मोजो मशरूम फैक्ट्री में बाल-मजदूरों से रात-दिन काम, मारपीट और बदसलूकी के आरोप; 104 बच्चों का रेस्क्यू, FIR अब तक नहीं

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रायपुर के खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में है। पिछले पांच महीनों में यह दूसरी बार है जब फैक्ट्री में बाल मजदूरों के शोषण का मामला सामने आया है। 17 नवंबर को यहां से 109 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 68 बच्चियां और 41 बच्चे शामिल थे। बड़े पैमाने पर हुए इस रेस्क्यू के बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है, जिससे जांच प्रक्रिया थम-सी गई है। पुलिस और बाल आयोग के अनुसार, संबंधित विभागों से कार्रवाई के दस्तावेज और साक्ष्य न मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

फैक्ट्री में हालात बेहद खराब, बच्चों से 18-18 घंटे काम

रेस्क्यू किए गए कई बच्चों ने बताया कि उन्हें एक कमरे में 10 से 15 लोगों के साथ ठूंसकर रखा जाता था। सुबह 4–5 बजे उठाकर देर रात तक काम करवाया जाता था। कुछ बच्चे तीन महीने से वहां फंसे थे, तो कुछ छह महीने, एक साल और कुछ तीन-तीन साल से वहां से बाहर ही नहीं निकले थे। बच्चों ने खुलासा किया कि फैक्ट्री में समय पर मजदूरी नहीं दी जाती थी और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। खाना भी दो बार ही दिया जाता था और रहने की सुविधा बेहद खराब थी।

जुलाई में भी हुई थी कार्रवाई, FIR दर्ज पर आरोपी आज तक फरार

इसी फैक्ट्री में जुलाई 2025 में भी छापा मारा गया था, जहाँ से 90 से ज्यादा मजदूरों को रेस्क्यू किया गया था। उस समय FIR तो दर्ज हुई, लेकिन सभी आरोपी आज तक फरार हैं। यह मामला लेबर कोर्ट में लंबित है, परंतु कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाने के कारण फैक्ट्री दोबारा बाल श्रम जैसे गंभीर अपराध में लिप्त पाई गई।

खतरनाक केमिकल के बीच काम करते मिले बच्चे

रेस्क्यू टीम ने बताया कि बच्चे बेहद खतरनाक माहौल में काम कर रहे थे। कई बच्चे बर्फ की सिल्ली उठा रहे थे, तो कई पैकिंग और मिट्टी डालने जैसे कठिन कार्य कर रहे थे। इसके अलावा कुछ बच्चे “फॉर्मलीन” जैसे जहरीले केमिकल का छिड़काव कर रहे थे, जिसका असर वयस्कों पर भी गंभीर होता है। टीम के अधिकारियों ने बताया कि पास जाते ही आंखों में जलन होने लगी थी। अगर बच्चे लंबे समय तक इस केमिकल के संपर्क में रहते, तो उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ भी हो सकती थीं।

कुछ बच्चे पहले भी रेस्क्यू हुए थे, फिर से फंसाए गए

काउंसलिंग के दौरान यह सामने आया कि कई बच्चों को पहले भी जुलाई में बचाया गया था, लेकिन ठेकेदारों ने उन्हें दोबारा नौकरी दिलाने के नाम पर फिर से फैक्ट्री में पहुंचा दिया। रेस्क्यू किए गए बच्चों में अधिकतर असम, झारखंड, ओडिशा, यूपी, एमपी और पश्चिम बंगाल से लाए गए थे। हर राज्य में अलग-अलग ठेकेदार इन्हें सप्लाई कर रहे थे।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई में देरी

AVA के राज्य संयोजक विपिन ठाकुर ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर यह रेस्क्यू किया गया था। उनका कहना है कि फैक्ट्री से जुड़ी फर्म के दस्तावेज मांगने पर भी कंपनी ने उचित जानकारी नहीं दी। इंटरनेट खोज में मोनिका खेतान, विमल खेतान और राणा विश्व प्रताप सिंह के नाम सामने आए, जो फर्म से जुड़े बताए जा रहे हैं। ठाकुर का आरोप है कि चार घंटे थाने में बैठने के बाद भी पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही है।

राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश महामंत्री विक्रांत शर्मा ने भी आरोप लगाया कि जुलाई 2025 में उन्होंने शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करने में पांच दिन लगा दिए। उनका कहना है कि उस समय कड़ी कार्रवाई की जाती, तो फिर से इतने बच्चों का शोषण नहीं होता।

पुलिस का कहना—साक्ष्य और बयानों के बाद होगी कार्रवाई

रायपुर CSP वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि जांच जारी है और कई बच्चों के बयान अभी बाकी हैं। श्रम विभाग और बाल आयोग से भी दस्तावेज और साक्ष्य मांगे गए हैं। जब सभी बयान और सबूत मिल जाएंगे, तब नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जुलाई वाले मामले में जिन आरोपियों पर केस दर्ज था, उनकी तलाश रायपुर से ग्वालियर तक की जा रही है, लेकिन वे अब भी फरार हैं।

फैक्ट्री का असली नाम ‘मारूति फ्रेश फर्म’, संचालक के नाम पर विवाद

जांच में सामने आया है कि मोजो मशरूम नाम से चल रही इस फैक्ट्री का असली नाम मारूति फ्रेश फर्म है, जो उमा श्री राइस मिल के परिसर में संचालित हो रही है। श्रम विभाग के दस्तावेजों में राणा विश्व प्रताप सिंह को फैक्ट्री का नियोजक बताया गया है। AVA ने कई लोगों के नाम शिकायत में शामिल किए हैं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की कॉपी भेजी है।

यह मामला अब गंभीर बाल श्रम, मानवाधिकार उल्लंघन और बंधुआ मजदूरी के रूप में सामने आ चुका है। लेकिन FIR दर्ज न होने से फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई में देरी हो रही है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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Author: THE CG NEWS

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