
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई हलचल मच गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले प्रदेशाध्यक्ष रहे स्व. ताराचंद साहू द्वारा स्थापित ‘छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच’ अब अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। निर्वाचन आयोग ने इस पार्टी को वार्षिक लेखा-परीक्षित खाते और चुनावी व्यय रिपोर्ट समय पर नहीं देने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने पार्टी अध्यक्ष को 9 अक्टूबर 2025 तक हलफनामा और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने को कहा है। जवाब संतोषजनक न होने पर पार्टी का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
ताराचंद साहू: छत्तीसगढ़ BJP के पहले प्रदेशाध्यक्ष
ताराचंद साहू का राजनीतिक जीवन छत्तीसगढ़ की राजनीति से गहरे जुड़ा हुआ है। वे 1990 और 1993 में गुंडरदेही से विधायक चुने गए और 1996, 1998, 1999 तथा 2004 में दुर्ग से लगातार सांसद रहे। 2001 में उन्हें भाजपा का पहला प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, 2008 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने 10 अगस्त 2008 को ‘छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच’ की स्थापना की, जिसे छत्तीसगढ़ की पहली क्षेत्रीय पार्टी माना गया।
पार्टी का उत्थान और पतन
स्वाभिमान मंच ने विधानसभा चुनावों में सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2009 में ताराचंद साहू ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दुर्ग लोकसभा चुनाव लड़ा और 2.64 लाख वोट प्राप्त किए, जो उनकी जमीनी पकड़ को दर्शाता है। 2014 में उनके बेटे दीपक साहू ने मंच का भाजपा में विलय कर दिया, जिसे ‘घर वापसी’ कहा गया। हालांकि, इस विलय को लेकर पार्टी के कुछ सदस्य असहमत थे, जिसके बाद मंच दो हिस्सों में बंट गया।
दीपक साहू की घर वापसी और पार्टी की स्थिति
दीपक साहू ने भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी की गतिविधियों में भाग लिया, लेकिन 2016-17 में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी द्वारा छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (J) की स्थापना के बाद मंच का एक बड़ा धड़ा उनके साथ जुड़ गया। इसके बाद, कुछ सदस्य आम आदमी पार्टी में भी शामिल हुए, लेकिन ये प्रयास धरातल पर सफल नहीं हो पाए। वर्तमान में, मंच केवल कागजों पर बचा हुआ है और निर्वाचन आयोग का नोटिस इसकी स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
निर्वाचन आयोग का नोटिस और पार्टी की स्थिति
निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच समेत तीन पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि इन दलों ने न तो 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के वार्षिक लेखा-परीक्षित खाते समय पर जमा किए, न ही चुनाव लड़ने के दौरान व्यय रिपोर्ट दाखिल की। यह सीधे तौर पर आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही संबंधी गाइडलाइन का उल्लंघन है। आयोग ने पार्टी अध्यक्ष को 9 अक्टूबर 2025 तक हलफनामा और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने को कहा है। जवाब संतोषजनक न होने पर आयोग के पास पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच की कहानी एक राजनीतिक संघर्ष और अस्तित्व की जद्दोजहद की दास्तान है। एक समय था जब यह पार्टी छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में उभरी थी, लेकिन आंतरिक कलह, नेतृत्व के अभाव और बड़े दलों के दबदबे के कारण यह पार्टी अब संकट में है। निर्वाचन आयोग का नोटिस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है और इसके भविष्य पर सवालिया निशान लगा रहा है। यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाता है।
Author: THE CG NEWS
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