
खैरागढ़ जिले के छुईखदान क्षेत्र में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट के खिलाफ किसानों का विरोध कल अचानक उग्र रूप ले लिया। शनिवार सुबह से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा प्रदर्शन शाम तक तनावपूर्ण हो गया, जिसके चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। करीब 40 गांवों से आए हजारों ग्रामीणों ने 11 दिसंबर को होने वाली जनसुनवाई को रद्द करने की मांग दोहराई। कल का यह प्रदर्शन पूरे दिन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा और प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल उठे।
सुबह का शांत माहौल दोपहर होते-होते बदल गया
किसानों का विरोध कल सुबह तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू हुआ। ग्रामीण ट्रैक्टरों में सवार होकर छुईखदान पहुंचे और एसडीएम कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। सुबह का माहौल पूरी तरह शांत था। लोग नारों के साथ अपनी मांगें रखते हुए प्रशासन से संतुलित और साफ संवाद की उम्मीद कर रहे थे। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित सीमेंट प्लांट से क्षेत्र की उपजाऊ भूमि, जलस्रोत और पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा। उनके मुताबिक, यह परियोजना खेती पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका के लिए खतरा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र में प्लांट प्रस्तावित है, वहां सदियों से खेती-बाड़ी होती आई है और यहां की मिट्टी तथा जल स्रोत पूरी तरह कृषि अनुकूल हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर परियोजना आगे बढ़ाई गई तो भूमि बंजर होगी, भूजल स्तर गिर जाएगा और आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ेगा।
ट्रैक्टर रोके जाने पर भड़के किसान, सड़क पर बैठकर किया विरोध
विरोध की शुरुआत तब उग्र हुई जब छुईखदान नगर सीमा पर पुलिस ने किसानों के ट्रैक्टर रोक दिए। इसके बाद किसानों में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों लोग सड़क पर ही बैठकर नारेबाज़ी करने लगे। करीब आधे घंटे तक बातचीत चलती रही, लेकिन स्थिति सामान्य न होने पर ग्रामीण पैदल ही जुलूस की शक्ल में आगे बढ़े।
ट्रैक्टर रोकने की घटना प्रदर्शनकारियों के लिए मुख्य ट्रिगर साबित हुई। ग्रामीणों ने इसे उनकी आवाज को रोकने की कोशिश बताते हुए कहा कि अगर वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने आए हैं तो उन्हें रोका क्यों गया। इसके बाद भीड़ कई गुना बढ़ गई और लोग एसडीएम कार्यालय की ओर बढ़ने लगे।
एसडीएम कार्यालय छावनी में बदला, प्रवेश की कोशिश पर पुलिस ने रोका
प्रशासन ने पहले से ही एसडीएम कार्यालय परिसर को छावनी में बदल दिया था। यहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात था और मुख्य द्वार पर सुरक्षा कड़ी की गई थी। भीड़ के पहुंचने के बाद किसानों ने कार्यालय के भीतर प्रवेश की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद ग्रामीण बाहर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
करीब दो घंटे तक चला यह विरोध पूरी तरह संगठित और शांत था। आंदोलन की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक गिरवर जंघेल और अन्य किसान नेताओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर 11 दिसंबर की जनसुनवाई रद्द करने की मांग रखी। ज्ञापन में कहा गया कि यह परियोजना पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करती है और स्थानीय लोगों के हितों को नुकसान पहुंचाती है।
शाम होते-होते माहौल बिगड़ा, बैरिकेड्स टूटे—पुलिस ने किया लाठीचार्ज
शाम होते-होते प्रदर्शन ने अचानक उग्र मोड़ ले लिया। किसानों के मुताबिक, भीड़ में घुसे कुछ उपद्रवियों ने बैरिकेड्स तोड़ने शुरू कर दिए, जिससे तनाव फैल गया। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हालात हाथ से निकलते देख उन्हें लाठीचार्ज करना पड़ा। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना, हालांकि पुलिस ने इसे जल्द ही काबू में कर लिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लाठीचार्ज केवल भीड़ को तितर-बितर करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए किया गया। उन्होंने बताया कि तोड़फोड़ करने वालों की पहचान की जा रही है और जांच जारी है। हालांकि किसान नेताओं ने दावा किया कि अधिकांश लोग शांतिपूर्ण थे और कुछ बाहरी तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।
किसानों ने रोजगार के दावे खारिज किए, जनसुनवाई रद्द करने पर अड़े
प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के रोजगार देने के दावों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी दस्तावेज़ों में केवल 138 पदों का उल्लेख है, जो इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए बेहद कम हैं। किसान नेताओं का तर्क है कि प्लांट से जितना नुकसान होगा, उसकी तुलना में रोजगार के नाम पर कुछ भी हासिल नहीं होगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे जनसुनवाई पूरी तरह रद्द होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो आने वाले दिनों में विरोध और भी बड़ा रूप ले सकता है।
स्थिति सामान्य, लेकिन असंतोष बरकरार
देर शाम तक पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और माहौल सामान्य हो गया। हालांकि ग्रामीणों में असंतोष बरकरार है और वे अपने अगले कदम की रणनीति बना रहे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक जनसुनवाई को लेकर कोई नया बयान नहीं आया है, लेकिन कल की घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर विरोध तेज़ होता जा रहा है।
Author: THE CG NEWS
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