धीरेंद्र शास्त्री का विवादित बयान: “हम बकरीद-ताजिया पर ज्ञान नहीं देते, दिवाली पर भी पटाखों पर न लगाए ज्ञान”

SHARE:

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिवाली से पहले एक बेहद विवादित बयान दिया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “पटाखों पर ज्ञान न पेलें” और यह कि “हम बकरीद-ताजिया पर ज्ञान नहीं देते”। उनका तर्क है कि दिवाली सहित हिन्दू त्योहारों पर समाज के कुछ लोग हमेशा सलाह या नसीहत देने लगते हैं, जबकि दूसरे धर्मों के त्योहारों पर दरअसल वे ऐसा नहीं करते। 

शास्त्री ने मुंबई में सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में उपस्थित होकर कहा:

“यह हमारा धर्म और हमारी परंपरा है — हम पटाखे फोड़ेंगे। आपने होली-दीवाली पर कई तरह की नसीहत दी है, लेकिन हम बकरीद और ताजिया पर ज्ञान नहीं देते — तो आप दिवाली पर हमें पटाखों को लेकर ज्ञान न पेलें।” 

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “धुम्रपान, प्रदूषण, पर्यावरण” आदि जैसे विषयों पर नसीहत देना अच्छा है, लेकिन यह केवल हिंदू त्योहारों को ही निशाना क्यों बनाते हैं?  शास्त्री के मुताबिक, यदि वह अपने धर्म की पूर्व परंपराओं का पालन कर रहे हैं, तो उस पर बाहरी लोग ज्ञान न पेलें। 

बकरीद-ताजिया, पशु बलि और उनका दृष्टिकोण

इस बयान की पृष्ठभूमि में शास्त्री पहले ही बकरीद (ईद अल-अधा) और ताजिया की परंपराओं के प्रति अपनी राय देते आ रहे हैं। वे कहते हैं कि वे बकरीद और ताजिया पर ज्ञान नहीं देते, यानी किसी को उस धर्म या आयोजन पर नसीहत नहीं देते। 

उल्लेखनीय है कि शास्त्री ने पहले भी पशु बलि (जानी), विशेषकर बकरीद के समय की जाने वाली बलिदानों पर आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि आधुनिक समय में इस प्रथा को बदलना चाहिए क्योंकि हम किसी जीव को मारने का अधिकार नहीं रखते। 

उन्होंने यह दलील दी कि किसी व्यक्ति की जान बचाई न जा सके तो किसी जान लेने का अधिकार कैसे हो सकता है। 

समाज व विवाद: प्रतिक्रिया और प्रभाव

शास्त्री का यह बयान मीडिया और धर्म समुदायों में तेजी से वायरल हो गया है। कहीं यह धार्मिक आज़ादी और समरसता की बात बन गया है, तो कहीं इसे उत्तेजक व विवादास्पद माना जा रहा है।

कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर हर त्योहार और धर्म के प्रति समान दृष्टिकोण हो, तो यह बयान समझा जा सकता है। वहीं कुछ आलोचक इसे धार्मिक भावनाओं में हस्तक्षेप और धर्म विशेष को निशाना बनाने वाला कह रहे हैं।

धार्मिक गतिविधियों और त्योहारों के वक्त अक्सर समाज में धार्मिक सलाह, जागरूकता और पर्यावरण चेतना की बातें सामने आती हैं — लेकिन अक्सर ये बातें केवल हिंदू त्योहारों पर ही केंद्रित होती दिखती हैं। शास्त्री का यह बयान इस निष्कर्ष को सामने ला रहा है कि धर्म विशेष पर असममिति हो रही है। 

निष्कर्ष

पंडित धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान न केवल धर्म और परंपरा पर एक सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह यह पूछने पर मजबूर करता है कि समाज में धार्मिक स्वतंत्रता और समानता कैसे लागू हो?

•उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे दिवाली पर पटाखों को परंपरा का हिस्सा मानते हैं और इस पर दूसरों द्वारा नसीहत देना अनुचित मानते हैं।

•साथ ही उन्होंने यह तर्क दिया कि यदि हम बकरीद-ताजिया पर ज्ञान नहीं देते हैं, तो फिर दूसरों को दिवाली पर पटाखों को लेकर ज्ञान देने का अधिकार क्यों होना चाहिए?

•उनकी यह राय है कि धार्मिक और त्योहारों पर सजगता व चर्चाएँ ज़रूर होनी चाहिए — लेकिन नकारात्मक या तंग दृष्टिकोण से नहीं।

यह बयान धार्मिक बहस और सामाजिक समरसता की दिशा में एक नया मोड़ हो सकता है — जहां एक ओर परंपराएँ और आस्था बनी रहें, वहीं दूसरी ओर दूसरों के धार्मिक प्रतीकों और त्योहारों का भी समान सम्मान हो।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

TheCGNews.in – छत्तीसगढ़ की सच्ची आवाज़ “TheCGNews.in” छत्तीसगढ़ का एक उभरता हुआ डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जो प्रदेश की ज़मीन से जुड़ी, वास्तविक और निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुँचाने के मिशन के साथ कार्यरत है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी ताकत है – स्थानीयता और विश्वसनीयता। TheCGNews.in का फोकस सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज पर नहीं, बल्कि उन खबरों पर है जो आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं – गांव, कस्बों, पंचायत, युवाओं, शिक्षा, रोजगार, राजनीति, संस्कृति और जन-समस्याओं की सच्ची झलक यहाँ देखने को मिलती है। TheCGNews.in की खास बातें: • ✅ छत्तीसगढ़ की हर कोने से रिपोर्टिंग • ✅ सिर्फ सनसनी नहीं – समाधान की पत्रकारिता • ✅ युवाओं और किसानों की आवाज़ • ✅ भ्रष्टाचार, विकास और बदलाव की असली रिपोर्ट • ✅ हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में खबरें

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई