
चार दिवसीय पर्व का तीसरा दिन, डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी पूरी
छठ महापर्व का आज तीसरा दिन है, जिसे संध्या अर्घ्य के रूप में मनाया जाता है। आज लाखों श्रद्धालु डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे और भगवान सूर्य देव के साथ-साथ छठी मैया से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। राजधानी रायपुर, पटना, भिलाई, वाराणसी, दिल्ली, लखनऊ और देशभर के घाटों पर भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा है। तालाबों और नदियों के किनारे विशेष साफ-सफाई की गई है, वहीं प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
आज का शुभ मुहूर्त, जानें कब दें संध्या अर्घ्य
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 19 मिनट से लेकर 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इस समय सूर्य देव को जल अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा करने वाले व्रतधारी आज पूरे दिन निर्जला उपवास रखेंगे और शाम को नदी, तालाब या जलाशय में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देंगे। सूर्यास्त के बाद भक्तगण छठी मैया की आरती कर व्रत कथा का श्रवण करेंगे। माना जाता है कि इस समय किया गया अर्घ्य जीवन में खुशहाली, आरोग्यता और समृद्धि लेकर आता है।
पूजा विधि और नियम – सूर्य को जल चढ़ाने का सही तरीका
संध्या अर्घ्य के समय व्रतधारी महिलाओं को साफ कपड़े पहनकर जलाशय में उतरना चाहिए। आमतौर पर महिलाएं पीले या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करती हैं, जिन्हें शुभ माना जाता है। पूजा के लिए बांस की सूप या डलिया में ठेकुआ, केला, नारियल, गन्ना, सिंगाड़ा, नींबू, शकरकंद, और अन्य प्रसाद रखे जाते हैं। इसके बाद सूर्य देव की ओर मुख कर खड़े होकर जल से अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान ‘ॐ सूर्याय नमः’ और ‘छठी मैया की जय’ के जयकारे लगाए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, अर्घ्य देते समय मन में कोई नकारात्मक विचार नहीं लाना चाहिए और व्रत पूरी श्रद्धा के साथ निभाना चाहिए।
छठ महापर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा सूर्य देव और षष्ठी माता को समर्पित है। यह पर्व न सिर्फ धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में इसे अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया संतानों की रक्षा करती हैं और सूर्य देव जीवन में ऊर्जा और शक्ति का संचार करते हैं। इस पर्व का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है और कहा जाता है कि इसकी शुरुआत महाभारत काल में द्रौपदी और पांडवों ने की थी, जब उन्होंने सूर्य देव की आराधना कर राज्य और समृद्धि की कामना की थी।
घाटों पर उमड़ी भीड़, प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम
राजधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर समेत कई जिलों में तालाबों और नदियों के किनारे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। रायपुर के महादेव घाट, तेलीबांधा तालाब और बुढ़ातालाब में प्रशासन ने बैरिकेडिंग, लाइटिंग और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था की है। महिलाओं और बच्चों के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए हैं। वहीं, स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और एनजीओ भी सुरक्षा व्यवस्था में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती के साथ जलाशयों के किनारे गोताखोर भी तैनात किए गए हैं ताकि किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
भक्तों में उत्साह, घर-घर गूंज रहे छठ के गीत
छठ पूजा का वातावरण पूरे प्रदेश में भक्ति और लोक परंपरा से सराबोर है। घर-घर में ‘कांच ही बांस के बहंगिया’, ‘उठू हे सूरज देव’, और ‘छठी मईया आइल बाड़ू अंगना’ जैसे पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं। महिलाएं पूरे उत्साह के साथ पूजा की तैयारी में जुटी हैं। बाजारों में गन्ना, केला, नारियल और पूजा सामग्री की खूब बिक्री हो रही है। लोग अपने-अपने घरों की छतों और आंगनों को दीयों से सजा रहे हैं।
कल होगा उदयमान सूर्य को अर्घ्य, होगा व्रत का समापन
छठ पर्व का समापन कल यानी 28 अक्टूबर की सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। व्रतधारी महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर जलाशय जाएंगी और सूर्य देव को जल अर्पित कर परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारायण करेंगी। माना जाता है कि जो श्रद्धा और सच्चे मन से छठ मैया की आराधना करता है, उसके जीवन में सुख, सौभाग्य और संतोष बना रहता है।
निष्कर्ष – आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का पर्व
छठ पूजा केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मसंयम और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस पर्व में सूरज की उपासना के साथ जल, मिट्टी और वायु के तत्वों की पूजा की जाती है। यही कारण है कि यह त्योहार न केवल भारत में बल्कि नेपाल, मॉरीशस, त्रिनिदाद और अन्य देशों में बसे भारतीय समुदायों द्वारा भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। आज संध्या अर्घ्य के साथ छठ का पवित्र वातावरण पूरे देश में श्रद्धा, शांति और सकारात्मकता का संदेश दे रहा है।
Author: THE CG NEWS
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