
दुर्ग जिले के हनोदा स्कूल की अनोखी पहल
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के हनोदा सरकारी मिडिल स्कूल की गणित शिक्षिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बच्चों के लिए शिक्षा का स्वरूप ही बदल दिया है। एक दिव्यांग बच्ची को पढ़ाते समय उन्हें अहसास हुआ कि गणित जैसे विषय को केवल पारंपरिक ढंग से समझाना कारगर नहीं होता। कई बच्चे संख्याओं और सूत्रों से डरते हैं, इसलिए उन्होंने तय किया कि गणित को इतना सहज और रोचक बनाया जाए कि बच्चे इसे खेल की तरह अपनाएँ। इसी सोच से उन्होंने अपने स्कूल में एक मैथ्स पार्क और लर्निंग लैब की शुरुआत की।
दिव्यांग बच्ची से मिली नई दिशा
डॉ. सिंह बताती हैं कि जब उन्होंने एक दिव्यांग बच्ची को पढ़ाया, तो उन्हें महसूस हुआ कि किताबों और ब्लैकबोर्ड से परे भी पढ़ाई को जीवंत बनाने की आवश्यकता है। बच्चे अगर खेल-खेल में सीखें तो वे न केवल जल्दी समझते हैं बल्कि लंबे समय तक याद भी रखते हैं। इस अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने गणित की कक्षाओं को पूरी तरह खेल-आधारित बना दिया।
खेलों के जरिए गणित की पढ़ाई
हनोदा स्कूल में अब बच्चे लूडो, साँप-सीढ़ी, शतरंज, कुर्सी दौड़ और पीटी जैसे खेलों के जरिए गणित सीखते हैं। उदाहरण के तौर पर, लूडो से जोड़-घटाव और गिनती, साँप-सीढ़ी से संख्या ज्ञान और रणनीति, जबकि शतरंज से तार्किक सोच और आकृति की पहचान सिखाई जाती है। इसी तरह पीटी के खेल से बच्चों को समय की गणना और गति संबंधी अवधारणाएँ सिखाई जाती हैं। इस प्रयोग ने बच्चों में गणित के प्रति भय को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा
इस नई शिक्षण शैली का असर साफ दिख रहा है। पहले जहाँ गणित की कक्षा से बच्चे कतराते थे, अब वही बच्चे उत्साह के साथ कक्षा में भाग लेते हैं। खेल-आधारित शिक्षा ने न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाया है बल्कि उनकी सक्रिय भागीदारी और टीमवर्क की भावना को भी मजबूत किया है। पड़ोस के स्कूलों से भी बच्चे इस पहल को देखने आते हैं और सीखते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
डॉ. प्रज्ञा सिंह की इस अनोखी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है। यह उनके लिए बेहद खास है क्योंकि इससे पहले तीन बार आवेदन करने के बावजूद सफलता नहीं मिली थी। चौथे प्रयास में उन्हें यह सम्मान मिलने जा रहा है। 5 सितंबर को राष्ट्रपति के हाथों यह पुरस्कार प्राप्त करना उनके समर्पण और मेहनत का बड़ा सम्मान होगा।
शिक्षा जगत में नई मिसाल
डॉ. सिंह ने साबित कर दिया है कि शिक्षा में संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण है शिक्षक की सोच और समर्पण। छोटे से हनोदा गाँव के स्कूल से निकली यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है। गणित जैसे कठिन समझे जाने वाले विषय को खेल-खेल में आसान और आकर्षक बनाकर उन्होंने शिक्षा जगत में एक नई मिसाल पेश की है।
Author: THE CG NEWS
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