
अगर आप हाल ही में भूलने की समस्या, थकान, चक्कर, कमजोरी या हाथ-पैरों में झनझनाहट महसूस कर रहे हैं, तो इसे सामान्य गलती मानकर अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे लक्षण अक्सर विटामिन B12 की कमी की ओर इशारा करते हैं, और यह कमी आजकल युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि B12 शरीर के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है, और इसकी कमी दिमाग, नसों और खून की सेहत पर सीधा असर डालती है। कई बार लोग महीनों तक इस कमी से जूझते रहते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि बढ़ती भूलने की समस्या का कारण यही विटामिन है।
क्यों बढ़ रही है विटामिन B12 की कमी, डॉक्टरों ने बताया मुख्य कारण
डॉक्टरों के मुताबिक, विटामिन B12 की कमी भारत में तेजी से बढ़ने के पीछे खानपान एक बड़ा कारण है। शाकाहारी भोजन में B12 प्राकृतिक रूप से बहुत कम मात्रा में होता है, वहीं फास्ट फूड, जंक फूड और प्रोसेस्ड डाइट पर बढ़ती निर्भरता ने भी इस स्थिति को खराब किया है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पेट में बनने वाला एक प्रोटीन “इंट्रिंसिक फैक्टर” B12 को अवशोषित करने में मदद करता है, लेकिन गैस्ट्रिक समस्याएं, एसिडिटी की दवाएं, क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस, और कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन इस प्रक्रिया को कमजोर कर देता है।
कई युवा लंबे समय तक तनाव, अनियमित नींद और गलत खाने की आदतों के कारण इस कमी के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, “अगर आपकी याददाश्त में कमी, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, या काम में ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत B12 की जांच कराएं।”
कमी से हो सकता है न्यूरोलॉजिकल डैमेज, लक्षणों को हल्के में न लें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन B12 की कमी शरीर में कई गंभीर समस्याओं को जन्म देती है। शुरुआत में रोगियों को सिर्फ भूलने की समस्या, हाथ-पैरों में झनझनाहट या कमजोरी महसूस होती है, लेकिन अगर इसे समय रहते ठीक न किया जाए तो यह नसों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि कम B12 से बनने लगता है “मेगालोब्लास्टिक एनीमिया,” जिसमें रक्त कोशिकाएं असामान्य रूप से बड़ी और कमजोर हो जाती हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है और लोगों को हल्की-सी मेहनत पर भी चक्कर, सीने में बेचैनी और सांस फूलने की शिकायत होती है।
इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। कम B12 वाले मरीजों में अवसाद, घबराहट, ब्रेन फॉग और मूड डिसऑर्डर के मामले बढ़ते देखे गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, “अगर कमी लंबी चली तो कुछ मरीजों में चलने-फिरने में संतुलन बिगड़ जाता है और हाथ-पैरों में कमजोरी इतनी बढ़ जाती है कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं।”
कैसे पता चले कि शरीर में विटामिन B12 कम है, कौन-सी जांच कराएं
डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर व्यक्ति किसी भी प्रकार की भूलने की समस्या, लगातार थकान, भूख में कमी, त्वचा का पीला पड़ना, या नसों से जुड़े लक्षण महसूस करे, तो तुरंत ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए।
B12 का सामान्य स्तर 200–900 pg/mL के बीच माना जाता है। 200 से कम स्तर को कमी की स्थिति माना जाता है, जबकि 300 के आसपास के स्तर को ‘लो नॉर्मल’ बताया जाता है और ऐसे मामलों में भी डॉक्टर सप्लीमेंट लेने का सुझाव देते हैं।
कुछ मामलों में डॉक्टर “Methylmalonic Acid (MMA)” टेस्ट या “Homocysteine” टेस्ट भी करवाते हैं, क्योंकि ये शरीर में चल रहे वास्तविक मेटाबॉलिक बदलावों को बेहतर दिखाते हैं।
उपचार, सप्लीमेंट और डाइट: क्या कहते हैं डॉक्टर
विशेषज्ञों का कहना है कि B12 की कमी का इलाज बेहद आसान है और समय पर शुरू किया जाए तो नुकसान पूरी तरह से ठीक हो सकता है। हल्की कमी के मामलों में डॉक्टर आमतौर पर गोली या कैप्सूल के रूप में सप्लीमेंट देते हैं, जिन्हें कुछ हफ्तों तक नियमित रूप से लेना पड़ता है।
गंभीर कमी वाले मरीजों को इंजेक्शन दिया जाता है, जो नसों को तुरंत जरूरी पोषण प्रदान करता है और कई मरीजों में 2–3 हफ्तों में सुधार देखा जाता है।
डॉक्टर बताते हैं कि डाइट में बदलाव भी बेहद जरूरी है। B12 के अच्छे स्रोतों में दूध, दही, चीज़, पनीर, अंडा, मछली, चिकन, फोर्टिफाइड सीरियल और सोया दूध शामिल हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, “अगर आप शाकाहारी हैं, तो आपको नियमित रूप से फोर्टिफाइड फूड या सप्लीमेंट लेना चाहिए, क्योंकि प्राकृतिक स्रोत सीमित हैं।”
अंत में डॉक्टर यही सलाह देते हैं कि छोटी–छोटी भूलों को सामान्य मानकर टालना सही नहीं है। B12 की कमी भारत में आम है लेकिन समय पर जांच और इलाज से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए अगर आप भी हाल में भूलने या कमजोरी की समस्या महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत अपनी जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट शुरू करें।
Author: THE CG NEWS
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