भारत रूस से क्रूड ऑयल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना: अक्टूबर में 22 हजार करोड़ का इम्पोर्ट, दिसंबर में दिखेगा ट्रंप प्रतिबंधों का असर

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भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात अक्टूबर महीने में बढ़ाकर लगभग 2.5 बिलियन डॉलर यानी करीब 22.17 हजार करोड़ रुपए कर दिया है। यह लगातार दूसरा महीना था जब भारत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आपत्तियों के बावजूद, रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर रहा। यह जानकारी हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के जरिए सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी दबावों के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है, हालांकि दिसंबर में अमेरिकी प्रतिबंधों का असर दिखाई देने की संभावना है।

चीन पहले नंबर पर, भारत दूसरे पर

रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अक्टूबर में 3.7 बिलियन डॉलर (करीब 32.82 हजार करोड़ रुपए) मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा और पहले स्थान पर रहा। वहीं, रूस से भारत का कुल फॉसिल फ्यूल आयात 3.1 बिलियन डॉलर (करीब 27.49 हजार करोड़ रुपए) पहुंचा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि रूस, भारत का सबसे प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार बढ़ रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि भारत की तुलना में चीन का ऊर्जा आयात काफी बड़ा रहा है, लेकिन भारत द्वारा की गई खरीद ने रूस के कच्चे तेल की वैश्विक मार्केट में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनाए रखी। हालांकि अमेरिका द्वारा रूस के दो बड़े तेल निर्यातकों—रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए नए प्रतिबंधों का प्रभाव दिसंबर के आंकड़ों में दिखाई दे सकता है।

रूस से कोयला और ऑयल प्रोडक्ट्स की भी भारी खरीदारी

रूस से सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि कोयला और ऑयल प्रोडक्ट्स का आयात भी भारत और चीन दोनों ने बढ़ाया है।

•चीन ने पिछले महीने 760 मिलियन डॉलर मूल्य का कोयला खरीदा।

•भारत ने अक्टूबर में 351 मिलियन डॉलर का रूसी कोयला और 222 मिलियन डॉलर मूल्य के ऑयल प्रोडक्ट्स का आयात किया।

वहीं तुर्की रूसी ऑयल प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। उसने 957 मिलियन डॉलर मूल्य के प्रोडक्ट्स, जिसमें बड़ी मात्रा डीजल की थी, खरीदे। यह दर्शाता है कि रूस के ऊर्जा निर्यात पर लगी वैश्विक पाबंदियाँ अभी भी कई देशों की खरीद पर रोक नहीं लगा पा रही हैं।

यूरोपीय यूनियन ने सबसे अधिक गैस खरीदी

यूरोपीय संघ रूसी गैस का सबसे बड़ा खरीदार रहा। उसने अक्टूबर में 824 मिलियन डॉलर मूल्य की LNG और पाइपलाइन गैस और 31.1 मिलियन डॉलर का रूसी कच्चा तेल खरीदा। यह स्थिति संकेत देती है कि भले ही यूरोप रूस पर निर्भरता कम करने की बात करता रहा है, लेकिन ऊर्जा जरूरतों ने कई बार इन प्रयासों को सीमित कर दिया।

अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत में हलचल

अमेरिका के हालिया प्रतिबंधों के बाद भारत ने दिसंबर में रूस से तेल खरीद में बड़ा बदलाव किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की पांच प्रमुख तेल रिफाइनर कंपनियों ने दिसंबर के लिए कोई नया ऑर्डर जारी नहीं किया है। ये कंपनियां इस साल अब तक भारत के रूसी आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा रही हैं।

जिन कंपनियों ने दिसंबर के लिए ऑर्डर रोक दिए हैं उनमें शामिल हैं—

•रिलायंस इंडस्ट्रीज

•भारत पेट्रोलियम (BPCL)

•हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)

•मंगलौर रिफाइनरी

•HPCL-मित्तल एनर्जी

दूसरी ओर, इंडियन ऑयल (IOC) और नयारा एनर्जी दिसंबर के लिए रूसी तेल खरीद रही हैं। IOC गैर-प्रतिबंधित सप्लायरों से खरीद कर रही है, जबकि नयारा, जिसमें रूस की रोसनेफ्ट की 49% हिस्सेदारी है, रूस पर निर्भर है।

भारत वैकल्पिक सप्लायर्स की तलाश में

अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख किया है।

•IOC ने अमेरिका और अन्य क्षेत्रों से जनवरी–मार्च के लिए 2.4 करोड़ बैरल तेल खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है।

•हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी जनवरी के लिए अमेरिका और पश्चिम एशिया से 40 लाख बैरल तेल खरीदा है।

सऊदी अरामको और अबू धाबी की ADNOC ने भारतीय अधिकारियों से मिलकर भारत को स्थिर सप्लाई देने का आश्वासन दिया है। ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका-भारत व्यापार वार्ताओं और प्रतिबंधों के चलते भारत को वैश्विक मार्केट में संतुलन साधना पड़ रहा है।

भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ का दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर पहले ही कुल 50% टैरिफ लगा चुके हैं।

•25% रेसीप्रोकल टैरिफ (जैसे को तैसा)

•25% रूस से तेल खरीदने पर विशेष पेनल्टी टैरिफ

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि रूस से भारत की खरीद यूक्रेन युद्ध को फंड करने में मदद करती है। ऐसे में आने वाले महीनों में भारत के ऊर्जा व्यापार पर अमेरिकी दबाव का असर और गहरा हो सकता है।

निष्कर्ष

भारत ने अक्टूबर में रूस से ऊर्जा खरीद में बड़ा इजाफा किया है और वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और बढ़ते टैरिफ के कारण भारत अब वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं की खोज में है। दिसंबर और जनवरी के आंकड़े यह तय करेंगे कि भारत रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को किस हद तक जारी रख पाएगा।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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