क्या उंगलियां चटकाना सेहत के लिए खतरनाक है? जानिए डॉक्टरों ने क्या कहा और क्यों आती है ‘क्रैक’ की आवाज

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अक्सर लोग अपनी उंगलियां या गर्दन चटकाने की आदत में रहते हैं। कई बार यह एक तरह की ‘रिलैक्सेशन’ या तनाव कम करने का तरीका माना जाता है, जबकि कुछ लोग इसे अनजाने में करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उंगलियां चटकाने से आवाज क्यों आती है और क्या यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? इस पर हाल ही में डॉक्टरों ने चौंकाने वाले तथ्य साझा किए हैं जो इस आम आदत के पीछे छिपे विज्ञान को उजागर करते हैं।

आवाज आने की असली वजह क्या है?

दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. विवेक आहूजा बताते हैं कि जब हम अपनी उंगलियां मोड़कर खींचते हैं, तो उंगलियों के जोड़ यानी जॉइंट्स में मौजूद द्रव (सिनोवियल फ्लूइड) में गैस के छोटे बुलबुले बनते हैं। जैसे ही जोड़ पर दबाव पड़ता है, ये गैस बबल्स फट जाते हैं और उसी समय “क्रैक” जैसी आवाज सुनाई देती है। यह आवाज किसी हड्डी या नस के टूटने से नहीं आती, बल्कि सिर्फ गैस के बुलबुले के टूटने की प्रतिक्रिया होती है।

डॉ. आहूजा के अनुसार, यह प्रक्रिया पूरी तरह से भौतिक है और सामान्य स्थिति में इससे कोई दर्द या सूजन नहीं होती। हालांकि, बार-बार ऐसा करने से जोड़ पर दबाव पड़ सकता है और लंबे समय में यह नुकसान पहुंचा सकता है।

क्या उंगलियां चटकाना नुकसानदायक है?

कई लोग मानते हैं कि उंगलियां चटकाने से गठिया (Arthritis) जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इस विषय पर कई शोध किए गए हैं। जर्नल ऑफ हैंड सर्जरी में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, उंगलियां चटकाने की आदत रखने वाले लोगों और ऐसा न करने वालों में गठिया का कोई खास अंतर नहीं पाया गया। हालांकि, लगातार ऐसा करने से जोड़ों की लिगामेंट्स पर तनाव बढ़ सकता है, जिससे हल्की सूजन या अकड़न महसूस हो सकती है।

डॉ. आहूजा कहते हैं, “कभी-कभी उंगलियां चटकाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन इसे आदत बना लेना सही नहीं। यह जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों और टेंडन पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब व्यक्ति इसे बार-बार और जोर से करता है।”

क्यों होती है यह आदत?

मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो उंगलियां चटकाना एक स्ट्रेस-रिलीफ बिहेवियर है। जब व्यक्ति तनाव में होता है या किसी चीज़ पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा होता है, तो यह हरकत उसे मानसिक सुकून देती है। यह एक तरह की आदत बन जाती है, जैसे पैर हिलाना या पेन घुमाना।

मनोचिकित्सक डॉ. संगीता माथुर के अनुसार, “ज्यादातर मामलों में उंगलियां चटकाने की आदत अवचेतन होती है। व्यक्ति को खुद पता नहीं चलता कि वह कब और कितनी बार ऐसा करता है। यह तब ज्यादा होता है जब दिमाग तनावग्रस्त या बेचैन होता है।”

कब हो सकता है खतरा?

अगर उंगलियां चटकाने के बाद दर्द, सूजन या आवाज के साथ झनझनाहट महसूस होती है, तो यह सामान्य नहीं है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। यह संकेत हो सकता है कि जोड़ के अंदर की संरचना पर बार-बार दबाव पड़ने से टिश्यू डैमेज हो रहे हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक, जो लोग दिन में कई बार उंगलियां चटकाते हैं, उन्हें यह आदत धीरे-धीरे छोड़नी चाहिए। इसके लिए तनाव घटाने के अन्य उपाय जैसे योग, ध्यान या श्वास अभ्यास मददगार हो सकते हैं।

क्या कभी चटकाना ठीक है?

कभी-कभार उंगलियां या गर्दन चटकाना नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसे नियमित आदत नहीं बनाना चाहिए। इससे जोड़ के आसपास की फ्लेक्सिबिलिटी पर असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में लोगों को यह आदत इतनी लग जाती है कि वे इसे रोक नहीं पाते। ऐसे मामलों में इसे नर्वस टिक्स की तरह माना जा सकता है और इसके लिए व्यवहार चिकित्सा (Behavioral Therapy) कारगर रहती है।

निष्कर्ष:

उंगलियां चटकाने से आवाज आना एक प्राकृतिक भौतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसे बार-बार दोहराने से जोड़ों पर असर पड़ सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि इस आदत से बचना ही बेहतर है, खासकर अगर यह बिना जरूरत की आदत बन चुकी है। तनाव को दूर करने के लिए बेहतर उपाय जैसे योग, ध्यान और व्यायाम न सिर्फ शरीर को मजबूत बनाते हैं बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। इसलिए अगली बार जब आप उंगलियां चटकाने का मन करें, तो एक गहरी सांस लें—यह आपके जोड़ों के लिए कहीं ज्यादा सुरक्षित है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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