
गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का सबसे अहम और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान मां के शरीर में तेज़ी से बदलाव आते हैं और बच्चे का विकास भी इसी अवधि में सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। ऐसे में खानपान को लेकर जरा-सी लापरवाही भी गर्भस्थ शिशु और मां दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। यही वजह है कि डॉक्टर गर्भावस्था में कुछ खास खाने-पीने की चीजों से सख्त परहेज करने की सलाह देते हैं। वहीं, चाय-कॉफी, जंक फूड, पपीता या अनानास जैसे पारंपरिक संदेहों को लेकर भी महिलाएं अक्सर उलझन में रहती हैं।
‘जरूरी हेल्थ रिपोर्ट’ में आज हम जानेंगे कि प्रेग्नेंसी के दौरान किन 12 चीजों को बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, चाय-कॉफी का सही उपयोग क्या है, और गर्भवती महिलाओं के लिए आदर्श डाइट प्लान क्या होना चाहिए। इस रिपोर्ट के विशेषज्ञ हैं—
डॉ. रितु अग्रवाल, सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट, फोर्टिस हॉस्पिटल, दिल्ली
डॉ. अनामिका सिंह, कंसल्टेंट ओब्स्टेट्रिशियन, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल
प्रेग्नेंसी के दौरान 12 चीजें जिनसे दूर रहना जरूरी
गर्भावस्था में खाए गए हर एक फूड का सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है। डॉक्टर बताते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थ न सिर्फ जोखिम बढ़ाते हैं, बल्कि कई बार गर्भपात, संक्रमण और विकास संबंधी समस्याएं भी बढ़ा सकते हैं।
1. कच्चा या अधपका मांस
गर्भावस्था में अधपका मांस बैक्टीरिया और परजीवी संक्रमण का कारण बन सकता है, जिससे फूड पॉइजनिंग, बुखार और भ्रूण पर प्रभाव पड़ सकता है।
2. कच्चे अंडे
कच्चे अंडों में सैल्मोनेला बैक्टीरिया का खतरा रहता है। इससे उलटी-दस्त और गंभीर डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।
3. अनपाश्चराइज्ड दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स
ऐसे दूध में लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो मां और बच्चे दोनों के लिए घातक हो सकते हैं।
4. अधिक कैफीन (चाय-कॉफी)
ज्यादा कैफीन गर्भपात, कम वजन में बच्चे के जन्म और भ्रूण की गतिविधि में कमी का कारण बन सकता है।
5. पपीता (खासकर कच्चा पपीता)
कच्चे पपीते में लेटेक्स तत्व होता है, जो गर्भाशय संकुचन बढ़ा सकता है।
6. अनानास की अधिक मात्रा
अनानास में ब्रोमेलिन पाया जाता है, जिसकी अधिक मात्रा शरीर में अनचाहे कॉन्ट्रैक्शन बढ़ा सकती है।
7. स्ट्रीट फूड और जंक फूड
बहुत तला हुआ, मसालेदार और अस्वच्छ खाना गैस, एसिडिटी, संक्रमण और वजन असंतुलन बढ़ा सकता है।
8. फिश विद हाई मर्करी
शार्क, स्वॉर्डफिश और किंग मैकेरल जैसी मछलियों में मर्करी की मात्रा अधिक होती है, जिससे बच्चे के मस्तिष्क के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।
9. कच्चा सीफूड
सुशी या कच्चा सीफूड बैक्टीरिया और वायरस का घर होता है, जो संक्रमण दे सकता है।
10. ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ
अचार, नमकीन, चिप्स रक्तचाप बढ़ाकर प्रेग्नेंसी में हाई BP और प्रीक्लेम्पसिया का खतरा बढ़ाते हैं।
11. ज्यादा चीनी
अत्यधिक मीठा वजन बढ़ाता है और जेस्टेशनल डायबिटीज का रिस्क बढ़ाता है।
12. पैक्ड-जूस या अधिक प्रिजर्वेटिव वाला खाना
इनमें शुगर, रसायन और कृत्रिम स्वाद बढ़ाने वाले तत्व होते हैं, जो भ्रूण के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।
क्या प्रेग्नेंसी में चाय-कॉफी पीना सुरक्षित है?
