भारत के बाद अब यूरोप पर ट्रंप का वार: रूसी तेल खरीद रोकने और चीन पर दबाव बनाने की चेतावनी

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोपीय देशों पर कड़ा हमला बोला है। ट्रंप ने साफ कहा कि यूरोप को तुरंत रूस से तेल खरीदना बंद करना होगा, क्योंकि यही पैसा रूस की युद्ध मशीनरी को जिंदा रखे हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यूरोपीय देश इस कदम को नहीं उठाते तो अमेरिका को कड़े आर्थिक कदम उठाने पड़ सकते हैं। इससे पहले ट्रंप भारत पर भी इसी मुद्दे पर दबाव बना चुके थे, लेकिन वहां उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। अब उन्होंने अपना पूरा फोकस यूरोप और चीन की ओर मोड़ा है।

भारत पर दबाव नाकाम, अब यूरोप निशाने पर

ट्रंप प्रशासन ने कुछ हफ्ते पहले भारत से रूस से कच्चा तेल आयात रोकने की मांग की थी। लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि वह अपने ऊर्जा हितों से समझौता नहीं करेगा। इसके बाद अमेरिका ने भारतीय आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया। इसके बावजूद भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी। अब जब ट्रंप का दबाव भारत पर असरदार नहीं हुआ, तो उन्होंने यूरोप को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यह उनका भी युद्ध है और रूस की ऊर्जा खरीद को खत्म करना ही होगा।

पेरिस बैठक में ट्रंप का सख्त संदेश

पेरिस में आयोजित बहुराष्ट्रीय बैठक में ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं के सामने दो टूक कहा कि रूस को ऊर्जा बाजार से अलग किए बिना युद्ध को समाप्त करना असंभव है। उन्होंने यूरोप से सवाल किया कि जब अमेरिका लगातार यूक्रेन को हथियार और वित्तीय मदद दे रहा है, तो यूरोप सिर्फ बयानबाजी तक क्यों सीमित है। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश अभी भी रूस से प्रतिदिन अरबों यूरो का तेल और गैस खरीद रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर युद्ध की फंडिंग हो रही है।

चीन पर दबाव डालने की अपील

ट्रंप ने सिर्फ यूरोप ही नहीं, बल्कि चीन को भी अपने निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि चीन की कंपनियां और वित्तीय संस्थान रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही हैं। ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वे भी चीन पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए संयुक्त कदम उठाएं। उनका कहना था कि यदि चीन को सख्त संदेश नहीं दिया गया तो वह रूस को हर तरह से सपोर्ट करता रहेगा और युद्ध लंबा खिंचता जाएगा।

यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जर्मनी, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के शीर्ष प्रतिनिधि भी मौजूद थे। हालांकि ट्रंप के बयान को लेकर यूरोप में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ नेताओं ने माना कि ऊर्जा निर्भरता को कम करना जरूरी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि विकल्प तैयार किए बिना अचानक आयात बंद करना यूरोप की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने ट्रंप के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि रूस के खिलाफ यह लड़ाई तभी सफल होगी जब उसकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तोड़ा जाएगा।

रूस और पुतिन की चेतावनी

दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की नीतियों को ‘खतरनाक’ बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर नाटो या यूरोपीय देश सीधे तौर पर हस्तक्षेप करेंगे तो उन्हें वैध लक्ष्य माना जाएगा। पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस किसी भी कीमत पर अपने ऊर्जा निर्यात पर रोक स्वीकार नहीं करेगा और नए खरीदारों की तलाश करेगा। रूस का कहना है कि एशिया और मध्य-पूर्व में उसके पास वैकल्पिक बाजार मौजूद हैं, जहां उसकी तेल और गैस की मांग बनी रहेगी।

वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका

ट्रंप के इस सख्त रुख ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यूरोप ने अचानक रूसी तेल खरीद बंद कर दी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इससे न केवल यूरोप बल्कि अमेरिका और एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर भी सीधा असर पड़ेगा। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा उनके लिए प्राथमिक मुद्दा है।

निष्कर्ष

स्पष्ट है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा राजनीति वैश्विक समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर रही है। ट्रंप ने पहले भारत और अब यूरोप पर दबाव डालकर यह संकेत दे दिया है कि अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश पूरी तरह से रूस से दूरी बना लें। लेकिन वास्तविकता यह है कि ऊर्जा निर्भरता इतनी आसानी से खत्म नहीं की जा सकती। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जबकि रूस और चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर अपने संबंध और मजबूत कर सकते हैं।

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Author: THE CG NEWS

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