82 वर्ष के अमिताभ बच्चन: डॉक्टरों ने बताई एक्सरसाइज और जीवनशैली की नई चोटियाँ

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बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने हाल ही में अपने ब्लॉग के माध्यम से उम्र बढ़ने की चुनौतियों पर बेबाक बातचीत की। 82 वर्ष की उम्र में उनकी ज़िंदगी अब चिकित्सा निगरानी, सावधानी और संशोधित रुटीन के इर्द-गिर्द घूम रही है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने उन्हें रोज़ाना योग, प्राणायाम और संतुलन सुधारने वाले व्यायाम का सुझाव दिया है, जिससे वे सक्रिय रह सकते हैं और गिरने के खतरों से बच सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या हैं ये गाइडलाइन्स जो अमिताभ जी के लिए रक्षा कवच समान बन गई हैं:

रोज़मर्रा के काम अब नहीं हैं वैसे जैसे पहले थे

बचपन में सहज लगने वाले काम अब सोच-समझकर करने पड़ते हैं। जैसे कि पैंट पहनना—अब डॉक्टरों ने उन्हें खड़े होकर पैंट पहनने की बजाय बैठकर पहनने की सलाह दी है, जिससे संतुलन खोने और गिरने का खतरा कम हो जाए। घर में जगह-जगह हैंडलों (हैंडलबार) लगवा दिए गए हैं, ताकि चलते समय गिरने से बचा जा सके।

व्यायाम से बने रहिए ताकतवर और सक्रिय

जीरनो चिकित्सक और जेरियाट्रिक विशेषज्ञों की सलाह है कि मांसपेशियों को बनाये रखना और संतुलन बनाए रखना उम्र के साथ विशेषकर जरूरी हो जाता है। इसके लिए डॉक्टर मोहसिन वली (जेरियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट) की टिप्स महत्वपूर्ण हैं:
•मांसपेशियाँ मजबूत करना: वॉटर एरोबिक्स, हल्के व्यायाम और तैराकी जैसी गतिविधियाँ जोड़ों पर कम दबाव डालते हुए ताकत बढ़ाती हैं।
•कम प्रभाव वाले व्यायाम: कुर्सी में बैठे हुए कैल्फ उठाना, वॉल पुश-अप, हैंड ग्रिप स्क्वीज़ और लेग लिफ्ट जैसे व्यायाम संतुलन सुधारने में मदद करते हैं  ।
•श्वास संबंधी अभ्यास: गहरी सांस और शंख-ध्वनि युक्त अभ्यास फेफड़ों की क्षमता में सुधार लाते हैं और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं  ।
•मस्तिष्क के लिए व्यायाम: शब्द पहेलियाँ जैसे क्रॉसवर्ड खेलना और सुबह की सैर भी दिमाग़ को सक्रिय रखती है  ।

इन सरल लेकिन प्रभावी तरीकों से बुजुर्ग व्यक्ति गिरने के खतरे से बचे रहते हैं और जीवन को स्वतंत्रता के साथ जी सकते हैं।

अमिताभ बच्चन की जीवनशैली में भी ये बदलाव शामिल हैं

अमिताभ बच्चन की दिनचर्या अब दवाओं, हल्के व्यायाम, योग और संतुलन अभ्यास से जुड़ी है। वह खुद लिखते हैं कि एक दिन भी अभ्यास छूट जाए तो दर्द और गतिहीनता बढ़ जाती है। उनकी दिनचर्या में ‘अर्ली डिनर और जल्दी सोना’ जैसी आदतें बनी हुई हैं, जो उम्र बढ़ने पर शरीर को एक संरचित रफ्तार देती हैं।

उन्होंने लिखा है कि “ज़िंदगी की गाड़ी पर उम्र ब्रेक की तरह आती है, जिसे सावधानी से संभालना ही सुरक्षा की कुंजी है।” उसका मतलब है कि उम्र के साथ धीमा होना स्वाभाविक है, और इसे स्वीकारते हुए संतुलन बनाए रखना ही इंसान की सच्ची स्वतंत्रता है।

निष्कर्ष: उम्र कोई बंधन नहीं, बल्कि एक सुंदर बदलाव है

•सुरक्षा व संतुलन — बैठकर पैंट पहनना और हैंडलबार का इस्तेमाल गिरने से बचाता है।
•शारीरिक व्यायाम — हेल्दी और लो-इम्पैक्ट एक्टिविटी से शक्ति और समन्वय में सुधार होता है।
•श्वास अभ्यास — फेफड़ों और ऊर्जा में सुधार का मार्ग है।
•मानसिक व्यायाम — शब्द पहेलियाँ और सुबह की सैर याददाश्त और जागरूकता बढ़ाती हैं।
•दिनचर्या में लचीलापन — डिनर और सोने के समय का संतुलित होना जीवन को स्थिरता देता है।

अमिताभ बच्चन साहब का उदाहरण दिखाता है कि उम्र केवल एक संख्या है—जब आपके पास प्रेरणा, नियमितता और समझदारी हो। डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए इन अभ्यासों को अपनाकर किसी भी उम्र में शारीरिक कमजोरी को मात दी जा सकती है और जीवन का आनंद लिया जा सकता है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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