छत्तीसगढ़ में 5 हजार शिक्षक भर्ती पर भड़का विरोध: बेरोजगार युवाओं ने कहा- 57 हजार पदों की गारंटी थी, अब सिर्फ 5 हजार पर भर्ती कर रही सरकार

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छत्तीसगढ़ में 5 हजार शिक्षक भर्ती की घोषणा पर तीखा विरोध

छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में उत्पन्न एक विवाद ने राज्य सरकार के खिलाफ बेरोजगार शिक्षक एवं शिक्षक-संघों में गहरी नाराजगी जगा दी है। राज्य में घोषणा की गई थी कि लगभग 57 हजार शिक्षक पदों की भर्ती की जाएगी, परन्तु बीते दिनों सरकार ने केवल 5 000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

विरोध का प्रारंभ

प्रांतीय स्तर पर सक्रिय शिक्षक भर्ती साझा मंच ने अपने आंदोलन के चलते राजनांदगाँव-दुर्ग क्षेत्र में स्थित शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव किया। उनका तर्क है कि यह बहुप्रतीक्षित भर्ती वादा सरकारी भरोसे को क्षति पहुँचाने वाला है। दीपक बैज, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे बेरोजगार युवाओं के साथ सीधा धोखा बताया और कहा कि चुनाव के समय “मोदी की गारंटी” के तहत 57 000 शिक्षकों की भर्ती का वादा किया गया था, लेकिन अब सिर्फ 5 000 पदों की घोषणा हो रही है, जो कि वादाखिलाफी है।

भर्ती संख्या-विरोध एवं शिक्षा व्यवस्था पर असर

संघ ने अपनी मांग-पत्र में बताया है कि राज्य की शिक्षा प्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित है। उनके अनुसार, हजारों सरकारी स्कूल शिक्षक-शून्य चल रहे हैं या एक ही शिक्षक से संचालित हो रहे हैं, जिससे लाखों विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। इसी लिए उन्होंने यह दावा किया है कि यदि वादा किया गया 57 000 पदों की भर्ती नहीं होगी तो शिक्षा के मूल ढाँचे को बड़ा आघात लगेगा।

इसके अतिरिक्त, संघ ने सरकार द्वारा अपनाई गई युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइज़ेशन) नीति की कड़ी आलोचना की है। उनका आरोप है कि इस नीति के तहत लगभग 10 463 सरकारी स्कूलों को बंद करने और 44 000 से अधिक शिक्षकीय पदों को समाप्त करने का प्रस्ताव है, जो कि शिक्षा के भविष्य को अंधकार में धकेलने जैसा है। इस प्रकार, भर्ती की संख्या कम होने के साथ-साथ पदों में कटौती व स्कूल विलय जैसी प्रक्रियाएँ शिक्षकों, विद्यालयों एवं छात्रों के हित के विरुद्ध हैं।

प्रमुख प्रतिदावों की रूपरेखा

मंच ने सरकारी वादों के अनुपालन हेतु निम्नलिखित तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहले, तुरंत 57 000 शिक्षकों की भर्ती शुरू की जाए और यह भर्ती मौजूदा वित्तीय वर्ष में पूरी हो। दूसरे, इस भर्ती को नए परीक्षा कैलेंडर में शामिल किया जाए, ताकि आवेदनकर्ता व परीक्षा तिथि заранее सुनिश्चित हो। तीसरे, युक्तियुक्तकरण एवं स्कूल मर्ज नीति तुरंत वापस ली जाए तथा प्रत्येक स्कूल में कला एवं व्यायाम शिक्षक अनिवार्य रूप से तैनात किए जाएँ। साथ ही 14 वर्षों से लंबित कला संकाय व्याख्याताओं (हिंदी, संस्कृत, राजनीति, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र) की भर्ती शीघ्र प्रारंभ हो, यह भी मांग का हिस्सा है।

सरकार-विभागीय प्रतिक्रिया एवं आगे की चुनौतियाँ

शिक्षा विभाग ने बताया है कि यह 5 000 पदों की भर्ती पहली चरण की है, जिसे बाद के चरणों में बढ़ाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में स्कूलों की संख्या, छात्र-शिक्षक अनुपात, शिक्षकों का स्थानांतरण व संसाधनों का संतुलन जैसे कई कारक इसे प्रभावित करते हैं। हालांकि, विरोध में शामिल शिक्षकों व बेरोजगार युवाओं का कहना है कि ये बहाने हैं और वास्तविक समस्या यह है कि सरकार ने पहले वादा किया गया संख्यात्मक लक्ष्य पूरा नहीं किया

इसके अतिरिक्त, युक्तियुक्तकरण नीति के कारण उन जिलों में जहाँ विद्यालयों की संख्या कम है या अनिरूप छात्र-रूप से कमी थी, वहाँ स्कूलों का विलय होने लगा है, जिससे स्थानीय स्तर पर शिक्षा तक पहुँच प्रभावित हो रही है। इस स्थिति में भविष्य में शिक्षा-सेवा संकाय की कमी, शिक्षक-विभाजन असंतुलन और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती का मामला सिर्फ रोजगार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षासाधन, शिक्षकसंख्या, स्कूलसंरचना और विद्यार्थियों की गुणवत्ता से जुड़ा एक समग्र प्रश्न बन गया है। यदि सरकार समयबद्ध तरीके से वादे को पूरा न कर पाए, तो न सिर्फ बेरोजगार युवाओं में आशा टूटेगी बल्कि राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था भी अपने ढर्रे से विचलित हो सकती है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण होगा कि सरकार व संबंधित विभाग पारदर्शिता, संख्याविस्तार, और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करें ताकि छत्तीसगढ़ में शिक्षा तथा रोजगार दोनों ही क्षेत्रों में संतुलन बनी रहे।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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