दशहरा 2025: असत्य पर सत्य की विजय का पर्व, पूरे देश में धूमधाम से मना विजयादशमी

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पूरे देश में आज विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। रामायण के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। देशभर में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जा रहा है, वहीं मंदिरों और रामलीला मैदानों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।

विजयादशमी का धार्मिक महत्व

दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इसे विजयादशमी भी कहा जाता है क्योंकि यह दिन विजय का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा कर ‘शक्ति’ की आराधना की थी और इसी दिन उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की थी। यह दिन हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की जीत होती है।

देशभर में मनाई जा रही परंपराएं

दशहरा का पर्व भारत के हर हिस्से में अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में यह पर्व रामलीला के समापन और रावण दहन के रूप में प्रसिद्ध है। दिल्ली, वाराणसी, अयोध्या, कानपुर और लखनऊ के रामलीला मैदानों में शाम को लाखों की संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में इस दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक चली पूजा-अर्चना के बाद माँ दुर्गा की प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है और भक्त “आस्चे बोछोर आबार होबे” (अगले वर्ष फिर मिलेंगे) कहकर विदाई देते हैं।
दक्षिण भारत में विजयादशमी को ‘विद्यारंभ’ के रूप में मनाया जाता है, जहाँ बच्चे इस दिन पहली बार लिखना या पढ़ना शुरू करते हैं। कर्नाटक के मैसूर में दशहरा उत्सव शाही अंदाज़ में मनाया जाता है, जहाँ पारंपरिक जुलूस, नृत्य और संगीत कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

रावण दहन और संदेश

रावण दहन के साथ ही बुराई के अंत और सद्गुणों के उत्थान का संदेश पूरे समाज में फैलता है। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में नैतिकता और सदाचार की पुनःस्थापना का प्रतीक है।
देश के कई शहरों में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली पुतले बनाए जा रहे हैं, जिनमें प्रदूषण फैलाने वाली सामग्रियों का उपयोग नहीं किया जाता। कुछ जगहों पर डिजिटल और लाइट शो के माध्यम से रावण दहन को दर्शाया जा रहा है।

त्योहार से जुड़ी भावनाएं और लोककथाएं

दशहरा केवल भगवान राम और रावण की कथा से जुड़ा नहीं है, बल्कि देवी दुर्गा की विजय से भी इसका गहरा संबंध है। मान्यता है कि माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध भी इसी दिन किया था। इसलिए यह दिन ‘शक्ति की विजय’ का प्रतीक भी माना जाता है।
भारत के विभिन्न राज्यों में इस दिन विशेष भंडारे, झांकियां और शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं। लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बाँटते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। ग्रामीण इलाकों में दशहरा को कृषि कार्यों की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है क्योंकि इसे शुभ मुहूर्त माना जाता है।

सरकार और प्रशासन की तैयारियां

त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन ने देशभर में विशेष इंतज़ाम किए हैं। बड़े शहरों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है और रावण दहन स्थलों पर फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। प्रशासन ने अपील की है कि लोग उत्सव मनाते समय सुरक्षा और पर्यावरण का ध्यान रखें।

निष्कर्ष: आस्था और आदर्शों का संगम

दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन के मूल्यों की याद दिलाने वाला उत्सव है। यह हमें सिखाता है कि सत्य, धर्म और सदाचार की राह कठिन जरूर होती है, पर जीत हमेशा उसी की होती है। आज जब समाज कई चुनौतियों से गुजर रहा है, तब विजयादशमी का यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है —
“जहाँ सत्य है, वहीं विजय है।”

दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं — द सीजी न्यूज़ की ओर से।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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