
हरियाणा के गुरुग्राम जिले में स्थित माता शीतला का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर की महत्ता सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद खास है। यहां रोज़ाना हजारों भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए चुनरी बांधकर प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि माता शीतला अपनी कृपा से सभी दुख-दर्द हर लेती हैं और भक्तों के जीवन को सुख-समृद्धि से भर देती हैं।
महाभारत काल से जुड़ी मान्यता
इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है। धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान गुरु द्रोणाचार्य और उनकी पत्नी कृपाचार्या (जिन्हें माता शीतला भी कहा जाता है) से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि माता शीतला ने ही बच्चों और समाज को संक्रामक बीमारियों से बचाने का आशीर्वाद दिया था। इसी वजह से उन्हें “रोगनिवारिणी माता” भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इस मंदिर की महत्ता बनी हुई है और पीढ़ी दर पीढ़ी लोग यहां आकर अपनी आस्था व्यक्त करते रहे हैं।
भक्तों की श्रद्धा और चुनरी की परंपरा
माता शीतला मंदिर में चुनरी बांधने की परंपरा बेहद प्रसिद्ध है। भक्त अपनी मनोकामनाओं के साथ यहां चुनरी चढ़ाते हैं और मन्नत पूरी होने पर पुनः आकर माता का धन्यवाद करते हैं। यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही आस्था के साथ निभाई जाती है। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु मंदिर परिसर में घंटों तक माता के दर्शन के लिए कतार में खड़े रहते हैं।
धार्मिक महत्व और मेलों का आयोजन
यह मंदिर न केवल रोज़ाना पूजा-अर्चना का केंद्र है, बल्कि खास अवसरों पर यहां विशाल मेले भी आयोजित किए जाते हैं। नवरात्र के समय माता शीतला के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु गुरुग्राम पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भक्तजन भजन-कीर्तन करते हैं और कई सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। यह मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि लोक संस्कृति और परंपरा को भी जीवित रखता है।
आस्था और पर्यटन का संगम
गुरुग्राम का यह मंदिर धार्मिक पर्यटन का भी एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। दिल्ली और एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। भक्त माता शीतला के दर्शन के साथ-साथ मंदिर परिसर की ऐतिहासिकता और इसकी स्थापत्य कला को भी निहारते हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा भी मंदिर की सुविधाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
माता शीतला का आध्यात्मिक संदेश
माता शीतला केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य की देवी के रूप में भी पूजी जाती हैं। लोक परंपराओं में उन्हें ‘शीतलता’ और ‘स्वास्थ्य’ प्रदान करने वाली शक्ति माना गया है। मान्यता है कि माता की पूजा से संक्रामक रोगों से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में शांति बनी रहती है।
निष्कर्ष
गुरुग्राम का माता शीतला मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि भारत की प्राचीन आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। यहां हर दिन हजारों भक्त अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और माता से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। महाभारत काल से चला आ रहा यह विश्वास आज भी उतनी ही दृढ़ता से लोगों के हृदय में बसा हुआ है। यही कारण है कि यह मंदिर न सिर्फ गुरुग्राम की शान है, बल्कि पूरे देश में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
Author: THE CG NEWS
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