
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पहली एकादशी को आजा एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 24 अगस्त 2025, रविवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्मशास्त्रों में आजा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य अपने पापों से मुक्ति पाता है और मोक्ष की प्राप्ति करता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत का पालन कर श्रद्धालु आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।
आजा एकादशी का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत का नाम राजा हरिश्चंद्र की पत्नी आजा के नाम पर पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं में यह भी वर्णित है कि आजा एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पिछले जन्मों के दोष भी नष्ट हो जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
आजा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो अपने जीवन में नकारात्मकताओं से छुटकारा पाना चाहते हैं। शास्त्रों में इसे आत्मशुद्धि का एक प्रभावी उपाय बताया गया है।
पूजा विधि
इस व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके साफ वस्त्र पहनने चाहिए। घर में पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पीले पुष्प, तुलसी पत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। शंख और घंटी बजाकर विष्णु जी के समक्ष व्रत का संकल्प लें। दिनभर उपवास रखें और कथा-श्रवण तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
शाम को भगवान विष्णु की आरती कर प्रसाद वितरित करें। व्रत करने वाले व्यक्ति को इस दिन सात्विक आहार लेना चाहिए और पूरी श्रद्धा के साथ ध्यान और भक्ति में समय बिताना चाहिए।
पारण का समय
आजा एकादशी का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। इस वर्ष पारण 25 अगस्त 2025, सोमवार को प्रातः 06:12 बजे से 08:35 बजे तक किया जा सकता है। पारण के समय व्रती को फलाहार या अन्न ग्रहण कर व्रत समाप्त करना चाहिए। पारण में विशेष रूप से सात्विक भोजन का ही सेवन करना शुभ माना गया है।
व्रत करने के नियम
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही सात्विक आहार अपनाना चाहिए और व्रत के दिन क्रोध, झूठ और हिंसा से दूर रहना चाहिए। उपवास का पालन करते समय मन, वचन और कर्म की शुद्धि पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि व्रत करने वाले को जरूरतमंदों को दान और भोजन कराना चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को दक्षिणा देने और तुलसी के पौधे की पूजा करने से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को जब अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा तो उन्होंने अपनी पत्नी आजा के साथ आजा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें न केवल अपने पापों से मुक्ति मिली बल्कि जीवन में फिर से सुख और समृद्धि भी प्राप्त हुई। तभी से आजा एकादशी का महत्व और भी बढ़ गया।
निष्कर्ष
आजा एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, भक्ति और शुद्धि का पर्व है। इस दिन किए गए व्रत और पूजा से मनुष्य का आध्यात्मिक उत्थान होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भगवान विष्णु की कृपा से व्रती को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए भक्तजन पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से इस व्रत का पालन करें और विष्णु भगवान की आराधना कर अपने जीवन को सुखमय और मंगलमय बनाएं।
Author: THE CG NEWS
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