
चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) कार्यक्रम की समय-सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी है। आयोग ने शनिवार को घोषणा की कि अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह विस्तार इसलिए दिया गया है ताकि मतदाताओं का सत्यापन बिना किसी जल्दबाजी के सम्पूर्ण रूप से पूरा किया जा सके। पहले तय समय के अनुसार वोटर वेरिफिकेशन 4 दिसंबर तक होना था, लेकिन अब यह प्रक्रिया 11 दिसंबर तक चलेगी। वहीं ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 9 दिसंबर की बजाय 16 दिसंबर को जारी होगी।
मतदाताओं तक 99.53% फॉर्म पहुंचे, 79% का डिजिटलीकरण पूरा
चुनाव आयोग ने बताया कि SIR के तहत 51 करोड़ मतदाताओं के लिए तैयार किए गए फॉर्म में से 99.53% फॉर्म घर-घर पहुंचाए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 79% फॉर्म का डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है। इस प्रक्रिया के तहत BLO लोगों से फॉर्म भरवाकर उनके नाम, पते और अन्य जरूरी जानकारियों को ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज कराते हैं, जिससे वोटर सूची अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाई जा सके।
SIR क्या है और क्यों जरूरी है?
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है जिसके तहत वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है। इसमें 18 वर्ष से ऊपर के नए मतदाताओं के नाम शामिल किए जाते हैं, वहीं मृत व्यक्तियों, स्थान बदल चुके लोगों और डुप्लिकेट नामों को लिस्ट से हटाया जाता है। मतदाता सूची में मौजूद गलतियाँ भी इसी कवायद के दौरान ठीक की जाती हैं। SIR पिछले 21 वर्षों से नहीं किया गया था, जबकि 1951 से 2004 के बीच यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। लंबे अंतराल के कारण कई बदलाव आवश्यक थे, जैसे बड़े पैमाने पर माइग्रेशन, दो स्थानों पर नाम होना और विदेशी नागरिकों के नाम का सूची में शामिल हो जाना।
SIR को लेकर राजनीति तेज, कांग्रेस ने BLO की मौत को ‘मर्डर’ बताया
इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि अत्यधिक काम के दबाव में जिन BLO की मृत्यु हुई है, वह “सिर्फ मौत नहीं बल्कि मर्डर जैसा अपराध” है। उन्होंने दावा किया कि 20 दिनों में 26 BLO की मौत हुई है। गोंडा के BLO विपिन यादव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार के अनुसार उन पर पिछड़े वर्ग के वोटरों के नाम हटाने का दबाव था। कांग्रेस ने आयोग से सवाल पूछा कि आखिर इतनी जल्दबाजी किसलिए है और क्यों नहीं पर्याप्त समय लेकर SIR कराया जा रहा।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राजनीतिक दल जानबूझकर SIR को लेकर डर का माहौल बना रहे हैं। आयोग का कहना है कि यह सिर्फ एक नियमित और आवश्यक अपडेट प्रक्रिया है जिसमें किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती।
SIR मामला सुप्रीम कोर्ट में भी, जल्द आएगा फैसला
तमिलनाडु, बंगाल और केरल ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केंद्र और चुनाव आयोग को 1 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 2 दिसंबर को तय की गई है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि राज्य सरकारें ठोस आधार प्रस्तुत करती हैं, तो तारीख बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। वहीं तमिलनाडु की याचिका पर 4 दिसंबर और पश्चिम बंगाल की याचिका पर 9 दिसंबर को सुनवाई होगी।
12 राज्य जहां SIR चल रहा है
अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल वे राज्य हैं जहाँ SIR लागू है। इन राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता हैं, जिनकी सूची अपडेट करने में 5.33 लाख BLO और 7 लाख से ज्यादा BLA तैनात किए गए हैं।
मतदाताओं के लिए क्या जरूरी?
SIR के दौरान BLO मतदाताओं को फॉर्म देंगे, जिसमें मौजूद जानकारी को वे देख-परख सकते हैं। यदि किसी का नाम दो जगह दर्ज है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम लिस्ट में नहीं है तो नया पंजीकरण कराना होगा। पहचान के लिए पेंशनर कार्ड, पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर, जमीन आवंटन पत्र और आधार जैसे दस्तावेज मान्य होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आधार को नागरिकता प्रमाण के रूप में नहीं, केवल पहचान के अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में न तो कोई योग्य मतदाता छूटे और न ही कोई अयोग्य व्यक्ति शामिल रह जाए। चुनाव आयोग का दावा है कि इस बार मतदाता सूची पहले से अधिक सटीक और विश्वसनीय होगी।
Author: THE CG NEWS
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