जेन-जी का जीवनशैली पैटर्न: बाहर निकलने में सिर्फ़ 49 मिनट, जेन-एक्स से 25% कम समय

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आज की युवा पीढ़ी, जिसे जेन-जी (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) कहा जाता है, अपनी जीवनशैली और आदतों में पहले की पीढ़ियों से काफी अलग नज़र आ रही है। हाल ही में हुए एक सर्वे में सामने आया है कि जेन-जी औसतन दिन में सिर्फ़ 49 मिनट ही घर से बाहर बिताती है। यह समय जेन-एक्स (1965 से 1980 के बीच जन्मे लोग) की तुलना में लगभग 25% कम है।

घर के अंदर ही सीमित हो रहा जीवन

सर्वे के अनुसार, पहले की पीढ़ियां दिन का बड़ा हिस्सा घर के बाहर बिताती थीं—चाहे वह दोस्तों से मिलने जाना हो, बाज़ार घूमना हो या फिर किसी सामाजिक आयोजन का हिस्सा बनना। लेकिन जेन-जी की जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी है। वे अधिकतर समय घर पर रहकर ही पढ़ाई, काम और मनोरंजन करना पसंद करते हैं।
ऑनलाइन क्लासेज़, वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल मनोरंजन के चलते उनका बाहर निकलने का समय सीमित हो गया है। खास बात यह है कि वे बाहर जाने की बजाय मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर वर्चुअल गतिविधियों में ज़्यादा वक्त बिताना पसंद करते हैं।

सर्वे में दिलचस्प खुलासे

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जेन-जी के केवल 16% लोग ही रोज़ाना पार्क या खुले स्थान पर जाते हैं, जबकि जेन-एक्स में यह आंकड़ा 46% था। इसी तरह बाज़ार और रेस्टोरेंट जाने की आदत भी जेन-जी में लगभग 25% कम देखी गई।
इसके अलावा, आउटडोर गेम्स और ग्रुप एक्टिविटीज़ में भी उनकी भागीदारी बहुत कम है। जहां पहले बच्चे और युवा मैदानों में घंटों खेलते थे, वहीं आज के किशोर और युवा अधिकतर समय ऑनलाइन गेम्स या सोशल मीडिया पर गुज़ार रहे हैं।

स्वास्थ्य और मानसिकता पर असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह जीवनशैली युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल रही है। घर के अंदर सीमित रहना न केवल मोटापा और शारीरिक बीमारियों का खतरा बढ़ाता है, बल्कि मानसिक तनाव और अकेलेपन की समस्या भी पैदा करता है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बाहर निकलना और लोगों से जुड़ना मानसिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। ताजी हवा, प्रकृति का साथ और सामाजिक गतिविधियां आत्मविश्वास बढ़ाती हैं, लेकिन जेन-जी में यह कमी साफ देखी जा रही है।

डिजिटल युग की बड़ी चुनौती

तकनीक ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसने युवाओं को सामाजिक जीवन से भी दूरी पर ला खड़ा किया है। जेन-जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—डिजिटल वर्ल्ड और रियल लाइफ के बीच संतुलन बनाना। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि माता-पिता को बच्चों को आउटडोर गतिविधियों और सामाजिक मेल-जोल के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में न केवल उनकी शारीरिक फिटनेस पर असर पड़ेगा, बल्कि समाज में सहयोग और जुड़ाव की भावना भी कमजोर हो सकती है।

 

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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