
भारत में क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इसके साथ ही उनके द्वारा चुकाए न जा सकने वाले बिल की राशि भी खतरनाक रूप से बढ़ रही है। हाल ही में आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में क्रेडिट कार्ड बकाया जो समय पर नहीं चुकाया गया है, वह जून 2024 में ₹33,886 करोड़ तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा एक साल पहले यानी जून 2023 में ₹23,475 करोड़ था। इस प्रकार, इसमें करीब 44% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्या है यह बकाया?
क्रेडिट कार्ड का बकाया वह राशि होती है जो कार्डधारक ने खर्च तो कर लिया होता है, लेकिन उसे तय समयसीमा के भीतर चुका नहीं पाता। बैंक या कार्ड जारी करने वाली संस्था इस राशि पर ब्याज वसूलती है, जो सामान्यत: 30% से 45% सालाना तक हो सकता है। ऐसे में यदि ग्राहक समय पर भुगतान नहीं करते, तो उनकी देनदारी बहुत तेजी से बढ़ने लगती है।
क्यों बढ़ रही है बकाया राशि?
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, और मध्यम वर्ग की आय में स्थिरता की कमी, इन सबसे मिलकर यह स्थिति पैदा हो रही है। लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और आकस्मिक खर्चों के लिए भी अब क्रेडिट कार्ड पर निर्भर हो रहे हैं।
वहीं, डिजिटल पेमेंट्स और ई-कॉमर्स की बढ़ती लोकप्रियता ने भी क्रेडिट कार्ड उपयोग को बढ़ावा दिया है। लेकिन जानकारी की कमी, अनियोजित खर्च और वित्तीय अनुशासन की कमी से कई उपभोक्ता कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
जानिए विशेषज्ञों की राय
वित्तीय सलाहकार रजनीश अग्रवाल कहते हैं:
“क्रेडिट कार्ड एक सुविधाजनक साधन है, लेकिन यह तभी तक अच्छा है जब तक आप अपने खर्चों को समय पर चुका पा रहे हों। जैसे ही आप न्यूनतम भुगतान के चक्कर में फंसते हैं, आपकी देनदारी तेजी से बढ़ने लगती है।”
वे आगे बताते हैं कि बैंकों द्वारा नए-नए ऑफर्स, कैशबैक और EMI स्कीम्स के जरिए लोगों को आकर्षित किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ता बिना सोचे-समझे खर्च कर रहे हैं।
आरबीआई की चिंता
आरबीआई पहले भी यह चिंता जता चुका है कि अनसिक्योर्ड लोन (जैसे पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बकाया) में बढ़ोतरी सिस्टम के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। पिछले साल नवंबर 2023 में आरबीआई ने बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) को इस सेगमेंट में कर्ज देने के लिए अतिरिक्त प्रावधान और जोखिम मूल्यांकन करने का निर्देश भी दिया था।
युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
आज की पीढ़ी, खासकर 22 से 35 वर्ष के युवाओं में क्रेडिट कार्ड का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ा है। सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, ट्रैवल और गैजेट्स पर खर्च करने की प्रवृत्ति ने उन्हें अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित किया है। परंतु, वे अक्सर इस बात की अनदेखी कर देते हैं कि समय पर बिल न चुकाने पर यह सुविधा एक गंभीर वित्तीय बोझ बन सकती है।
समाधान क्या हो सकता है?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:
केवल उतना ही खर्च करें जितना आप निश्चित रूप से चुका सकते हैं।
हर महीने पूरे बिल का भुगतान करने की आदत डालें, न्यूनतम भुगतान न करें।
अगर बकाया अधिक हो गया है तो क्रेडिट काउंसलिंग या डेब्ट मैनेजमेंट सर्विसेज की मदद लें।
बजट बनाकर खर्चों पर नियंत्रण रखें और इमरजेंसी फंड तैयार रखें।
निष्कर्ष
भारत में क्रेडिट कार्ड की पहुंच और उपयोगिता दोनों तेजी से बढ़ रही है। यह वित्तीय आज़ादी का प्रतीक बनता जा रहा है, लेकिन यदि इसका उपयोग विवेक और जिम्मेदारी से नहीं किया गया तो यह आज़ादी जल्द ही कर्ज के बंधन में बदल सकती है। समय रहते सतर्क रहना और वित्तीय अनुशासन अपनाना अब पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है।
Author: THE CG NEWS
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