
धमतरी जिले के गंगरेल स्थित प्रसिद्ध मां अंगारमोती मंदिर में शुक्रवार को एक अनोखी और सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई। दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को यहां देव मड़ई का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस मौके पर संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर करीब 800 महिलाएं पेट के बल जमीन पर लेट गईं, जिनके ऊपर से पारंपरिक बैगा (तांत्रिक पुजारी) चलता हुआ माता के गर्भगृह तक पहुंचा। कहा जाता है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और मां अंगारमोती की कृपा से निःसंतान महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है।
प्राचीन मान्यता से जुड़ी परंपरा
स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, मां अंगारमोती को संतान देने वाली देवी माना जाता है। गांवों के बुजुर्ग बताते हैं कि सैकड़ों साल पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही आस्था से निभाई जाती है। जब कोई महिला संतान की कामना करती है, तो वह मां अंगारमोती से मन्नत मांगती है कि संतान प्राप्ति के बाद वह देव मड़ई के अवसर पर पेट के बल लेटकर माता तक जाने का व्रत पूरा करेगी। इस दौरान बैगा उन महिलाओं के ऊपर से गुजरता है, जिसे देवी का आशीर्वाद माना जाता है।
महिलाएं इस अनुष्ठान के दौरान सिर से लेकर पैर तक सफेद कपड़े से ढकी रहती हैं और माता के भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु जयकारे लगाते हैं। पूरा मंदिर परिसर धार्मिक उत्साह और भक्ति भाव से भर जाता है।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने उठाया सवाल
हालांकि इस परंपरा को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अनुष्ठान को “अंधविश्वास” बताते हुए इसे बंद करने की मांग की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी महिला को संतान प्राप्ति के लिए इस तरह की प्रक्रिया से गुजरना उचित नहीं है। यह आस्था के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित करने जैसा है।
इस बार भी जब यह अनुष्ठान हुआ, तो सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में दिख रहा है कि महिलाएं लंबी कतार में लेटी हैं और बैगा उनके ऊपर से चल रहा है। कई लोगों ने इसे धार्मिक आस्था का प्रतीक बताया, तो कई ने इसे “अमानवीय परंपरा” कहा।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
वीडियो वायरल होने के बाद धमतरी जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया है। अधिकारियों ने बताया कि इस परंपरा की जांच की जाएगी कि इसमें किसी तरह की जबरदस्ती या जोखिम तो नहीं है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, पिछले वर्षों में भी इस परंपरा को लेकर चर्चा होती रही है, लेकिन ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं को देखते हुए कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
एसडीएम धमतरी ने कहा कि “यह क्षेत्रीय आस्था से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे संवेदनशीलता से देखा जाएगा। यदि इसमें महिलाओं की सुरक्षा या गरिमा से जुड़ी कोई बात सामने आती है, तो आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।”
ग्रामीणों का कहना – आस्था का विषय
दूसरी ओर, मंदिर समिति और ग्रामीणों ने इस परंपरा का बचाव करते हुए कहा कि यह पूरी तरह स्वेच्छा से निभाई जाने वाली प्रथा है। किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जाता। उनका कहना है कि सदियों से यह परंपरा निभाई जा रही है और कई महिलाओं को मां अंगारमोती की कृपा से संतान की प्राप्ति हुई है।
गांव के एक वरिष्ठ पुजारी ने बताया कि “यह परंपरा किसी के ऊपर जबरन नहीं थोपी जाती। महिलाएं खुद मन्नत मांगती हैं और संतान प्राप्ति के बाद व्रत पूरा करती हैं। यह सिर्फ आस्था नहीं, मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का तरीका है।”
आस्था बनाम अंधविश्वास पर फिर छिड़ी बहस
इस घटना के बाद एक बार फिर आस्था और अंधविश्वास के बीच की बहस छिड़ गई है। कुछ लोग मानते हैं कि जब यह परंपरा स्वेच्छा से निभाई जा रही है तो इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए, जबकि दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता इसे महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हैं।
धमतरी का यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। हर साल दीपावली के बाद पहला शुक्रवार यहां हजारों की संख्या में लोगों को आकर्षित करता है।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन और समाज इस पुरानी परंपरा के प्रति क्या रुख अपनाते हैं—क्या इसे धार्मिक आस्था के रूप में जारी रहने दिया जाएगा, या अंधविश्वास कहकर बंद करने की दिशा में कदम उठेंगे। फिलहाल मां अंगारमोती मंदिर और वहां की यह परंपरा एक बार फिर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है।
Author: THE CG NEWS
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