
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त के अंत में चीन के टियानजिन शहर में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 25वें शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह भारत और चीन के बीच सीमा पर 2020 में हुई गलवान घाटी संघर्ष के बाद मोदी का पहला आधिकारिक दौरा होगा—जो द्विपक्षीय रिश्तों में संभावित धर्मांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है ।
संगठन की रूपरेखा और यात्रा का संदर्भ
एससीओ शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक टियानजिन में आयोजित किया जाएगा। इसमें एससीओ की सभी सदस्य राष्ट्रों के प्रमुख भाग लेंगे और इस बार यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मंच साबित होगा ।
इस यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मोदी 30 अगस्त को जापान का दौरा करेंगे, जहां वे जापानी प्रधानमंत्री से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद वे सीधे चीन रवाना होंगे।
कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व
भारत-चीन संबंधों की बहाली के संदर्भ में यह दौरा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। गलवान झड़प के बाद दोनों देशों में संघर्ष और सीमा विवाद की स्थिति बनी हुई थी। 2024 की BRICS बैठक के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद संबंधों में सुधार के संकेत नजर आए थे। अब एससीओ मंच पर पुनः उच्च स्तरीय वार्ता संभावित है।
एससीओ सम्मेलन के एजेंडे में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, ऊर्जा सहयोग और आर्थिक साझेदारी शामिल हैं। जून में भारत ने स्प्रिंगिंग घटना पाकिस्तान में हुए पाहल्गाम आतंकी हमले का नाम एससीओ दस्तावेज़ से हटाए जाने का विरोध किया था। इससे यह साफ होता है कि भारत अपनी रणनीतिक समर्पण को स्पष्ट रूप से रखता है।
वर्तमान भू‑राजनीतिक परिदृश्य में भारत की भूमिका
अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ और रूस से तेल खरीद के मुद्दे ने वैश्विक व्यापार और संबंधों को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत का चीन और रूस जैसे देशों के साथ संतुलन स्थापित करना, बहुपक्षीय मंचों की भूमिका को और मजबूत करता है।
भारत-चीन छेत्र में सीमा पर शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं — जैसे मानसरोवर यात्रा का पुनः आरंभ, वीज़ा संबंधित राहत और सीमा पर गश्त प्रणाली में सुधार।
संभावित द्विपक्षीय वार्ताएँ
यह यात्रा केवल सम्मेलन तक सीमित नहीं रहेगी—उम्मीद है कि मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हो सकती है। इसके अलावा, एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत और रूस (पुतिन) के बीच भी चर्चा संभावित है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का यह शिखर सम्मेलन हेतु चीन दौरा, गलवान संघर्ष के चार साल बाद दोनों देशों के मध्य कूटनीतिक रिश्तों में एक नए अध्याय के रूप में सामने आया है। यह बताता है कि भारत अपनी रणनीतिक विदेश नीति में कितनी संतुलित और सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। आने वाले समय में इस यात्रा की पुष्टि, कार्यक्रम और वैश्विक प्रभाव पर हम आपकी जानकारी बनाए रखेंगे।
Author: THE CG NEWS
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