
देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर खतरनाक सीमा को पार कर गया है। शनिवार को कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का स्तर 400 के पार दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। राजधानी में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है, जिससे सांस और एलर्जी के मरीजों की संख्या अस्पतालों में तेजी से बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में साइक्लोन ‘मोंथा’ को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों में तूफान और तेज बारिश की स्थिति बन सकती है।
दिल्ली में सांस लेना हुआ मुश्किल
सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत AQI 406 रिकॉर्ड किया गया। आनंद विहार, वजीरपुर, बवाना और पंजाबी बाग जैसे इलाकों में यह स्तर 430 से 450 तक पहुंच गया। प्रदूषण का यह स्तर खतरनाक माना जाता है और स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकता है।
प्रदूषण विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के बाद से हवा में मौजूद धूल, धुआं और पराली जलाने के कारण हवा में घुलनशील कण (PM 2.5 और PM 10) की मात्रा बढ़ी है। ठंडी हवा और कम हवा की गति के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास जम गए हैं, जिससे स्मॉग की परत घनी होती जा रही है।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी
दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों जैसे AIIMS, सफदरजंग और लोकनायक में बीते तीन दिनों में अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की संख्या 30 से 40% तक बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषित हवा न केवल बुजुर्गों और बच्चों के लिए खतरनाक है, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों के फेफड़ों पर भी असर डाल रही है।
AIIMS के पल्मोनरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार ने बताया कि “इस समय हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे सांस फूलना, आंखों में जलन, गले में खराश और सिरदर्द जैसी शिकायतें बढ़ गई हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या है, उन्हें घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।”
डॉक्टरों की सलाह—मास्क लगाएं और सुबह की वॉक टालें
डॉक्टरों ने लोगों को बाहर निकलते समय N-95 या N-99 मास्क पहनने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य कपड़े या सर्जिकल मास्क प्रदूषक कणों को रोकने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा सुबह और शाम के समय खुले में वॉक या एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन घंटों में हवा में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा रहता है।
डॉ. नेहा शर्मा, एलर्जी विशेषज्ञ, ने कहा कि “बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। घरों में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और खिड़कियां बंद रखें। जिन लोगों को खांसी या सांस फूलने की दिक्कत हो रही है, वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।”
सरकार ने बढ़ाई निगरानी
दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत स्टेज-III प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इसके तहत निर्माण कार्य, ईंट भट्ठे, और डीजल जनरेटरों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। स्कूलों में छोटे बच्चों की आउटडोर गतिविधियां रद्द कर दी गई हैं। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि “सरकार प्रदूषण कम करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। पराली जलाने पर रोक सख्ती से लागू की जा रही है और टीमों को मौके पर तैनात किया गया है।”
आंध्र प्रदेश में ‘मोंथा’ साइक्लोन का खतरा
इस बीच, दक्षिण भारत में मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बना साइक्लोन ‘मोंथा’ तेजी से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह तूफान अगले 48 घंटे में तटीय आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम और श्रीकाकुलम जिलों के पास लैंडफॉल कर सकता है।
IMD के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “तूफान के प्रभाव से 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और भारी वर्षा होने की संभावना है।” राज्य सरकार ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। राहत और बचाव टीमों को तटीय क्षेत्रों में तैनात किया गया है और एनडीआरएफ की कई टीमें तैयार रखी गई हैं।
दोहरी चुनौती—एक तरफ प्रदूषण, दूसरी तरफ तूफान
जहां उत्तर भारत में प्रदूषण से सांस लेना मुश्किल हो गया है, वहीं दक्षिण भारत में चक्रवात मोंथा की चुनौती सामने है। दोनों स्थितियां यह दिखाती हैं कि देश एक साथ पर्यावरणीय संकटों से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब सरकार और जनता दोनों को पर्यावरण सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, वरना आने वाले वर्षों में हवा और मौसम दोनों और भी खतरनाक रूप ले सकते हैं।
Author: THE CG NEWS
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