षा कर रही है।
Author: THE CG NEWS
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