
भारत-चीन व्यापार में दिखा नया रुझान
अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए ऊँचे टैरिफ के बाद भारत और चीन के बीच व्यापारिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के बीच भारत का चीन को निर्यात 22% की तेज़ वृद्धि के साथ 74,000 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। यह पहली बार है जब भारत ने चीन को डिस्प्ले पैनल का भी निर्यात किया है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव वैश्विक सप्लाई चेन के पुनर्गठन का परिणाम है, जिसमें भारत धीरे-धीरे अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है।
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव का मिला भारत को फायदा
अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव ने भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोले हैं। अमेरिका द्वारा चीन के इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ के बाद कई चीनी कंपनियों ने भारत से कच्चा माल और कंपोनेंट्स खरीदने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ा है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, केमिकल और आयरन उत्पादों के क्षेत्र में। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में चीन को भारत का कुल निर्यात लगभग 60,400 करोड़ रुपए था, जो इस साल बढ़कर 74,000 करोड़ रुपए पहुंच गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स और डिस्प्ले सेक्टर में उछाल
भारत ने इस साल पहली बार चीन को डिस्प्ले पैनल का निर्यात शुरू किया है, जो अब तक केवल दक्षिण कोरिया और ताइवान से चीन आयात करता था। यह परिवर्तन भारत के बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का संकेत देता है। नोएडा और चेन्नई स्थित मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों से बने एलसीडी और OLED पैनल्स को चीन भेजा गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की ‘Make in India’ पहल और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का परिणाम है, जिसने इलेक्ट्रॉनिक निर्माण को नई दिशा दी है।
फार्मा और केमिकल सेक्टर ने भी दिखाया दम
फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल सेक्टर ने भी चीन को निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। भारत के फार्मा उत्पादों की चीन में मांग लगातार बढ़ रही है, विशेषकर जेनेरिक दवाओं और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) की। केमिकल उत्पादों, प्लास्टिक आइटम्स और मेटल स्क्रैप के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, कई चीनी निर्माता अब भारत से रॉ मटेरियल आयात कर रहे हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है और भारत तुलनात्मक रूप से सस्ता और विश्वसनीय स्रोत बन रहा है।
भारत-चीन व्यापार संतुलन में हल्की सुधार की उम्मीद
हालांकि चीन से भारत का आयात अब भी काफी ज्यादा है, लेकिन इस निर्यात वृद्धि से व्यापार संतुलन में मामूली सुधार की उम्मीद है। भारत का चीन से वार्षिक आयात करीब 9.5 लाख करोड़ रुपए का है, जबकि निर्यात पहले 1 लाख करोड़ के आसपास रहता था। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह वृद्धि दर बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह अंतर धीरे-धीरे कम हो सकता है। सरकार भी उच्च-तकनीकी क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स और सौर उत्पादों में चीन को निर्यात बढ़ाने की दिशा में नई रणनीति पर काम कर रही है।
सरकारी नीतियों का असर, उद्योग को मिला प्रोत्साहन
केंद्र सरकार द्वारा निर्यात बढ़ाने के लिए लागू की गई नीतियों का असर अब दिखाई देने लगा है। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, सोलर और फार्मा सेक्टर को मिले लाभों ने भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाया है। साथ ही, निर्यात संवर्धन परिषदों और वाणिज्य मंत्रालय की पहल से विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन जैसे प्रतिस्पर्धी बाजार में भारतीय उत्पादों का स्वीकार किया जाना, देश की औद्योगिक गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता की पहचान है।
वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका
अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बाद कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत भारत में उत्पादन बढ़ा रही हैं। इससे भारत को न केवल निवेश के रूप में बल्कि निर्यात में भी फायदा हो रहा है। चीन में उत्पादन घटने और लागत बढ़ने के कारण भारत एक विकल्प के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत एशिया का नया विनिर्माण केंद्र बन सकता है, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, और फार्मा सेक्टर में।
निर्यातकों को उम्मीद – रफ्तार बनी रही तो रिकॉर्ड बना सकता है भारत
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि मौजूदा रफ्तार बरकरार रही, तो भारत चालू वित्त वर्ष में चीन को अब तक का सबसे बड़ा निर्यात दर्ज कर सकता है। उद्योग मंडल फिक्की (FICCI) और एसोचैम (ASSOCHAM) ने इसे भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक ताकत का संकेत बताया है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दीर्घकालिक सफलता के लिए भारत को लॉजिस्टिक लागत कम करने, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और निर्यात प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है।
Author: THE CG NEWS
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