असम में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिविजन की प्रक्रिया शुरू: 10 फरवरी 2026 को जारी होगी अंतिम सूची, 12 राज्यों में 97.52% फॉर्म बांटे जा चुके

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। चुनाव आयोग ने सोमवार को राज्य में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिविजन का औपचारिक आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के बाद राज्यभर में घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन का काम 22 नवंबर से 20 दिसंबर तक चलेगा, जबकि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन 27 दिसंबर को किया जाएगा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2026 की क्वालिफाइंग डेट तक जिन भी नागरिकों की आयु 18 वर्ष हो जाएगी, उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे। अंतिम वोटर लिस्ट 10 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।

स्पेशल रिविजन के बीच बढ़ा BLO पर काम का दबाव, दो राज्यों में आत्महत्या की घटनाएं सामने आईं

स्पेशल रिविजन और SIR प्रक्रिया के बढ़ते दबाव के बीच केरल और राजस्थान में दो बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की आत्महत्या ने चिंता बढ़ा दी है। केरल के कन्नूर में सरकारी स्कूल के कर्मचारी और BLO बने अनीश जॉर्ज (44) ने रविवार को फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों ने आरोप लगाया कि SIR के भारी दबाव और लगातार काम के बोझ के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। उधर राजस्थान के जयपुर में मुकेश कुमार जांगिड़ (48), जो एक सरकारी शिक्षक और BLO थे, उन्होंने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। उनकी जेब से मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि अधिकारी लगातार दबाव बना रहे थे और सस्पेंड करने की धमकी दे रहे थे।

कोलकाता में भी एक BLO को गंभीर तनाव के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी पत्नी ने बताया कि SIR का काम समय पर निपटाने का अत्यधिक दबाव उन पर मानसिक रूप से भारी पड़ रहा था। लगातार बढ़ते इन मामलों ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की व्यवस्थितता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

IUML ने सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका, कहा— SIR प्रक्रिया और निकाय चुनाव एक साथ नहीं हो सकते

केरल में स्थिति गंभीर होती देख इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर SIR प्रक्रिया को तुरंत रोके जाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि 9 और 11 दिसंबर को राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं, जबकि 4 दिसंबर को SIR का ड्राफ्ट प्रकाशित होना है। IUML ने तर्क दिया कि दोनों प्रक्रियाओं को एक ही समय पर चलाने से निकाय चुनावों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा और प्रशासनिक भ्रम पैदा होगा।

याचिका में यह भी कहा गया है कि BLO और अन्य अधिकारियों को बेहद कम समय में भारी काम सौंप दिया गया है, जबकि निकाय चुनावों की तैयारियों का भी बोझ उन्हीं पर है। पार्टी ने अनुरोध किया है कि कम से कम स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न होने तक SIR को रोका जाए।

12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 49 करोड़ फॉर्म बांटे गए

चुनाव आयोग ने रविवार को बताया कि SIR के दूसरे चरण के तहत 12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 51 करोड़ मतदाताओं में से 49 करोड़ से अधिक को फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का 97.52% है। जिन राज्यों में यह काम तेजी से आगे बढ़ा है उनमें छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं।

इनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। असम के लिए SIR की घोषणा अलग से की गई है, जिसे अब स्पेशल रिविजन के साथ लागू किया जाएगा।

बंगाल में 99.42% कवरेज, 7.61 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचे फॉर्म

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में 4 नवंबर को अभियान शुरू होने के बाद से अब तक 7.61 करोड़ फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ है। यानी रविवार शाम तक 99.42% मतदाताओं को फॉर्म मिल चुके हैं।

अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों, टी गार्डन्स और शहरी स्लम क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए गए, जिससे रिकॉर्ड समय में लगभग सभी मतदाताओं तक पहुंचना संभव हुआ।

केरल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ विरोध, BLO आज राज्यभर में करेंगे काम का बहिष्कार

