
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कोगवार प्राइमरी स्कूल के एक सहायक शिक्षक द्वारा बच्चों को अंग्रेजी की गलत स्पेलिंग पढ़ाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में शिक्षक ‘Ear’ की जगह ‘Eare’, ‘Nose’ की जगह ‘Noge’ और ‘Eye’ की जगह ‘Iey’ जैसे गलत शब्द लिखकर बच्चों को पढ़ाते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सामने आते ही शिक्षा विभाग हरकत में आ गया और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने शिक्षक को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।
वीडियो वायरल—बच्चों को गलत स्पेलिंग पढ़ा रहा था शिक्षक
इस पूरे मामले में आरोपी शिक्षक का नाम प्रवीण टोप्पो है, जो कोगवार प्राइमरी स्कूल में सहायक शिक्षक (एलबी) के पद पर पदस्थ हैं। वायरल वीडियो में वह ब्लैकबोर्ड पर अंग्रेजी के मूलभूत शब्दों की गलत स्पेलिंग लिखकर बच्चों से दोहराने को कह रहे हैं। वीडियो में साफ दिखता है कि जहाँ ‘Sunday’ होना चाहिए, वहाँ ‘Sanday’ लिखा हुआ है। वहीं ‘Wednesday’ की जगह ‘Wensday’ लिखा गया है।
इसके बाद शिक्षक बच्चों को अंग्रेजी के बॉडी पार्ट्स की स्पेलिंग पढ़ाने लगते हैं और Nose की जगह ‘Noge’, Ear की जगह ‘Eare’, Eye की जगह ‘Iey’ बोलते हैं। बच्चे मासूमियत से वही गलत स्पेलिंग दोहराते हुए कापियों में लिखते भी नजर आ रहे हैं। यही नहीं, Father, Mother, Brother और Sister जैसे बेहद सामान्य शब्दों की भी गलत स्पेलिंग बोर्ड पर लिखी गई पाई गई।
वीडियो में क्लासरूम में मौजूद एक व्यक्ति पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड करता है। इसके वायरल होने के बाद अभिभावकों से लेकर ग्रामीणों तक में गुस्सा है कि बच्चों को गलत आधार मिल रहा है और इससे उनके भविष्य पर सीधा असर पड़ेगा।
स्कूल की स्थिति उजागर: 42 बच्चे, 2 शिक्षक… एक के खिलाफ शराब पीकर स्कूल आने का आरोप
कोगवार प्राइमरी स्कूल में कुल 42 बच्चे पढ़ते हैं और कक्षा पहली से पांचवीं तक यहीं संचालित होती है। स्कूल में केवल दो शिक्षक हैं—प्रवीण टोप्पो और कमलेश पंडो। ग्रामीणों और अभिभावकों ने बताया कि शिक्षक कमलेश पंडो अक्सर शराब पीकर स्कूल आते हैं, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित होती है।
अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चे ऐसे स्कूल में क्या सीख पाएंगे, जहाँ एक शिक्षक गलत स्पेलिंग पढ़ाता है और दूसरा नशे की हालत में स्कूल में प्रवेश करता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि दोनों शिक्षकों की शिकायत शिक्षा विभाग और पंचायत स्तर पर कई बार की गई है, लेकिन किसी अधिकारी ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूलों की निगरानी के लिए पदस्थ CAC भी कभी गंभीरता से निरीक्षण नहीं करता। केवल कागजी खानापूर्ति कर ली जाती है, और इसी लापरवाही का परिणाम है कि शिक्षक अपनी मनमर्जी से स्कूल में व्यवहार कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया—DEO ने जारी किया नोटिस, मांगा स्पष्टीकरण
जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि वीडियो में शिक्षक प्रवीण टोप्पो द्वारा बच्चों को गलत स्पेलिंग पढ़ाना बेहद गैरजिम्मेदाराना कृत्य है और इससे न सिर्फ बच्चों की शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ता है, बल्कि जिले की छवि भी धूमिल होती है।
DEO ने प्रवीण टोप्पो को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक का जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो विभागीय कार्रवाई अनिवार्य है। साथ ही, शराब के नशे में स्कूल आने वाले शिक्षक के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अभिभावकों में रोष—मांगी कार्रवाई और स्कूल में नए शिक्षक
वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों का कहना है कि वे नहीं चाहते कि उनके बच्चों का भविष्य ऐसे शिक्षकों के हाथों में रहे, जिन्हें न तो विषय की समझ है और न ही अनुशासन का पालन। अभिभावकों ने कहा कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन जब कार्रवाई नहीं हुई तो किसी ने वीडियो रिकॉर्ड कर सच्चाई दुनिया के सामने रख दी।
ग्रामीणों और माता-पिता ने मांग की है कि दोनों शिक्षकों को हटाकर स्कूल में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों को सही शिक्षा मिल सके और उनका भविष्य सुरक्षित रहे।
शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल—अनुभवहीनता और निगरानी की कमी उजागर
यह मामला केवल एक वीडियो या एक शिक्षक की गलती नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण स्कूलों में कमजोर निगरानी और शिक्षकों की आवश्यक ट्रेनिंग की कमी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंग्रेजी जैसे विषय को पढ़ाने के लिए शिक्षक को बुनियादी स्तर पर सक्षम होना चाहिए। यदि शिक्षक ही गलत पढ़ाएंगे, तो बच्चे प्रारंभिक उम्र से ही गलत आधार पर शिक्षा प्राप्त करेंगे।
यह घटना शिक्षा विभाग के लिए चेतावनी है कि स्कूल निरीक्षण, शिक्षक प्रशिक्षण और नियुक्ति मानकों में सुधार अनिवार्य है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सख्त मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
Author: THE CG NEWS
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