बच्चों को कब से खिलाना शुरू करें अंडा और नॉनवेज: डॉक्टरों ने बताया सही एज और सावधानियां

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अक्सर माता-पिता के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर बच्चों को अंडा या नॉनवेज कब से देना शुरू करना चाहिए। कई लोग डरते हैं कि जल्दी देने पर एलर्जी या पाचन संबंधी समस्या हो सकती है, जबकि कुछ लोग मानते हैं कि प्रोटीन के लिए जल्द शुरू करना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय और सही मात्रा में दिए गए अंडे और नॉनवेज बच्चे की ग्रोथ के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

डॉक्टरों की राय: कब से शुरू करें अंडा और नॉनवेज

बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, जब बच्चा छह महीने का हो जाए और धीरे-धीरे मां के दूध के साथ बाहरी आहार यानी weaning food लेना शुरू करे, तब से प्रोटीन युक्त आहार को धीरे-धीरे शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अंडा और नॉनवेज देने से पहले बच्चे की पाचन क्षमता और एलर्जी इतिहास को ध्यान में रखना जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं कि आमतौर पर आठ से नौ महीने की उम्र में अंडे की जर्दी दी जा सकती है, लेकिन सफेद भाग यानी एग व्हाइट देने से पहले एक साल का इंतजार करना बेहतर होता है, क्योंकि यह भाग एलर्जी का कारण बन सकता है।

अंडे से शुरू करें, फिर बढ़ाएं नॉनवेज

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में बच्चे को उबला हुआ अंडे की जर्दी देना सबसे अच्छा तरीका है। इसमें मौजूद प्रोटीन, आयरन, विटामिन और हेल्दी फैट्स बच्चे की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। जब बच्चा इसे आसानी से पचाने लगे और किसी तरह की एलर्जी न दिखे, तो धीरे-धीरे चिकन या फिश जैसी हल्की नॉनवेज आइटम को प्यूरी या सूप के रूप में दिया जा सकता है। ध्यान रहे कि मीट को बहुत ज्यादा मसालेदार या तला-भुना न बनाएं, क्योंकि बच्चे की पाचन प्रणाली अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती।

किस उम्र में कौन सा नॉनवेज देना सही

डॉक्टरों के अनुसार, 9 से 12 महीने की उम्र में बच्चे को उबला या भाप में पका हुआ चिकन देना शुरू किया जा सकता है। मछली देने के लिए 12 से 18 महीने की उम्र आदर्श मानी जाती है, लेकिन उसमें कांटा बिल्कुल न हो। रेड मीट यानी बकरी या भेड़ का मांस देने से पहले दो साल का इंतजार करना चाहिए, क्योंकि यह भारी होता है और पचने में कठिनाई हो सकती है। इन सभी खाद्य पदार्थों को पहले कम मात्रा में दें और बच्चे की प्रतिक्रिया पर नजर रखें।

ध्यान रखें एलर्जी और पाचन के संकेत

अगर बच्चे को अंडा या नॉनवेज खाने के बाद स्किन पर दाने, उल्टी, दस्त या सूजन जैसी समस्या दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह एलर्जी का संकेत हो सकता है। शुरुआत में बहुत कम मात्रा में दें और एक बार में सिर्फ एक ही नया फूड आइटम शामिल करें ताकि यदि कोई रिएक्शन हो तो कारण पहचानना आसान हो। बच्चे को जबरदस्ती न खिलाएं, बल्कि धीरे-धीरे स्वाद और टेक्सचर की आदत डालने दें।

पोषण के फायदे: क्यों जरूरी है अंडा और नॉनवेज

अंडा और नॉनवेज दोनों ही बच्चों के विकास के लिए अत्यंत लाभदायक हैं। इनमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों और ऊतकों की ग्रोथ में मदद करता है। अंडे की जर्दी में मौजूद कोलीन दिमाग के विकास के लिए फायदेमंद होता है। वहीं, चिकन और मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड, आयरन और जिंक होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा, ये फूड्स बच्चों की भूख को नियंत्रित रखते हैं और एनर्जी लेवल बनाए रखते हैं।

निष्कर्ष

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को अंडा और नॉनवेज देना किसी भी स्थिति में गलत नहीं है, बस इसका समय और तरीका सही होना चाहिए। छह महीने के बाद धीरे-धीरे सॉलिड फूड की शुरुआत करते हुए नौ महीने से अंडे की जर्दी और एक साल के बाद नॉनवेज शुरू करना उचित माना जाता है। अगर बच्चा किसी भी तरह की एलर्जी न दिखाए तो यह आहार उसकी ग्रोथ और सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है।

सारांश रूप में, बच्चों को अंडा और नॉनवेज देना उनके शरीर और दिमाग के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन इसे हमेशा डॉक्टर की सलाह और धीरेधीरे बढ़ती मात्रा में देना चाहिए।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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