
भारत ने रूस से सस्ते तेल की आपूर्ति का लाभ उठाया है, लेकिन यह फायदेमंद रियायत आम जनता तक नहीं पहुंच सका। इसके पीछे तेल कंपनियों के अप्रत्याशित लाभ और सरकार की भारी टैक्स वसूली का मुख्य कारण रहा है।
रूस से आयात और तेल कंपनियों के लाभ में उछाल
यूक्रेन संकट के बाद, पश्चिमी प्रतिबंधों की मार से रूस ने भारत को कच्चे तेल पर प्रति बैरल $5 से $30 तक की छूट दी। इस छूट का लगभग 65% लाभ निजी और सार्वजनिक तेल कंपनियों—जैसे कि रिलायंस, नयारा, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम—ने उठाया, जबकि सरकार को केवल 35% हिस्सा मिला। 
नतीजतन, इन कंपनियों के मुनाफ़ों में जबरदस्त वृद्धि हुई: साल 2022-23 में ₹3,400 करोड़ का लाभ, जो 2023-24 में ₹86,000 करोड़ तक (लगभग 25 गुना) पहुंचा। हालांकि 2024-25 में यह कम होकर ₹33,602 करोड़ रहा, फिर भी शुरुआती स्तर के मुकाबले काफी अधिक रहा। 
टैक्स में भारी वसूली — आम आदमी को राहत नसीब नहीं
पेट्रोल पर अनुमानतः 46% और डिज़ल पर 42% तक टैक्स वसूला जाता है, जिनमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों लाभान्वित होते हैं। इन टैक्सों से केंद्र को लगभग ₹2.7 लाख करोड़ प्रति वर्ष मिलते हैं और राज्यों को लगभग ₹2 लाख करोड़  । हाल ही में अप्रैल 2025 में केवल ₹2 प्रति लीटर एक्साइज वृद्धि से केंद्र को अतिरिक्त ₹32,000 करोड़ का राजस्व मिला। 
इस भारी टैक्स ढांचे के चलते, सस्ते इनपुट क्रूड के बावजूद रिटेल रेट में कोई कमी नहीं हुई, जिससे आम आदमी को कोई लाभ नहीं हुआ।
सरकार का राजस्व मॉडल और जनहित में अस्थिर संतुलन
सरकार तेल से जुड़े भारी टैक्स पर निर्भर है क्योंकि यह स्थिर और भारी आय का स्रोत है, जिसे अन्य खर्चों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि यह राजस्व मॉडल अर्थव्यवस्था के आधार पर तर्कसंगत हो सकता है, लेकिन इसके चलते टिकट मूल्य में गिरावट नहीं आई, जिसका बोझ आम जनता पर पड़ा।
वैश्विक संदर्भ और रणनीतिक चुनौतियाँ
रूस से सस्ते तेल की निरंतर आपूर्ति रोमांचक रही है — भारत ने पहले छठे, फिर तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक का दर्जा पाया, और रूस अब भारत का प्रमुख तेल सप्लायर बन गया है।    यह रणनीतिक महत्व रखता है, लेकिन यूएस की ओर से लगाए गए टैरिफ और वैश्विक दबाव बड़े इकोनॉमिक और राजनैतिक जोखिम पैदा करते हैं।   
भारत सरकार और तेल कंपनियाँ इस आपूर्ति को स्थिर रखने हेतु वैकल्पिक स्रोतों पर भी गौर कर रही हैं, ताकि संभावित आपूर्ति व्यवधान या छूट में कमी की स्थिति में तैयार रहा जा सके।
निष्कर्ष
रूस से सस्ते तेल की उपलब्धता ने तेल कंपनियों के लाभ को आसमान छूने में मदद की और सरकार के लिए भी भारी राजस्व सुनिश्चित किया। लेकिन, इस सरप्राइज लाभ का भारतीय आम उपभोक्ता को कुछ खास लाभ प्राप्त नहीं हुआ, क्योंकि टैक्स एवं अन्य लागतें अभी भी बेहद उच्च हैं।
इंडियाज कारोबारी अर्थव्यवस्था में यह गतिरोध सरकार और पब्लिक दोनों के लिए एक चुनौती बनकर खड़ा है—कैसे संसाधन के सस्ते होने का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचे? इस पर व्यापक राजनीतिक और नीतिगत पुनर्विचार की आवश्यकता है।
Author: THE CG NEWS
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