अगस्त में रिटेल महंगाई दर 2.2% तक पहुंचने का अनुमान: जुलाई के 1.55% से बढ़ोतरी, शाम 4 बजे जारी होंगे आधिकारिक आंकड़े

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देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ सकती है। अगस्त महीने की रिटेल महंगाई दर के 2.2% तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि जुलाई में यह 1.55% रही थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से आधिकारिक आंकड़े आज शाम 4 बजे जारी किए जाएंगे। अगर अनुमान सही साबित होते हैं तो यह लगातार दूसरी बार होगा जब महंगाई में उछाल दर्ज किया जाएगा, जो सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए अहम संकेत होगा।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में रिटेल महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं के दामों में उछाल है। सब्जियों, दालों और अनाज की कीमतें पिछले महीने से ज्यादा रही हैं। मॉनसून की असमान बारिश ने कई राज्यों में फसलों को प्रभावित किया, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई और इसका सीधा असर बाजार में देखने को मिला। यही कारण है कि महंगाई दर जुलाई की तुलना में करीब 0.65% अधिक रहने का अनुमान जताया गया है।

रिजर्व बैंक की नीति पर नजरें

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) फिलहाल रेपो रेट को स्थिर रखे हुए है, लेकिन बढ़ती महंगाई उसके लिए चुनौती खड़ी कर सकती है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने पहले ही साफ किया था कि उसकी प्राथमिकता महंगाई को 4% के लक्ष्य के भीतर बनाए रखना है। हालांकि 2.2% की रिटेल महंगाई अभी लक्ष्य सीमा से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ोतरी निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए चिंता का विषय है।

उपभोक्ताओं पर असर

महंगाई बढ़ने का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। खासकर शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में खाने-पीने की चीजें महंगी होने से घरेलू बजट बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में भी कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो त्योहारी सीजन पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि अभी की महंगाई दर कुल मिलाकर नियंत्रण में है, लेकिन अगर खाद्य महंगाई लगातार बढ़ी तो इसका असर उत्पादन लागत और खपत पर पड़ेगा। खासकर एफएमसीजी और रिटेल सेक्टर में कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ता खर्च और प्रभावित होगा।

आगे की राह

अब सबकी निगाहें आज शाम आने वाले आधिकारिक आंकड़ों पर हैं। अगर रिटेल महंगाई 2.2% तक पहुंचती है तो सरकार को कीमतों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में कटौती, भंडारण नियमों में ढील और सब्सिडी जैसी नीतियां अल्पकालिक राहत दे सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए कृषि उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा।

कुल मिलाकर, अगस्त में रिटेल महंगाई के अनुमानित बढ़ने से आम आदमी और नीति निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ी है। अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में यह रुझान बरकरार रहता है या नहीं।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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