डॉक्टरों के अनुसार—
•एक दिन में 150–200 mg से ज्यादा कैफीन नहीं लेना चाहिए, यानी लगभग 1 कप कॉफी या 2 कप हल्की चाय।
•ज्यादा कैफीन प्लेसेंटा के जरिए सीधे बच्चे तक पहुंचता है और उसके हार्ट रेट व विकास पर असर डाल सकता है।
•खाली पेट चाय-कॉफी पीना बिल्कुल नहीं चाहिए।
•बेहतर है ग्रीन टी, हर्बल टी, या कैफीन-फ्री ड्रिंक्स का विकल्प चुनें।
गर्भावस्था में आदर्श हेल्दी डाइट कैसी होनी चाहिए?
प्रेग्नेंसी में संतुलित आहार मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, डाइट में ये चीजें जरूर शामिल होनी चाहिए:
1. प्रोटीन
दूध, दालें, अंडे, पनीर, चिकन—ये सब बच्चे की ग्रोथ के लिए जरूरी हैं।
2. आयरन
हरी सब्जियां, चुकंदर, अनार, गुड़, बाजरा—ये हीमोग्लोबिन बढ़ाते हैं।
3. फोलिक एसिड
शुरुआती तीन महीनों में बेहद जरूरी। यह बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स कम करता है।
4. कैल्शियम
हड्डियां मजबूत करने के लिए दूध, दही, सोया प्रोडक्ट्स शामिल करें।
5. हाई फाइबर फूड्स
ओट्स, फल, सलाद कब्ज से राहत देते हैं।
6. हेल्दी फैट्स
घरेलू घी, ड्राई फ्रूट्स और ओमेगा फैटी एसिड बच्चे के दिमागी विकास के लिए जरूरी हैं।
7. खूब पानी
डिहाइड्रेशन से लेबर कम्प्लीकेशन और संक्रमण बढ़ता है। दिन में 8–10 ग्लास पानी ज़रूरी है।
कौन सी चीजें सीमित मात्रा में खाएं?
•अंडे और नॉन-वेज तभी खाएं, जब अच्छी तरह पका हो।
•स्पाइसी खाना कम लें, वरना जलन और एसिडिटी बढ़ेगी।
•रेड मीट सीमित मात्रा में लें।
•बार-बार फ्राइंग में बना खाना बिल्कुल न लें।
डॉक्टरों की विशेष सलाह
गायनेकोलॉजिस्ट बताती हैं कि प्रेग्नेंसी में शरीर को कमजोर करने वाले फूड्स से दूरी बनाना उतना ही जरूरी है जितना पौष्टिक चीजों का सेवन करना। गलत खानपान से बच्चे में कम वजन, प्री-टर्म डिलीवरी और डेवलपमेंटल देरी का जोखिम बढ़ सकता है। साथ ही, चाय-कॉफी का अत्यधिक सेवन नींद, हार्टबर्न और तनाव बढ़ाकर गर्भवती महिला को असहज कर सकता है।
निष्कर्ष
गर्भावस्था एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन सावधानीहीन आहार इसे जटिल बना सकता है। इसलिए इस दौरान सही खानपान को प्राथमिकता देना, कैफीन सीमित रखना, कच्चे और पैक्ड फूड्स से दूर रहना और हाइजीन का पूरा ध्यान रखना बेहद जरूरी है। मां की हर भोजन की आदत सीधे बच्चे की सेहत पर असर डालती है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह—ये तीन चीजें सुरक्षित और स्वस्थ गर्भावस्था की सबसे मजबूत नींव हैं।
Author: THE CG NEWS
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