
सर्दियों में जैसे ही मौसम ठंडा होने लगता है, लोग चाय, लड्डू, रोटी और मिठाइयों में गुड़ का इस्तेमाल खूब करने लगते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ही गुड़ को सफेद चीनी से बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम जैसे मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। लेकिन इसकी लोकप्रियता के बीच एक अहम बात अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाती है—गुड़ सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने पर यह शरीर पर कई तरह के नुकसान भी पहुंचा सकता है। हाल ही में कई न्यूट्रिशनिस्ट और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि बढ़ती ठंड के साथ लोग गुड़ का सेवन मात्रा से अधिक करने लगते हैं, जिससे ब्लड शुगर, वजन, पाचन और हार्मोन तक प्रभावित हो सकते हैं।
ज्यादा गुड़ खाने से ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है
गुड़ प्राकृतिक है, लेकिन इसमें ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ की मात्रा काफी अधिक होती है। डायबिटीज मरीजों के लिए यह बड़ी समस्या बन सकती है, क्योंकि अधिक गुड़ खाने से ब्लड शुगर तेजी से ऊपर जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी मध्यम से ऊंचे स्तर का होता है, यानी यह खाना शरीर में तेजी से ग्लूकोज़ में बदल जाता है। ऐसे में ज्यादा सेवन से शरीर पर उसी तरह असर पड़ता है जैसे चीनी से होता है। लगातार अधिक मात्रा में गुड़ का सेवन करते रहने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने की आशंका भी बढ़ सकती है।
पाचन गड़बड़ और एसिडिटी की समस्या
हालांकि गुड़ पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाने पर इसका उल्टा असर भी देखा गया है। अधिक गुड़ गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक, गुड़ शरीर में गर्म तासीर पैदा करता है। अधिक सेवन करने पर यह पित्त को बढ़ा सकता है, जिससे एसिडिटी और हार्टबर्न की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। कुछ लोगों में यह डायरिया या लूज़ मोशन भी ट्रिगर कर सकता है, खासकर उन लोगों में जिनका पाचन तंत्र संवेदनशील हो।
वजन बढ़ने का बड़ा कारण बन सकता है गुड़
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार 100 ग्राम गुड़ में लगभग 380 कैलोरी होती है। यानि थोड़ी-सी मिठास के साथ शरीर में काफी अतिरिक्त कैलोरी चली जाती है। अगर कोई रोजाना गुड़ 40-50 ग्राम से अधिक खा रहा है तो उसके वजन बढ़ने की संभावना काफी ज्यादा हो जाती है। सर्दियों में लोग अक्सर गुड़-तिल के लड्डू, चिक्की और पीनट गुड़ बर्फी जैसी चीजें लगातार खाते रहते हैं, जिससे अनजाने में कैलोरी इनटेक तेजी से बढ़ जाता है। वजन बढ़ने के साथ शरीर में फैट जमा होने लगता है, जो आगे चलकर हृदय रोग, हाई BP और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा देता है।
त्वचा पर मुंहासे और तैलीयपन की परेशानी
गुड़ भले ही प्राकृतिक हो, लेकिन यह शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ाता है, जिससे त्वचा में तेल उत्पादन भी बढ़ सकता है। डर्मेटोलॉजिस्ट बताते हैं कि ज्यादा मिठास, चाहे वह गुड़ से हो या चीनी से, त्वचा में सूजन (इंफ्लेमेशन) बढ़ा देती है। इसका असर चेहरे पर पिंपल्स, दाने और तैलीयपन के रूप में दिख सकता है। खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से एक्ने की समस्या हो, उन्हें गुड़ सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।
दांतों में कैविटी का खतरा बढ़ता है
गुड़ चिपचिपा होता है और दांतों पर आसानी से चिपक जाता है। इसके कण मसूड़ों और दांतों के बीच फंस सकते हैं, जिससे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। यही बैक्टीरिया दांतों को नुकसान पहुंचाते हैं और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को गुड़ खाने के बाद विशेष रूप से दांत साफ करने की सलाह दी जाती है, ताकि शुगर दांतों पर लंबे समय तक न टिकी रहे।
एलर्जी और सरदर्द जैसी समस्याएं भी
कई बार बाजार में मिलने वाले गुड़ में मिलावट की समस्या सामने आती है। इसमें केमिकल रंग, शुगर सिरप या कृत्रिम स्वीटनिंग एजेंट मिलाए जाते हैं। ऐसा मिलावटी गुड़ एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते, सिरदर्द और उल्टी जैसी प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑर्गेनिक या देसी पद्धति से बना गुड़ ही खरीदना चाहिए ताकि इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके।
कितनी मात्रा में गुड़ खाना सुरक्षित है? विशेषज्ञों की सलाह
डाइटिशियंस के अनुसार सामान्य व्यक्ति को दिनभर में 10 से 20 ग्राम से ज्यादा गुड़ नहीं खाना चाहिए। डायबिटीज मरीजों को इसे पूरी तरह से डॉक्टर की सलाह पर ही डाइट में शामिल करना चाहिए। गुड़ को भोजन के तुरंत बाद ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय शरीर में शुगर तेजी से अवशोषित होती है।
गुड़ का सेवन सबसे बेहतर तब माना जाता है जब इसे दिन में किसी एक समय थोड़ी मात्रा में लिया जाए—जैसे चाय में एक छोटा टुकड़ा, या दोपहर के भोजन के बाद एक छोटा पीस पाचन सुधारने के लिए। बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसकी मात्रा और भी कम रखी जानी चाहिए।
गुड़ निश्चित रूप से सेहत के लिए लाभकारी है, लेकिन तभी जब इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए। जरूरत से ज्यादा सेवन से यह शरीर के लिए उसी तरह नुकसानदेह हो सकता है जैसे चीनी। इस सर्दी में यदि आप गुड़ का स्वाद लेना चाहते हैं तो मात्रा नियंत्रण में रखें और ऑर्गेनिक, शुद्ध गुड़ ही इस्तेमाल करें, ताकि स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव बना रहे।
Author: THE CG NEWS
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