
हियरिंग लॉस यानी सुनने की क्षमता कमजोर होना अब केवल उम्र से जुड़ी समस्या नहीं रही, बल्कि लाइफस्टाइल, आदतें और गलत सेल्फ-ट्रीटमेंट भी इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं। ENT विशेषज्ञों के अनुसार आज 18 से 40 वर्ष की उम्र वाले युवाओं में भी सुनने की क्षमता घटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई आम आदतें—जैसे लंबे समय तक हेडफोन का उपयोग, तेज आवाज के संपर्क में रहना और कान में घरेलू चीजें डालकर सफाई करना—कान को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
मेडिकल विशेषज्ञ मानते हैं कि हियरिंग लॉस का समय पर इलाज न होने पर यह स्थिति आगे चलकर जीवनभर की परेशानी बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि लोग इसके कारणों, शुरुआती लक्षणों और बचाव के तरीकों को समझें।
1. हेडफोन और ईयरबड्स का अत्यधिक उपयोग
ENT डॉक्टरों के अनुसार हेडफोन और ईयरबड्स आज हियरिंग लॉस के सबसे बड़े कारणों में से एक बन चुके हैं। लगातार 1 घंटे से अधिक समय तक तेज आवाज में गाने सुनना कान के अंदर मौजूद नाजुक सेल्स (hair cells) को नुकसान पहुंचाता है, जो कभी वापस नहीं बनते। 60% तक युवा रोज 3–4 घंटे हेडफोन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 60-60 नियम अपनाएं—यानी आवाज का स्तर 60% से अधिक न रखें और 60 मिनट से ज्यादा लगातार न सुनें।
2. लाउडस्पीकर, DJ, ट्रैफिक और तेज शोर
शादी पार्टियों, धार्मिक आयोजनों, कंसर्ट या ट्रैफिक जाम जैसी जगहों का तेज शोर कान की सुनने की क्षमता पर सीधा प्रभाव डालता है। WHO की गाइडलाइन कहती है कि 85 डेसिबल से ऊपर की आवाज लंबे समय तक सुनना हानिकारक है। भारतीय शहरों में औसत ट्रैफिक शोर 90–115 डेसिबल तक पहुंच जाता है, जो हियरिंग लॉस की वजह बन सकता है।
3. कान में चीजें डालकर सफाई करना
ENT डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लोग कान साफ करने के लिए कॉटन बड्स, हेयर पिन, माचिस की तीली, चाबी, पेन या किसी भी नुकीली चीज का इस्तेमाल न करें। इससे कान के पर्दे (eardrum) पर चोट लग सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कई मामलों में लोग सरसों का तेल, नारियल तेल या घी तक कान में डाल देते हैं, जो माइक्रो-इन्फेक्शन या ऑयल ब्लॉकेज का कारण बनता है।
वे 10 चीजें जो कान में बिल्कुल नहीं डालनी चाहिए:
– कॉटन बड
– हेयर पिन
– माचिस
– चाबी
– पेन या पेंसिल
– किसी भी प्रकार का तेल
– साबुन का पानी
– नींबू का रस या घरेलू नुस्खे
– टिश्यू पेपर
– टूथपिक
डॉक्टरों के अनुसार कान अपने आप साफ होते हैं, और जरूरत होने पर ही ENT विशेषज्ञ से सफाई करवानी चाहिए।
4. लगातार कान में संक्रमण (Ear Infection)
बार-बार सर्दी, फ्लू या साइनस होने से कान में पानी भर जाता है और इन्फेक्शन हो सकता है। यह समय के साथ सुनने की शक्ति को प्रभावित करता है। छोटे बच्चों में Ear Infection हियरिंग लॉस के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है।
5. उम्र बढ़ना
60 वर्ष के बाद उम्र संबंधी सुनने की समस्या (Presbycusis) आम है। इसमें कान के अंदर के सेल्स धीरे-धीरे कमजोर हो जाते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि ऐसे लोग साल में एक बार हियरिंग टेस्ट जरूर कराएं।
6. जेनेटिक कारण
कुछ लोगों में हियरिंग लॉस का जोखिम परिवार में पहले से मौजूद होता है। ऐसे मामलों में बच्चों के जन्म के बाद शुरुआती स्टेज में हियरिंग टेस्ट जरूरी है।
7. मेनिएर रोग और ऑटोइम्यून समस्याएं
कुछ मेडिकल कंडीशन जैसे Menier’s Disease, Autoimmune Inner Ear Disease और Thyroid समस्याएं भी सुनने की क्षमता प्रभावित कर सकती हैं।
8. दवाइयों के साइड-इफेक्ट
कई एंटीबायोटिक, कैंसर की दवाइयां, दर्द निवारक और हाई-डोज मेडिकेशन भी ओटो-टॉक्सिक मानी जाती हैं, यानी ये कान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयां न लें।
9. चोट, हादसा या कान पर जोरदार प्रहार
सिर या कान पर लगने वाली चोट से कान का पर्दा फट सकता है या अंदरूनी नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे हियरिंग लॉस हो सकता है।
10. डायबिटीज, हाई BP और कोलेस्ट्रॉल
इन बीमारियों से खून का प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे कान के अंदर की नसों पर प्रभाव पड़ सकता है। यह अप्रत्यक्ष रूप से सुनने की क्षमता कम कर सकता है।
बचाव के तरीके जो ENT विशेषज्ञ सलाह देते हैं
– तेज आवाज वाली जगहों पर Ear Protection पहनें
– हेडफोन कम समय और कम आवाज में उपयोग करें
– कान में कुछ भी न डालें
– संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
– साल में एक बार हियरिंग टेस्ट कराएं
– स्वस्थ डाइट और लाइफस्टाइल अपनाएं
हियरिंग लॉस एक बढ़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन ENT डॉक्टरों के अनुसार अगर समय रहते सावधानी बरतें, तो यह पूरी तरह रोका जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि “कान जितने नाजुक हैं, उतनी ही सावधानी के हकदार हैं। आवाज़ें जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन गलत आवाज़ें जीवनभर की समस्या बन सकती हैं।”
Author: THE CG NEWS
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