हरियाणा का युवक रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसा: स्टडी वीजा पर गया था, 52 लाख कमाने के लालच में एजेंट ने सेना में धकेला; डेढ़ माह से संपर्क बंद

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हरियाणा के करनाल जिले का एक 21 वर्षीय युवक रूस-यूक्रेन युद्ध की आग में फंस गया है। परिवार के सपने लेकर स्टडी वीजा पर गया यह युवक अचानक युद्धभूमि में पहुंच गया, जहां वह डेढ़ महीने से लापता है। घरवालों से आखिरी बार उसकी बात 13 अक्टूबर को हुई थी, जब उसने बताया था कि उसे युद्ध के ‘रेड जोन’ में भेजा जा रहा है। उसने यह भी कहा था कि उसके आसपास लगातार फायरिंग हो रही है। कुछ ही देर बाद उसने रूसी सेना द्वारा दिए गए हथियार की वीडियो भी भेजी थी, जिसमें वह वर्दी में नजर आ रहा था। इसके बाद से फोन बंद है और परिवार के प्रयासों के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा।

परिजन गहरी चिंता में हैं। उन्हें किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। इस बीच, परिवार ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और यहां तक कि रूस के राष्ट्रपति को भी मेल भेजकर मदद की गुहार लगाई है। लेकिन उनकी चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, क्योंकि अब तक कोई अधिकृत जानकारी या आश्वासन नहीं मिला है कि उनका बेटा सुरक्षित है या नहीं।

21 मई को स्टडी वीजा पर रूस गया था युवक

करनाल जिले के चौरा गांव का रहने वाला अनुज इसी साल 21 मई को रूस गया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह विदेश जाकर पढ़ाई करेगा और बेहतर नौकरी करके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेगा। शुरुआत में सब सामान्य था। अनुज को वहां एक जिम में काम भी मिल गया था। संपर्क भी नियमित होता था और घरवाले राहत में थे कि उसका जीवन वहां ठीक चल रहा है।

लेकिन परिवार की यह राहत ज्यादा समय तक नहीं रही। कुछ ही महीनों के भीतर अनुज एक ऐसे जाल में फंस गया, जिसने उसकी जिंदगी दांव पर लगा दी।

6 लाख खर्च कर भेजा, लेकिन एक अन्य एजेंट ने दिया लालच

अनुज के भाई अर्जुन ने बताया कि उन्होंने करीब 6 लाख रुपए में एक एजेंट की मदद से उसे रूस भेजा था। जिम में उसे काम भी मिल गया था। लेकिन एक अन्य भारतीय एजेंट ने वहां मौजूद कई भारतीय युवाओं को बड़ी रकम कमाने के नाम पर झांसा देना शुरू किया। इस एजेंट ने दावा किया कि रूसी सेना में भर्ती होने वाले युवाओं को 52 लाख रुपए तक मिल सकते हैं और यह राशि धीरे-धीरे बैंक खाते में आती रहेगी।

पहले तो अनुज और अन्य युवाओं ने इससे इनकार कर दिया, लेकिन धीरे-धीरे एजेंट ने उन्हें ऐसे सपने दिखाए कि वे लालच में आ गए। अनुज भी इस झांसे में फंस गया। इसके बाद उसे रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया, जहां सिर्फ 10 दिन की बेसिक ट्रेनिंग के बाद उसे सीधे युद्ध के सबसे खतरनाक इलाके यानी ‘रेड जोन’ में भेज दिया गया।

आखिरी बार कॉल कर कहा— ‘हमें रेड जोन भेजा जा रहा है’

अनुज के परिवार के अनुसार, उसने आखिरी बार 13 अक्टूबर को फोन किया था। कॉल में उसने बताया कि उसे और कई भारतीय युवाओं को सबसे खतरनाक इलाके में भेजा जा रहा है। उसने यह भी बताया था कि उनके आसपास लगातार गोलाबारी हो रही है और हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। इसी दौरान उसने हथियार के साथ अपनी एक वीडियो परिवार को भेजी थी। इसके बाद फोन अचानक बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह टूट गया।

अनुज के भाई विशाल ने कहा कि परिवार प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन से हाथ जोड़कर अपील करता है कि उनके भाई को सुरक्षित घर लाया जाए। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच अच्छे संबंध हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सरकार सक्रिय होगी और उनके बेटे को सुरक्षित वापस लाएगी।

परिवार हर जगह गुहार लगा चुका, पर कोई ठोस जवाब नहीं

परिवार ने भारतीय दूतावास, बाह्य मामलों के मंत्रालय और यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय को भी मेल भेजा है। लेकिन अभी तक उन्हें यह नहीं बताया गया है कि अनुज कहां है और उसकी स्थिति कैसी है। परिवार के अनुसार, घर में माहौल बेहद तनावपूर्ण है। मां हर दिन बेटे के फोन का इंतजार करती है और घरवालों का पूरा समय चिंता में गुजर रहा है। परिवार की पीड़ा बढ़ती जा रही है और उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ एक ही चीज चाहिए— बेटा सुरक्षित लौट आए।

हिसार और कैथल में भी हुई है मौतें, कई राज्य प्रभावित

यह मामला कोई अकेला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में उत्तर भारत के कई युवकों को रूस-यूक्रेन युद्ध में धोखे से भेजे जाने की घटनाएँ सामने आई हैं। हिसार के 28 वर्षीय सोनू की एक महीने पहले युद्ध में मौत हो चुकी है। रूस आर्मी ने परिवार को फोन कर बताया था कि सोनू की मौत यूक्रेनी ड्रोन हमले में हुई। इससे पहले कैथल के 22 वर्षीय कर्मचंद की मौत की भी पुष्टि हो चुकी है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में 61 भारतीय युवाओं की सूची जारी की थी, जिनके रूस की सेना में भर्ती होने की पुष्टि हुई है। इनमें हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना के युवा शामिल हैं।

परिवारों में दहशत, सरकार से कार्रवाई की मांग

लगातार बढ़ रहे इन मामलों ने कई राज्यों में चिंता बढ़ा दी है। परिवार सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि भारतीय युवाओं को एजेंटों के जाल में फंसकर युद्ध में न जाना पड़े। अनुज का परिवार भी यही उम्मीद कर रहा है कि भारत सरकार इस मामले की गंभीरता को समझे और उसके बेटे को जल्द से जल्द वापस लाए।

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Author: THE CG NEWS

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