1400 से अधिक ई-संवर्ग प्राचार्यों का प्रमोशन फिर अटका: काउंसलिंग स्थगित, दावा-आपत्तियों की प्रक्रिया 21 नवंबर तक जारी

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छत्तीसगढ़ में ई-संवर्ग के 1400 से अधिक प्राचार्यों की पोस्टिंग प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। रविवार देर रात लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने आगामी 17 नवंबर से प्रस्तावित काउंसलिंग को स्थगित करने की घोषणा की, जिससे पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों में निराशा बढ़ गई है। संचालनालय ने बताया कि कई पदोन्नत प्राचार्यों ने दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, इसी कारण यह निर्णय लिया गया। अब 17 से 19 नवंबर तक दावा-आपत्तियाँ ली जाएंगी, जिनकी जांच के बाद 21 नवंबर को समिति रिपोर्ट सौंपेगी और उसके बाद ही नई काउंसलिंग तिथि घोषित की जाएगी।

काउंसलिंग की तैयारी पूरी थी, लेकिन प्रक्रिया फिर बीच में रुकी

ज्ञात हो कि प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया 30 अप्रैल 2025 को पूर्ण हो चुकी थी, लेकिन नोटिफाइड नियमों और अनुभव अवधि से जुड़ी न्यायालयीन बहस के कारण यह मामला महीनों तक लंबित रहा। हाईकोर्ट में निर्णय आने और कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद 17 नवंबर 2025 से काउंसलिंग प्रारंभ होनी थी। DPI कार्यालय में ब्लॉक-स्तर तक डेटा वेरीफिकेशन पूरा हो चुका था और काउंसलिंग व्यवस्था भी अंतिम रूप ले चुकी थी। परंतु दावा-आपत्तियों के नए चरण ने पूरी प्रक्रिया को पुनः रोक दिया है, जिससे ई-संवर्ग में पदोन्नत प्राचार्यों की नियुक्ति फिर टल गई।

दावा-आपत्तियों के लिए बनी समिति, 21 नवंबर को रिपोर्ट

संचालनालय ने दावा-आपत्तियों के परीक्षण के लिए एक विशेष समिति गठित की है। इसमें उप संचालक बीएल देवांगन प्रभारी अधिकारी होंगे, जबकि सदस्य के रूप में सहायक संचालक एचसी दिलावर, सहायक संचालक रामजी पाल, सहायक वर्ग-3 के सूरज यादव और कृष्ण कुमार मेश्राम शामिल किए गए हैं। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह सभी प्राप्त आपत्तियों का परीक्षण कर 21 नवंबर को संचालक को विस्तृत रिपोर्ट सौंपे। इस रिपोर्ट के आधार पर काउंसलिंग की नई तिथि तय होगी, जिसका नोटिफिकेशन अलग से जारी किया जाएगा।

प्राचार्य पदों में शिक्षाकर्मियों को शामिल करने की लंबी लड़ाई

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन (CGTA) लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि प्राचार्य पदोन्नति में शिक्षाकर्मी और एलबी संवर्ग को उचित स्थान दिया जाए। पहले शासन ने 25% पद शिक्षाकर्मियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया था, लेकिन इसका सही क्रियान्वयन नहीं हो पाया। धीरे-धीरे मामला न्यायालय तक पहुंच गया जहां अनुभव अवधि, वरिष्ठता सूची और डीपीसी के नियमों को लेकर विस्तृत सुनवाई हुई। CGTA ने एलबी संवर्ग को बाहर रखकर जारी डीपीसी को निरस्त कराने में सफलता भी हासिल की, लेकिन वन-टाइम रिलेक्सेशन का लाभ भी शिक्षाकर्मियों तक पूरी तरह नहीं पहुँच सका।

लंबी कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चली और अंततः विभाग ने स्वीकार किया कि एलबी संवर्ग को शामिल किए बिना प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। यहीं से प्रक्रिया को नई दिशा मिली।

नई सरकार के बाद पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी, फिर भी बाधाएं बरकरार

नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री, तत्कालीन शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी और संचालक दिव्या मिश्रा के साथ लगातार बैठकें हुईं। वरिष्ठता सूची का अंतिम प्रकाशन और डीपीएसी प्रस्ताव तेजी से आगे बढ़ा। DPI की टीम—जिसमें ऋतुराज रघुवंशी, आशुतोष चावरे, एएन बंजारा शामिल थे—ने ब्लॉक-लेवल वेरिफिकेशन पूरा कर काउंसलिंग तैयारी सुनिश्चित की। काउंसलिंग में टी-संवर्ग की भांति 2:1:1 का रेशियो लागू होना था, जिससे एलबी संवर्ग को बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद थी। लेकिन प्रक्रिया फिर स्थगित होने से सभी संवर्गों में असंतोष बढ़ा है।

टी-संवर्ग के प्राचार्यों को पोस्टिंग, ई-संवर्ग के अटके—एक ही नियम, दो परिस्थितियां

इस वर्ष एक ही भर्ती नियम (5 मई 2019) के तहत 30 अप्रैल को दोनों संवर्गों—टी और ई—के प्राचार्यों को पदोन्नति दी गई थी। चयन प्रक्रिया भी एक ही थी, फिर भी स्थिति भिन्न रही। टी-संवर्ग के पदोन्नत प्राचार्यों की पोस्टिंग 29 अगस्त को कर दी गई, जबकि ई-संवर्ग के प्राचार्य अब भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। यह असमानता विभागीय प्रबंधन की धीमी प्रक्रिया और न्यायालयीन अड़चनों को उजागर करती है, जिसका असर राज्यभर की शालाओं पर दिख रहा है।

126 पदोन्नत प्राचार्य बिना पोस्टिंग ही सेवानिवृत्त, 24 और होंगे रिटायर

स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 अप्रैल को पदोन्नत हुए 126 प्राचार्य बिना पोस्टिंग संभाले ही सेवानिवृत्त हो गए। इस माह करीब 24 और प्राचार्यों के रिटायर होने की संभावना है। इससे न सिर्फ शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, बल्कि प्रशासनिक ढांचा भी कमजोर हो रहा है।

10 साल से शालाओं में प्राचार्य की भारी कमी, गुणवत्ता पर असर

राज्य में पिछले एक दशक से हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्राचार्य पदों की भारी कमी है। लगभग 80% शालाएं बिना स्थायी प्राचार्य के चल रही हैं। इससे शैक्षणिक गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है—बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों में बाधा, निरीक्षण और मॉनिटरिंग में कमी, शाला प्रबंधन में अव्यवस्था और छात्रों की प्रगति पर असर साफ दिखाई देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही प्राचार्य पोस्टिंग पूरी होगी, शैक्षणिक गुणवत्ता और व्यवस्थापन में बड़ा सुधार दिखाई देगा।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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