साइलेंट हार्ट अटैक: सामान्य हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक, लक्षण पहचानना क्यों होता है मुश्किल

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देश में तेजी से बढ़ रही हृदय संबंधी बीमारियों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि साइलेंट हार्ट अटैक आम हार्ट अटैक से कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। यह इसलिए घातक है क्योंकि इसके लक्षण समय रहते पहचान में नहीं आते और मरीज को तब तक पता नहीं चलता जब तक नुकसान गंभीर रूप से बढ़ नहीं जाता।

साइलेंट हार्ट अटैक की वास्तविकता

डॉक्टरों के अनुसार साइलेंट हार्ट अटैक उस स्थिति को कहते हैं जब दिल की धमनियों में ब्लॉकेज या रक्त प्रवाह रुकने के बावजूद मरीज को सामान्य हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस नहीं होते। कई बार इसे थकान, अपच या गैस की समस्या समझकर लोग अनदेखा कर देते हैं। यही वजह है कि जब तक मरीज जांच नहीं कराता, तब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि वह हार्ट अटैक झेल चुका है।

बढ़ती जीवनशैली की लापरवाही

विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली इस समस्या को और गंभीर बना रही है। जंक फूड का बढ़ता सेवन, धूम्रपान, शराब की लत, लगातार तनाव और नींद की कमी, यह सभी कारक दिल पर सीधा असर डालते हैं। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों में साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा और बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि लोग छोटे लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते और समय रहते डॉक्टर से संपर्क नहीं करते, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।

किन्हें है ज्यादा खतरा

हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि 40 साल से ज्यादा उम्र के लोग, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के मरीज, जिनके परिवार में पहले से हार्ट डिजीज का इतिहास है, उनमें साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त और धूम्रपान करने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर मरीज को तब पता चलता है जब ईसीजी या अन्य टेस्ट में पुराना हार्ट अटैक निकल आता है।

क्यों नहीं दिखते लक्षण

साइलेंट हार्ट अटैक की सबसे बड़ी समस्या यही है कि इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं। सीने में तेज दर्द की बजाय हल्की थकान, सिर चकराना, पसीना आना या पेट में जलन जैसे संकेत नजर आते हैं। लोग इन्हें सामान्य समस्या मानकर नज़रअंदाज कर देते हैं। इस कारण इलाज में देर हो जाती है और हार्ट को नुकसान स्थायी हो सकता है।

डॉक्टरों की चेतावनी और सलाह

दिल्ली के एक प्रमुख कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि साइलेंट हार्ट अटैक एक “स्लो किलर” है। मरीज को इसका एहसास तब होता है जब वह या तो गंभीर अटैक झेलता है या फिर जांच में पता चलता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि हर व्यक्ति को 35-40 साल की उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। खासकर डायबिटीज और ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को सालाना ईसीजी और ब्लड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

बचाव ही है उपाय

विशेषज्ञ मानते हैं कि साइलेंट हार्ट अटैक से बचने का सबसे बड़ा तरीका है जीवनशैली में सुधार। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव कम करना और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाना जरूरी है। इसके अलावा नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी बेहद अहम है। डॉक्टर कहते हैं कि यदि हल्का भी असामान्य लक्षण महसूस हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

निष्कर्ष

दिल की बीमारियाँ अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा इसी कारण और बढ़ जाता है क्योंकि यह बिना लक्षण दिए हमला करता है और मरीज को गंभीर स्थिति में धकेल देता है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। विशेषज्ञों की राय है कि हर व्यक्ति को अपने दिल की सेहत के प्रति सजग रहना होगा, तभी इस खामोश लेकिन खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है।

 

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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