केरल में BLO की आत्महत्या के बाद राज्यभर के बूथ अधिकारियों ने आज काम का बहिष्कार करने की घोषणा की है। केरल NGO एसोसिएशन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय और जिला कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि 23 साल पहले प्रकाशित पुराने रिकार्ड के आधार पर SIR प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्हें दिन-रात काम करना पड़ रहा है, जबकि पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है।असम में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। चुनाव आयोग ने सोमवार को राज्य में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिविजन का औपचारिक आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के बाद राज्यभर में घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन का काम 22 नवंबर से 20 दिसंबर तक चलेगा, जबकि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन 27 दिसंबर को किया जाएगा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2026 की क्वालिफाइंग डेट तक जिन भी नागरिकों की आयु 18 वर्ष हो जाएगी, उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे। अंतिम वोटर लिस्ट 10 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।

स्पेशल रिविजन के बीच बढ़ा BLO पर काम का दबाव, दो राज्यों में आत्महत्या की घटनाएं सामने आईं

स्पेशल रिविजन और SIR प्रक्रिया के बढ़ते दबाव के बीच केरल और राजस्थान में दो बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की आत्महत्या ने चिंता बढ़ा दी है। केरल के कन्नूर में सरकारी स्कूल के कर्मचारी और BLO बने अनीश जॉर्ज (44) ने रविवार को फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों ने आरोप लगाया कि SIR के भारी दबाव और लगातार काम के बोझ के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। उधर राजस्थान के जयपुर में मुकेश कुमार जांगिड़ (48), जो एक सरकारी शिक्षक और BLO थे, उन्होंने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। उनकी जेब से मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि अधिकारी लगातार दबाव बना रहे थे और सस्पेंड करने की धमकी दे रहे थे।

कोलकाता में भी एक BLO को गंभीर तनाव के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी पत्नी ने बताया कि SIR का काम समय पर निपटाने का अत्यधिक दबाव उन पर मानसिक रूप से भारी पड़ रहा था। लगातार बढ़ते इन मामलों ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की व्यवस्थितता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

IUML ने सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका, कहा— SIR प्रक्रिया और निकाय चुनाव एक साथ नहीं हो सकते

केरल में स्थिति गंभीर होती देख इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर SIR प्रक्रिया को तुरंत रोके जाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि 9 और 11 दिसंबर को राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं, जबकि 4 दिसंबर को SIR का ड्राफ्ट प्रकाशित होना है। IUML ने तर्क दिया कि दोनों प्रक्रियाओं को एक ही समय पर चलाने से निकाय चुनावों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा और प्रशासनिक भ्रम पैदा होगा।

याचिका में यह भी कहा गया है कि BLO और अन्य अधिकारियों को बेहद कम समय में भारी काम सौंप दिया गया है, जबकि निकाय चुनावों की तैयारियों का भी बोझ उन्हीं पर है। पार्टी ने अनुरोध किया है कि कम से कम स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न होने तक SIR को रोका जाए।

12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक 49 करोड़ फॉर्म बांटे गए

चुनाव आयोग ने रविवार को बताया कि SIR के दूसरे चरण के तहत 12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 51 करोड़ मतदाताओं में से 49 करोड़ से अधिक को फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का 97.52% है। जिन राज्यों में यह काम तेजी से आगे बढ़ा है उनमें छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं।

इनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। असम के लिए SIR की घोषणा अलग से की गई है, जिसे अब स्पेशल रिविजन के साथ लागू किया जाएगा।

बंगाल में 99.42% कवरेज, 7.61 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचे फॉर्म

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में 4 नवंबर को अभियान शुरू होने के बाद से अब तक 7.61 करोड़ फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ है। यानी रविवार शाम तक 99.42% मतदाताओं को फॉर्म मिल चुके हैं।

अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों, टी गार्डन्स और शहरी स्लम क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए गए, जिससे रिकॉर्ड समय में लगभग सभी मतदाताओं तक पहुंचना संभव हुआ।

केरल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ विरोध, BLO आज राज्यभर में करेंगे काम का बहिष्कार

केरल में BLO की आत्महत्या के बाद राज्यभर के बूथ अधिकारियों ने आज काम का बहिष्कार करने की घोषणा की है। केरल NGO एसोसिएशन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय और जिला कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि 23 साल पहले प्रकाशित पुराने रिकार्ड के आधार पर SIR प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्हें दिनरात काम करना पड़ रहा है, जबकि पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है।

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Author: THE CG NEWS

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